देश भर में छात्र आंदोलनों और सड़कों पर तेज होते विरोध प्रदर्शनों के बीच भाजपा ने अपनी रणनीति और संवाद शैली में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी ने जेन-जी की नब्ज टटोलने और उनके बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए 80 सदस्यों का एक इंटरनल ग्रुप तैयार किया है. इस टीम का मकसद यह समझना है कि आज का युवा हिंदुत्व को किस नजरिए से देखता है और उससे किस भाषा में संवाद किया जाना चाहिए.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘युवा संवाद’ नाम के इस अभियान में केंद्रीय युवा मामले मंत्री मनसुख मांडविया के मार्गदर्शन में छह उप-समूह काम कर रहे हैं. इन समूहों की अब तक कई बैठकें हो चुकी हैं. इनमें गोरखपुर से सांसद रवि किशन, नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज, बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या, वडोदरा से सांसद हेमांग जोशी और पार्टी महासचिव स्मृति ईरानी जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं. भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस पैनल की पहली बैठक की अध्यक्षता की थी.
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जुलाई में पेपर लीक के खिलाफ हुए विशाल छात्र प्रदर्शनों के प्रभाव और व्यापकता का सही आकलन न कर पाना इस पैनल के गठन की मुख्य वजह बना. उस आंदोलन के दबाव में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ा था. इसके बाद पार्टी नेतृत्व को लगा कि युवाओं के असंतोष को पारंपरिक सियासी चश्मे से देखना भारी पड़ सकता है और इसके लिए नए नैरेटिव की जरूरत है.
क्या कहती है पैनल की रिपोर्ट
पैनल की रिपोर्ट में इस बात पर गहराई से विचार किया जा रहा है कि युवा हिंदुत्व के विचार को कैसे स्वीकार करते हैं. गोरखपुर सांसद रवि किशन ने सुझाव दिया कि युवाओं पर सीधे हिंदुत्व थोपने के बजाय सांस्कृतिक मूल्यों पर बात होनी चाहिए. एचटी ने अपनी रिपोर्ट में उनके हवाले से लिखा है, ‘वे हिंदू पैदा हुए हैं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि इस पर बहुत ज्यादा जोर देने की जरूरत है. बेहतर होगा कि आध्यात्मिक शक्ति और संस्कारों पर ध्यान केंद्रित किया जाए.’
पैनल का यह भी मानना है कि पश्चिमी शब्द ‘Gen Z’ के बजाय संवाद में ‘युवा’ या ‘यूथ’ जैसे भारतीय और सहज शब्दों का उपयोग ज्यादा असरदार होगा. साथ ही रवि किशन ने कहा कि अगर गलतियां होती हैं तो स्वीकार करें, लेकिन उन्हें दोहराएं नहीं.
विपक्ष को काउंटर करने की नई रणनीति
इस वर्किंग ग्रुप के सुझावों का असर भाजपा के कार्यक्रमों में दिखने भी लगा है. 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वडोदरा रैली में इसका प्रयोग देखा गया. वहां पीएम के वॉकवे पर मशहूर बैंड ‘क्वीन’ के ‘वी विल रॉक यू’ और फिल्म धुरंधर के गानों का फ्यूजन बजाया गया, जिससे सोशल मीडिया के लिए आकर्षक रील्स तैयार की जा सकीं. पैनल ने तय किया कि अगर विपक्ष किसी प्रदर्शन में 10000 लोग जुटाता है, तो सरकार और पार्टी के समर्थन में कम से कम 50,000 लोगों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन होना चाहिए. इसी रणनीति के तहत जब राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट मार्च निकाल रहे थे, तो भाजपा ने असम और गुजरात में उनके खिलाफ जवाबी प्रदर्शन किए.
पार्टी की अगली रणनीति उन युवाओं तक पहुंचने की है जो किसी पार्टी से बंधे नहीं हैं और खासकर युवा महिलाएं.