कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को मोदी सरकार को घेरा. उनका आरोप है कि वित्त मंत्रालय UPI पेमेंट पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है और पीएम मोदी ने ट्रेड डील की तरह इस मामले में भी अमेरिका के सामने सरेंडर कर दिया है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने ये भी पूछा कि क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए US कंपनियों के लिए डिजिटल पेमेंट का गेट ओपन करने के लिए ये कदम उठाया जा रहा है.
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क्या बोले राहुल गांधी?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने X पर लिखा- ''मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है. अब 2 हजार से ऊपर के मर्चेंट UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है. इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ 5% हो, लेकिन UPI के कुल ट्रांजेक्शन वेल्यू का करीब 65% इन्हीं में है. सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फीस नहीं ली जाएगी. लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से. अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं. अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है. अमेरिकी ट्रेड डील की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने सरेंडर कर रहे हैं.''
क्या है मामला?
दरअसल, सोमवार को वित्त मंत्रालय ने UPI पेमेंट को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके तहत बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को ऑर्डर दिया गया था कि वो 2 हजार रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन और RuPay डेबिट कार्ड से किए गए पेमेंट पर कोई चार्ज ना लगाएं. हालांकि केंद्र की ओर से ये साफ नहीं किया है कि क्या 2 हजार रुपये से ज्यादा की पेमेंट पर चार्ज लगेगा, जिसका भुगतान मर्चेंट्स को करना होगा. अब तक, किसी भी तरह की UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगाया गया है.
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