कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बीच मंगलवार को बड़ी संख्या में भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच किया. हालांकि किसानों को शंभू बॉर्डर पर ही रोक दिया गया और उन्हें मजबूरन बॉर्डर पर ही अपना डेरा जमाना पड़ा. सीजेपी आंदोलन को लेकर पहले ही दिल्ली में कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित सरकार किसानों के विरोध प्रदर्शन का भी सामना नहीं करना चाहती थी. शायद यही वजह है कि केंद्र सरकार की सलाह पर हरियाणा सरकार ने किसानों की दो बड़ी मांगों को मान लिया है. साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किसानों संग बैठक के लिए हामी भरी है.

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हरियाणा सरकार ने किसानों को दिया आश्वासन


मंगलवार को किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हरियाणा सरकार ने 2 प्रमुख मांगों पर पॉजिटिव रुख अपनाने का आश्वासन दिया है. इसके बाद आंदोलन के बीच बातचीत की संभावना भी बढ़ गई है. हालांकि किसान फिलहाल अपने विरोध कार्यक्रम पर कायम हैं और उनका कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के संयोजक सरवन सिंह पंधेर ने हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा से मुलाकात की. इस बैठक में अंबाला के उपायुक्त (DC) भी मौजूद रहे. किसानों की ओर से सरकार को मांग पत्र सौंपा गया, जिसमें दो प्रमुख मांगें रखी गईं.

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कौन सी हैं वो दो मांगे?


पहली मांग किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी की रिहाई की थी, जबकि दूसरी मांग केंद्र सरकार के साथ औपचारिक वार्ता शुरू कराने की थी. बैठक के बाद हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि सरकार ने दोनों मांगों को स्वीकार करते हुए गुरनाम सिंह चढूनी को जल्द रिहा करने और एक सप्ताह के भीतर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ किसानों की बैठक कराने का आश्वासन दिया है.

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गौरतलब है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में पंजाब से बड़ी संख्या में किसान मंगलवार सुबह दिल्ली के लिए रवाना हुए. किसान बसों, जीप, मिनी बसों और निजी वाहनों के जरिए फतेहगढ़ साहिब से निकले, लेकिन हरियाणा पुलिस ने सुबह करीब साढ़े पांच बजे शंभू बॉर्डर पर हाईवे पर बैरिकेडिंग कर दोनों ओर से यातायात रोक दिया.

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