सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के कामकाज को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ किया है कि बीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा का पद केवल अस्थायी है. वे तब तक ही इस पद पर बने रह सकते हैं, जब तक वकीलों की नवगठित संस्था अपने नए पदाधिकारियों का चुनाव नहीं कर लेती. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने संस्था के कामकाज पर बड़ा अंकुश लगाते हुए निर्देश दिया कि बीसीआई अब कोई भी नीतिगत फैसला भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल के परामर्श के बिना नहीं ले सकेगी.
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने बीसीआई अध्यक्ष के लंबे कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. पीठ ने साफ कहा कि उसका सरोकार किसी व्यक्ति विशेष के आचरण से नहीं, बल्कि संस्था की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और उसके कामकाज से है. न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि अदालत मौजूदा व्यवस्था पर अपनी मंजूरी की मुहर नहीं लगा रही है.
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NLSIU ने रद्द किया 34वां दीक्षांत समारोह, बतौर मेहमान CJI-BCI चीफ को बुलाने के विरोध में थे छात्र
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने अदालत को बताया कि नियमों में सिर्फ दो वर्ष के कार्यकाल का प्रावधान था, लेकिन प्रस्ताव पारित करके इसे पहले तीन और फिर 2030 तक यानी पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया. उन्होंने दलील दी कि नियमों का इस्तेमाल चुनाव टालने और पद पर बने रहने के लिए किया गया. वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने 2020 में बने ट्रस्ट में 11 प्रबंध न्यासियों को स्थायी बनाए जाने पर सवाल उठाए, वहीं अधिवक्ता सीयू सिंह ने बिना व्यापक सलाह के प्रस्ताव जारी करने का आरोप लगाया.
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दूसरी ओर, बीसीआई अध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्णकुमार ने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से परामर्श के सुझाव पर सहमति जताई. सभी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने नवगठित राज्य बार परिषदों को निर्देश दिया कि वे सह-सदस्यों को नामित करने की प्रक्रिया जल्द पूरी कर बीसीआई के नए प्रतिनिधियों का चुनाव करें. मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी. इससे पहले, बीसीआई के अध्यक्ष के रूप में मिश्रा के लंबे कार्यकाल की वैधता को चुनौती देते हुए और उन्हें पद से हटाने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की गई थी.
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BCI के कामकाज पर कब शुरू हुआ विवाद?
पूरा घटनाक्रम हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में हुए विवाद से जुड़ा है. वहां छात्रों ने सीजेआई के मुख्य अतिथि बनने पर विरोध जताया था. उस विरोध के बाद BCI ने NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के एनरोलमेंट पर अस्थायी रोक लगा दी थी. हालांकि, किरकिरी के कारण बाद में BCI ने अपना फैसला वापस लिया. इसी पृष्ठभूमि में NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने एक साझा पत्र जारी कर NALSAR के छात्रों के साथ बिना शर्त एकजुटता जताई. बाद में NLSIU का इवेंट भी रद्द करना पड़ा।
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