संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है. यह सत्र 19 दिन का होगा. इस सत्र में सरकार परिसीमन समेत कई विधेयक पेश करने की तैयार कर रही है. इसको लेकर कांग्रेस भी अपनी रणनीति बना रही है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने न्यूज24 के मैनेजिंग एडिटर मानक गुप्ता से बात करते हुए बताया कि सरकार कई विवादित विधेयक लाने की तैयारी में है. जिसका कड़ा विरोध किया जाएगा.
जयराम रमेश ने बताया कि हम तो संसद जाते हैं चलाने के लिए. लेकिन संसद चलाने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सहयोग तो होना चाहिए. लेकिन मैंने पिछले कुछ सत्रों में देखा है कि सत्तापक्ष के सांसद प्रदर्शन करने आ जाते हैं और वो संसद चलाना नहीं चाहते. मानसून सत्र 19 दिन का है. कई विधयेक आएंगे. 19 तारीख को राजनाथ सिंह ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है. ऐसा सत्र से पहले हमेशा होता है. उससे कुछ निकलता नहीं है. हम बोलते हैं और वो सुनते हैं. लेकिन करते वो अपनी मनमर्जी ही है.
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'सरकार को नहीं मिलेगा दो तिहाई बहुमत'
जयराम रमेश ने बताया कि हम परिसीमन समेत कई बिलों का कड़ा विरोध करेंगे. परिसीमन बिल 17 अप्रैल बिना दो तिहाई बहुमत के गिर गया था, उसे सरकार वापस लाने की तैयारी में है. इस बीच भाजपा ने टीएमसी, शिवसेना यूबीटी को तोड़ा है. लेकिन दो तिहाई बहुमत मिलने की गुंजाइश तब भी नहीं बची है.
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क्या डीएमके सरकार के साथ जाएगी? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि पिछले एक से दो महीने में हुआ है, उससे कोई संकेत नहीं आया है कि डीएमके सरकार के साथ जाएगी. क्योंकि भाजपा और डीएमके दोनों की विचारधारा का कोई मेल नहीं है. अगर वे संसद से गायब भी रहते हैं तब भी सरकार को दो तिहाई बहुमत नहीं मिलेगा.
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'सरकार की नियत साफ नहीं.'
जयराम रमेश ने बताया आज प्रतिशोध और उत्पीड़न की राजनीति का माहौल है. हम जानते हैं कि गृहमंत्री अमित शाह कैसे राजनीति करते हैं. परिसीमन विधेयक में उन्होंने कई पार्टियों से बातचीत की. और जब वे विधेयक लेकर आए तो बिल्कुल बदला हुआ था. नियत उनकी बिल्कुल साफ नहीं है. इन लोगों की नियत साफ नहीं है. इनके विधेयक के पीछे असली मकसद क्या है और उनकी क्या नियत है, उसे समझने की जरूरत है.
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किन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस?
उन्होंने बताया कि संसद में विधेयकों के अलावा हम कई और मुद्दे भी उठाएंगे. राम मंदिर चंदा चोरी, नीट पेपर लीक, एनटीए, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, विदेशी नीति के सामने चुनौतियां, अमेरिका के साथ ट्रेड डील समेत कई मुद्दे हैं. जून 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन को क्लीन चिट दे दी थी. चीन और पाकिस्तान के बीच जुगलबंदी देखने को मिल रही है.
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चुनाव आयोग पर निशाना
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए का एक घटक दल आया. जिसका नाम था चुनाव आयोग. चुनाव आयोग एनडीए का सबसे अहम अंग बन गया. उसकी वजह से हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हम हार गए. चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया चल रही है. इसके तहत जो भारतीय नागरिक कई दशकों से वोट कर रहे हैं, उनका नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिया जा रहा है. एसआईआर लोगों के नाम काटने का एक तरीका बना गया है. चुनाव आयोग का दुरुपयोग करना उनका टारगेट था. हम भाजपा और चुनाव आयोग की जुगलबंदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.
AAP के साथ कैसे रिश्ते?
जयराम रमेश ने बताया कि पंजाब में हमारी मुख्य विरोधी पार्टी आम आदमी पार्टी है. हम उसके खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. हम आदमी आम आदमी पार्टी के खिलाफ पंजाब में लड़ेंगे और लड़ रहे हैं. इंडिया अलायंस राज्यों के लिए नहीं है. इंडिया अलायंस लोकसभा चुनाव के लिए था. यह बात सही है कि जेएमएम के साथ हम झारखंड गठबंधन में है. समाजवादी के साथ हम गठबंधन में थे. अभी विधानसभा चुनाव के लिए भी बातचीत चल रही है. एनसीपी और शिवसेना के साथ महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव हम लड़े. जिस मकसद से इंडिया अलायंस बना था वो लोकसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए था.
पंजाब कांग्रेस में फूट है?
उन्होंने कहा, भगवंत मान के खिलाफ हमारा पूरा चुनावी अभियान है. हम चाहते हैं कि जिस तरीके से उन्होंने शासन किया है, लोगों को गुमराह किया है, बहुत ड्रामाबाजी किया है, लोग पहचान गए हैं ना. पंजाब की जनता बदलाव चाहती है, परिवर्तन चाहती है. और उसका एक नतीजा यह है कि हमारे कार्डर में वास्तविक थोड़ा उत्तेजित हो गए हैं. हमारे नेताओं के समर्थक हैं थोड़ा ज्यादा ही बोल लेते हैं.
मुझे पूरा विश्वास है आज भी राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष की बैठक हुई. बैठक में पंजाब को लेकर और उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा, यूपी में पार्टी के मुद्दे हैं, उनको लेकर बातचीत हुई. हम एक लोकतांत्रिक पार्टी हैं, हमेशा रहेंगे और उसका यह नतीजा है कि आपको कई आवाज सुनाई देंगी. इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी में एक एकजुटता नहीं है.
राहुल गांधी के बारे में क्या बोला?
जयराम रमेश ने कहा, मैं समझता हूं 'भारत जोड़ो यात्रा' हमारे देश की राजनीति के लिए, कांग्रेस पार्टी के लिए और खुद उनके लिए एक परिवर्तनकारी क्षण था. क्योंकि लोग मुझसे पूछते थे कि क्या नया राहुल गांधी है? तो मैं कहता था ये नया राहुल गांधी नहीं है. ये असली राहुल गांधी है. 'भारत जोड़ो यात्रा' के समय और उसके बाद 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' में. 2024 के चुनाव के लिए जिस तरीके से उन्होंने नैरेटिव बनाया वो बहुत प्रभावशाली निकला. '400 पार' नारा लगाने वालों को केवल 240 सीटें मिली. हम थोड़ी और मेहनत करते तो ये सत्ता में नहीं होते.
मीडिया पर है भयंकर कंट्रोल
साथ ही उन्होंने कहा, मीडिया पर इनका भयंकर कंट्रोल है. मीडिया को कंट्रोल करते हैं. मीडिया को माइक्रो मैनेज करते हैं. प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, डिजिटल मीडिया सभी मीडिया को ये कंट्रोल करने में लगे हुए हैं. पर उसके बावजूद इनको 240 सीटें मिली. इनके बावजूद प्रधानमंत्री की आलोचना होती है. इनकी विदेश नीति की आलोचना होती है. इनकी आर्थिक नीति की आलोचना होती है. इनकी रणनीति की आलोचना होती है. आज लोग समझ गए हैं कि पिछले 12 साल में जो ड्रामाबाजी चल रहा है शासन के नाम पर मैक्सिमम गवर्नेंस. यह तो मिनिमम गवर्नेंस मैक्सिमम ड्रामा हो गया. सभी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया गया है. इलेक्शन कमीशन को कमजोर किया गया है. मीडिया पर कंट्रोल करने की हमेशा प्रयास रहता है. न्यायपालिकाओं को भी निशाना बनाया गया है. हालांकि, कभी-कभी न्यायपालिका बहुत साहस दिखाती है और निर्णय देते हैं. ये अटल बिहारी वाजपेयी की बीजेपी नहीं है. यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह की बीजेपी है. इनकी मानसिकता अलग है. इनकी सोच अलग है.
क्या कांग्रेस फिर सत्ता में आएगी?
उन्होंने कहा, 2029 के लिए हम संघर्ष कर रहे हैं. हम सत्ता के लिए ही तो संघर्ष कर रहे हैं. हम कोई एनजीओ तो नहीं है. राजनीतिक पार्टी है. राजनीतिक पार्टी का मकसद क्या होता है? राजनीतिक पार्टी का मकसद चुनाव लड़ने का. 2024 को अगर आप देखें तो हमारी ओर से कुछ कमजोरियां तो थी. अगर हम जल्द से पहचानते और तुरंत काम करते तो इनको 240 सीटें भी नहीं मिलती. 200 पर इन्हें रोक सकते थे.