'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान की पीठ थपथपाने वाले चीन को भारत ने वैश्विक मंच पर आईना दिखाया है. चीन की ओर से सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करने के बाद कि उसने युद्ध के दौरान पाकिस्तान को 'ऑन-ग्राउंड तकनीकी सहायता' दी थी, भारत के विदेश मंत्रालय ने बेहद सख्त लहजे में कहा है कि खुद को 'जिम्मेदार' समझने वाले देशों को सोचना चाहिए कि आतंकियों का साथ देने से उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा पर क्या असर पड़ता है.
'साख बचानी है तो आत्ममंथन करें जिम्मेदार राष्ट्र'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन का नाम लिए बिना उस पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा, 'हमने वो रिपोर्टें देखी हैं जो उस बात की पुष्टि करती हैं जो हमें पहले से पता थी. अब यह उन देशों को तय करना है जो खुद को जिम्मेदार मानते हैं कि क्या आतंकवादी बुनियादी ढांचे की रक्षा करना उनकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति और छवि को शोभा देता है?'
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मदद के बावजूद पाकिस्तान की हुई थी 'कुटाई'
भारत ने स्पष्ट किया कि चीन की तमाम तकनीकी मदद और 'लाइव इनपुट' के बावजूद पाकिस्तान भारतीय सेना के प्रहार को झेल नहीं पाया था. जब भारतीय वायुसेना और थल सेना ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर 9 आतंकी कैंपों और 11 सैन्य ठिकानों को तबाह किया, तो इस्लामाबाद घुटनों पर आ गया और युद्धविराम की गुहार लगाने लगा.
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जांच में सामने आया है कि चीन ने भारतीय सेना की तैनाती के लाइव अपडेट्स दिए थे, वहीं तुर्की ने पाकिस्तान को अपने घातक 'बायरकतार' ड्रोन सप्लाई किए थे. लेकिन भारत के आगे यह सब फेल साबित हुआ.
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पहलगाम का बदला
रणधीर जायसवाल ने दोहराया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' कोई हमला नहीं, बल्कि पहलगाम में हुए उस कायरतापूर्ण आतंकी हमले का जवाब था जिसमें 25 निर्दोष पर्यटकों की जान गई थी.