World Brain Day 2026: हमारा मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी एक ही संचार प्रणाली के अभिन्न अंग हैं. यह गति, बैलेंस और सेंसरी परसेप्शन समेत शरीर के लिए लगभग सभी ओटोमेटिक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी भी है. रीढ़ की हड्डी और दिमाग चलने, झुकने, मानसिक स्पष्टता में और सही पोस्चर के लिए एकसाथ काम करते हैं. ऐसे में अगर व्यक्ति गलत तरह से उठता-बैठता है और अपनी रीढ़ (Spine) या दिमाग में से किसी एक अंग की सेहत को इग्नोर करता है तो दूसरे अंग पर भी इसका असर पड़ता है. ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए रीढ़ और दिमाग के बीच संतुलन बनाए रखना और दोनों की सेहत का ख्याल रखना जरूरी है. इसी बारे में बताते हुए मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन, डॉ. गौरव बतरा ने बताया है कि कि नर्वस सिस्टम को ठीक रखने के लिए क्या करना चाहिए जिससे दिमाग और रीढ़ की सेहत को फायदा मिले.
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कैसे रखें नर्वस सिस्टम को हेल्दी
- न्यूरोसर्जन के अनुसार, व्यक्ति को बैठते और काम करते हुए अपनो पोस्चर को ठीक रखना चाहिए. सही पोस्चर वो है जिसमें आपका सिर कंधों से ऊपर ही रहे, यानी लेटकर काम करना या झुककर बैठना सही नहीं है. कोशिश होनी चाहिए कि आपकी गर्दन पर कम से कम प्रेशर पड़े.
- फिजिकल एक्टिविटी जैसे चलना, स्ट्रेचिंग करना और एब्डोमिनल एक्सरसाइज से रीढ़ स्टेबलाइज होती है और इससे नर्वस सिस्टम में ब्लड फ्लो बेहतर होता है.
- पूरा आराम लेना भी बेहद जरूरी है. आराम करने पर शरीर को रीढ़ के टिशूज और नर्व्स को रिपेयर करने का समय मिलता है.
- खुद को हाइड्रेटेड रखना भी जरूरी है. इससे वर्टेबरे के आस-पास की सुरक्षात्मक कुशनिंग डिस्क स्वस्थ रहती है.
- संतुलित आहार लेना जरूरी है जिसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड्स, एंटी-ऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन डी शामिल हों. इससे नर्वस सिस्टम और हड्डियों की सेहत अच्छी रहती है.
- न्यूरोसर्जन धूम्रपान छोड़ने की सलाह देते हैं. धूम्रपान से रीढ़ की हड्डी के टिशूज में ब्लड फ्लो की कमी आती है.
लंबे समय तक ना बैठे रहें
लंबे समय तक बैठे रहना रीढ़ की सेहत को बिगाड़ता है, ऐसे में न्यूरोसर्जन की सलाह है कि लंबे समय तक बैठने वाला काम करते हैं तो बीच-बीच में उठकर घूमें, गहरी सांस लें और तनाव से बचने के लिए हो सके तो थोड़ी स्ट्रेचिंग करें.
समय-समय पर कराएं चेकअप
अगर पैरों, बाहों, पीठ, रीढ़, कूल्हों या शरीर के किसी भी अंग में दर्द होता है और लौटकर वापस आता रहता है तो यह न्यूरोलॉजिकल समस्या भी हो सकती है जो आपके दिमाग पर असर डालती है. इसीलिए डॉक्टर से मिलकर जांच करवाना जरूरी है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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