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भारत में भी दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन! क्या इससे कम होगा प्रदूषण? दुनिया के किन देशों में चलती हैं ऐसी ट्रेनें?

रेल से यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. दरअसल भारत में कोयला, बिजली, डीजल से ट्रेन का संचालन करने के बाद अब भारतीय रेल ने एक अहम फैसला लिया है. जानकारी के अनुसार अब भारत में हाइड्रोजन से भी ट्रेन चल सकेगी. सबसे पहले इसका संचालन जींद-सोनीपत मार्ग पर किया जाएगा. देश में अगर इसे पूर्ण रूप से विस्तार मिला तो कार्बन उत्सर्जन करने की दिशा में भारत को बड़ी कामयाबी हासिल हो सकती है. लेकिन इसमें अभी समय लगेगा.

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Written By: Versha Singh Updated: Dec 12, 2025 18:18

रेल से यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. दरअसल भारत में कोयला, बिजली, डीजल से ट्रेन का संचालन करने के बाद अब भारतीय रेल ने एक अहम फैसला लिया है. जानकारी के अनुसार अब भारत में हाइड्रोजन से भी ट्रेन चल सकेगी. सबसे पहले इसका संचालन जींद-सोनीपत मार्ग पर किया जाएगा. देश में अगर इसे पूर्ण रूप से विस्तार मिला तो कार्बन उत्सर्जन करने की दिशा में भारत को बड़ी कामयाबी हासिल हो सकती है. लेकिन इसमें अभी समय लगेगा.

दरअसल, हाइड्रोजन से ट्रेन संचालन अभी अपने शुरुआती चरण में है. अभी इस पर काफी काम होना बाकी है. वहीं, जब से सरकार ने ये फैसला लिया है तब से चारों ओर हाइड्रोजन फ्यूल को लेकर चर्चा हो रही है. तो आइए आज हम इस खबर में जानेंगे कि आखिर हाइड्रोजन फ्यूल क्या होता है और इससे ट्रेन का संचालन कैसे होगा? और साथ ही भारत के अलावा दुनिया में कहां-कहां हाइड्रोजन ट्रेन चल रही है.

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कैसे बनता है हाइड्रोजन फ्यूल?

आपको बता देते हैं कि धरती पर मुक्त रूप से हाइड्रोजन कम ही मिलता है. यह अक्सर पानी (H₂O) या हाइड्रोकार्बन जैसे प्राकृतिक गैस में बंधा होता है, इसलिए हाइड्रोजन को बनाना पड़ता है. इसके लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं.

पानी का इलेक्ट्रोलिसिस (Electrolysis) करना-

पहले तो पानी में बिजली का प्रवाह करके उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ा जाता है. यदि बिजली सौर/पवन/जलविद्युत जैसे स्रोतों से पैदा हो तो इसे आमतौर पर ग्रीन हाइड्रोजन कहते हैं, यानी उत्पादन चरण में भी कार्बन उत्सर्जन बहुत कम/शून्य हो सकता है.

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प्राकृतिक गैसों से भी हाइड्रोजन का निर्माण-

उद्योगों में मीथेन गैस से हाइड्रोजन निकाली जाती है. इसमें CO₂ बनती है. वहीं, बिना कार्बन कैप्चर के इसे ग्रे हाइड्रोजन कहा जाता है. अगर CO₂ को स्टोर करके उत्सर्जन घटाया जाए (CCS), तो उसे ब्लू हाइड्रोजन कहा जाता है.

कोयले का गैसीफिकेशन

कुछ क्षेत्रों में कोयले से भी हाइड्रोजन बनाई जाती है. लेकिन इसका कार्बन फुटप्रिंट सामान्यत: सबसे भारी होता है. दरअसल, हाइड्रोजन ईंधन के साथ साथ एक एनर्जी कैरियर भी है जिसे बनाने में भी एनर्जी लगती है.

दुनिया में कहां-कहां चल रही हाइड्रोजन ट्रेनें?

जानकारी के अनुसार, जर्मनी में ट्रेन गैर विद्युतीकृत रूट पर नियमित पैसेंजर सेवा के लिए चलती हैं. Alstom के अनुसार यह दुनिया की पहली हाइड्रोजन पावर्ड पैसेंजर ट्रेन है और जर्मनी में कमर्शियल सेवा में भी रही है.

वहीं, कनाडा में भी हाइड्रोजन ट्रेन चल रही है. अन्य यूरोपीय देशों ऑस्ट्रिया, स्वीडन, पोलैंड, नीदरलैंड्स आदि में ट्रायल का उल्लेख मिलता है. फ्रांस, इटली जैसे देश भी इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं.

First published on: Dec 12, 2025 06:03 PM

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