आपने अक्सर देखा होगा कि जो लोग पहले काफी पतले-दुबले थे वह अचानक मोटे हो जाते हैं. इसको लेकर जब सवाल पूछा जाता है कि, आखिर तुम अचानक इतने मोटे क्यों हो गए, तो उनका एक ही कहना होता है, पता नहीं यार-खुद ही होता जा रह हूं! कई लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है कि थायरॉइड, जो कि आपकी गर्दन के सामने तितली के आकार की एक छोटी सी ग्रंथि होती है, वह भी मोटापे का कारण बन सकती है और ज्यादातर मामलों में बनती भी है. आइए जानते हैं कैसे थायरॉइड बिगड़ने व्यक्ति का वजन बढ़ने लगता है और इसके अलावा क्या दूसरे लक्षण देखने को मिलते हैं?
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क्या है हाइपोथायरायडिज्म?
हाइपोथायरायडिज्म, जिसे अंडरएक्टिव थायरॉयड भी कहते हैं, तब होता है जब थायरॉयड ग्लैंड शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त थायरॉयड हार्मोन नहीं बना पाता. NIDDK के मुताबिक, थायरॉयड गले के सामने मौजूद एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि होती है. इसमें से निकलने वाला थायरॉयड हार्मोन यह तय करते हैं कि आपका शरीर ऊर्जा का इस्तेमाल कैसे करेगा, इसलिए ये शरीर के लगभग हर अंग पर असर डालते हैं और बहुत महत्वपूर्ण कार्य करती है, यहां तक कि दिल की धड़कन पर भी. हालांकि, जब पर्याप्त थायरॉयड हार्मोन ठीक से शरीर में नहीं बन पाता है, तो शरीर के कई काम धीमे पड़ जाते हैं, जिसका एक लक्षण ये होता है कि व्यक्ति अचानक मोटा हो जाता है.
थायरॉयड बिगड़ने पर कैसे वजन बढ़ने लगता है?
PMC का मानना है कि, शरीर की बनावट और थायरॉयड हार्मोन के बीच किसी तरह का गहरा संबंध है. थायरॉयड हार्मोन बेसल मेटाबॉलिज्म और थर्मोजेनेसिस को कंट्रोल करते हैं, और लिपिड व ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म, खाना खाने और फैट ऑक्सीडेशन में अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में थायरॉयड बिगड़ने का असर, शरीर के वजन और बनावट, शरीर के तापमान और कुल व रेस्टिंग एनर्जी खर्च (REE) में बदलाव में भी हो सकता है, चाहे शारीरिक गतिविधि कैसी भी हो. इसके अलावा, मेटाबॉलिक रेट कम होने का संबंध ज्यादा बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और मोटापे के ज्यादा मामलों से भी पाया गया है. ऐसे क्लिनिकल सबूत बताते हैं कि सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म के रूप में थायरॉयड की हल्की खराबी भी शरीर के वजन में बड़े बदलावों से जुड़ी होती है और यह ज्यादा वजन और मोटापे का एक रिस्क फैक्टर है.
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किन लोगों में रहता है ज्यादा रिस्क?
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म होने की संभावना ज्यादा होती है. आपको हाइपोथायरायडिज्म होने की संभावना ज्यादा है या नहीं ये इस बात पर निर्भर करती है कि;
- आपको पहले थायरॉयड की कोई समस्या रही हो, जैसे कि घेंघा (goiter)
- थायरॉयड की समस्या को ठीक करने के लिए सर्जरी या रेडियोएक्टिव आयोडीन का इलाज हुआ हो
- थायरॉयड, गर्दन या छाती पर रेडिएशन का इलाज हुआ हो
- परिवार में थायरॉयड की बीमारी का इतिहास रहा हो
- पिछले 6 महीनों में आप गर्भवती रही हों
- आपको टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) हो, जो महिलाओं को प्रभावित करने वाली एक जेनेटिक बीमारी है.
इसके अलावा कई अन्य बीमारियों के कारण भी हाइपोथायरायडिज्म की समस्या पैदा हो सकती है, जिसमें सीलिएक डिजीज, शोग्रेन सिंड्रोम, परनीशियस एनीमिया, टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज, रुमेटॉयड आर्थराइटिस, ऑटोइम्यून बीमारी, ल्यूपस, क्रोनिक ऑटोइम्यून इंफ्लेमेटरी स्थिति के कारण भी हो सकती है.
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हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति में कैसे दिख सकते हैं लक्षण?
- थायरॉयड बिगड़ने के कारण न सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या होती है, बल्कि
- थकान
- ठंड बर्दाश्त न कर पाना
- जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
- रूखी त्वचा या रूखे, पतले बाल
- दिल की धड़कन धीमी होना
- डिप्रेशन की समस्या हो सकती है.
इस समस्या को कंट्रोल रखने के लिए डॉक्टर से सलाह, जांच और उनके मुताबिक डाइट से लेकर दवाओं का नियमित सेवन जरूरी है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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