महाराष्ट्र के नागपुर से बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, क्लोरीन गैस लीक होने से 40 लोगों को तुरंत अस्पताल भर्ती कराया गया है. इस जहरीली गैस लीक के चलते एहतियात के तौर पर क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है और आसपास रहने वाले लोगों को इलाके से सैकड़ों मीटर दूर रहने के लिए कहा गया है, ताकि स्थिति गंभीर रूप न ले. स्थिति को काबू में लाने के लिए NDRF और नगर निगम की फायर ब्रिगेड की टीमों को भी मौके पर बुलाया गया, ताकि टीम मिलकर गैस वीक को बेअसर करें. हालांकि, सवाल उठता है कि क्या होगा अगर किसी व्यक्ति के अंदर ये गैस चली जाए, क्या ये खतरनाक है? आइए जानते हैं.

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क्या होगा अगर क्लोरीन शरीर में घुस जाए

ATSDR की रिपोर्ट के अनुसार, क्लोरीन गैस शरीर में मुख्य रूप से सांस के जरिए प्रवेश कर सकता है. यह नाक या मुंह के रास्ते शरीर में जा सकती है कम सांद्रता यानी 10 ppm से कम होने पर क्लोरीन का लगभग पूरा हिस्सा सांस की नली के ऊपरी हिस्से में ही निकल जाती है और बहुत कम मात्रा ही आपके फेफड़ों तक पहुंच पाती है. क्लोरीन के संपर्क का असर उसकी सांद्रता और संपर्क की अवधि पर निर्भर करता है. रेस्पिरेटरी संबंधी समस्याओं वाले लोगों पर इसका प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है, इसलिए अगर कहीं पर ये लीक हो जाए, तो बचाव जरूरी है.

क्लोरीन के संपर्क से कौन से लक्षण और नुकसान हो सकते हैं?

हवा में क्लोरीन की कम मात्रा भी स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है. 1-3 ppm पर नाक में हल्की जलन, 5 ppm पर आंखों में जलन और 5-15 ppm पर गले में जलन की समस्या हो सकता है. लगभग 30 ppm पर सीने में दर्द, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत और खांसी हो सकती है. 40-60 ppm पर फेफड़ों से जुड़ी और उनमें तरल पदार्थ जमा होने जैसी गंभीर स्थिति हो सकती है. लगभग 430 ppm में 30 मिनट और 1,000 ppm में कुछ मिनट के संपर्क से मौत तक हो सकती है.  (पीपीएम {PPM} का पूरा रूप पार्ट्स प्रति मिलियन (Parts Per Million) है. यह किसी मिश्रण, घोल में किसी तत्व या पदार्थ की बहुत कम मात्रा को मापने की एक इकाई है).

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Source: ATSDR