कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीब सात घंटे के धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन से घायल हुए एक युवक के मामले में एफआईआर दर्ज की है. इसके साथ ही संसद मार्ग स्थित पुलिस उपायुक्त कार्यालय के बाहर राहुल गांधी का धरना समाप्त हो गया. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने प्राथमिकी दर्ज किए जाने को न्याय की दिशा में पहला कदम करार दिया और दावा किया कि न्याय की राह में ‘ब्रेक’ ऊपर से लगाया गया था तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं गृह सचिव के स्तर पर 'अंतिम मंजूरी' मिलने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की.
क्या बोले राहुल गांधी?
एफआईआर दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने कहा, 'यह न्याय की दिशा में पहला कदम है. केस दर्ज हो गया है. उसे गोली लगे हुए एक महीना हो चुका है. उसके शरीर में अभी भी छर्रे फंसे हुए हैं. तीन उसकी आंख में हैं, और वह उससे देख नहीं पा रहा है. तीन या चार छर्रे उसके दिल के पास हैं. इस नौजवान के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है.'
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साथ ही उन्होंने कहा, 'हम आज सुबह 11 बजे यहां पहुंचे थे. हम इतने समय से यहीं हैं. अब जाकर FIR दर्ज हुई है. जरा सोचिए, इस देश में कितनी ही महिलाओं के साथ रेप होता है, कितने ही बच्चे मारे जाते हैं, कितने ही लोगों को गोली मारी जाती है, और कितने ही लोगों के शरीर में छर्रे फंसे होते हैं. यह पुलिस स्टेशन दिल्ली के बीचों-बीच है, फिर भी यहां न्याय नहीं मिल रहा है. सोचिए किसी गांव या छोटे शहर के पुलिस स्टेशन में क्या होता होगा. हमने यहां कुछ गलत नहीं किया. हमने बस एक भारतीय नागरिक, उसकी मां और पिता के लिए न्याय मांगा और इसमें 8 घंटे लग गए. आखिरी मंजूरी, आखिरी 'ओके' होम सेक्रेटरी और खुद अमित शाह की तरफ से आनी थी. उसके बाद ही FIR दर्ज हो पाई. तो, आप समझ सकते हैं कि FIR में देरी कौन कर रहा था. ये पुलिस अधिकारी इसे दर्ज करना चाहते थे, दूसरे भी ऐसा करना चाहते थे, लेकिन न्याय की प्रक्रिया को ऊपर से रोका जा रहा था.'
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘हमने भारतीय न्याय संहिता की धारा 118 (खतरनाक हथियारों या साधनों से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना) और धारा 25 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है.'
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कई घंटे बैठे रहे धरने पर
20 जुलाई को छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के छर्रों से घायल हुए 19 वर्षीय साहिल लोचब को लेकर राहुल गांधी संसद मार्ग थाने पहुंचे थे. साहिल लोचब, उनके परिवार के सदस्यों और वकीलों के साथ राहुल गांधी पहंचे थे. राहुल गांधी ने पुलिस से एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. मांग नहीं माने जाने पर वह थाना परिसर स्थित डीसीपी कार्यालय के सामने वह धरने पर बैठ गए.
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पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, मुकुल वासनिक, कुमारी सैलजा, वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और कई अन्य नेता इस धरना में शामिल हुए. धरना शुरू होने के बाद संसद मार्ग थाने के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘पैलेट गन का हिसाब दो, अमित शाह जवाब दो’ के नारे लगाए.
क्या है राहुल गांधी का कहना
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी एक आंख की रोशनी खतरे में है. राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ ऐसी कार्रवाई 'गंभीर अपराध' है. उन्होंने आरोप लगाया कि साहिल न्याय के लिए प्राथमिकी दर्ज कराना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने नहीं दिया जा रहा है.
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14 अगस्त को थाने गए थे साहिल
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि साहिल लोचब अपने वकीलों के साथ 14 अगस्त को दिल्ली पुलिस के पास गए थे और लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उन्हें जांच अधिकारी का नंबर नहीं दिया गया. इसके बाद 17 अगस्त को ईमेल और फोन के माध्यम से भी मामले को उठाया गया, लेकिन शिकायत की पावती नहीं दी गई और आईओ का संपर्क नंबर भी उपलब्ध नहीं कराया गया.
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साहिल लोचब और उनके परिवार का आरोप है कि दिल्ली में छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई में पैलेट गन के छर्रे लगने से साहिल घायल हुए थे. राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साहिल लोचब को मीडिया के सामने पेश किया था. साहिल की दाईं आंख में गंभीर चोट आई थी और उनके परिवार की ओर से दावा किया गया था कि चोट के कारण उनकी आंख की रोशनी जाने का खतरा है.