Gallbladder Removal: गॉलब्लैडर को हिंदी में पित्ताशय या पित्त की थैली कहा जाता है. आमतौर पर गालस्टोन यीनी पित्त की थैली में पथरी होने पर, इंफ्लेमेशन के कारण या बाइल डक्ट में दिक्कतें आने पर पित्ताशय को निकाल दिया जाता है. पित्ताशय को निकालने के लिए सर्जरी की जाती है जिससे दर्द से राहत मिलती है और जानलेवा हो सकने वाली दिक्कतों को पहले ही रोक दिया जाता है, लेकिन पित्ताशय निकालने के कुछ दिनों बाद तक व्यक्ति को कुछ परेशानियां हो सकती हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं पित्त की थैली निकालने (Gallbladder Removal Surgery) के कौन-कौन से साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं और कौन सी सावधानियां बरतना जरूरी होता है.

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पित्त की थैली निकालने के बाद क्या होता है

पित्ताशय बाइल जूस को स्टोर करने वाला अंग होता है और बाइल को सीधा आंतों तक पहुंचाता है. लेकिन, अगर पित्ताशय बीमार हो जाए यानी डैमेज हो जाए, ठीक तरह से काम ना कर सके, खाना पचाने में मुश्किल आने लगे और दर्द रहने लगे तो पित्ताशय निकालना पड़ता है. ऐसे में बाइल निकाल देने के बाद पाचन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं.

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फैट पचाने में दिक्कत

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गॉलब्लैडर के बिना बाइल रिलीज रेग्यूलेट नहीं हो पाता है जिससे फैट ठीक तरह से नहीं पचता है. ऐसे में मरीजों को अक्सर ही पेट फूलने, अपच और पेट में असहजता की दिक्कत होती है. खासतौर से हाई फैट मील लेने के बाद परेशानी होने लगती है.

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कब्ज होना

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पित्ताशय निकाल देने के बाद पित्ताशय की पथरी से होने वाली कब्ज से थोड़ी राहत मिलती है, लेकिन खानपान ठीक ना किया जाए तो कब्ज बनी रह सकती है.

दस्त लगना

गॉलब्लैडर सर्जरी के बाद दस्त लगना एक आम साइड इफेक्ट माना जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बाइल जूस अब सीधा आंतों में बहने लगते हैं जिसके कारण मल ढीला होता जाता है और दस्त लग जाते हैं. खानपान में फैट की मात्रा ज्यादा हो और फाइबर कम हो तो खासतौर से यह दिक्कत हो जाती है.

पीलिया या बुखार

अगर बाइल डक्ट में अब भी गालस्टोन रह जाए तो इससे पीलिया हो सकता है, दर्द रह सकता है और बुखार आ सकता है.

आंतों की चोट

ऐसा बहुत कम मामलों में होता है यानी गॉलब्लैडर रिमूवल सर्जरी के बाद इंटेस्टिनल इंजरी होना दुर्लभ है.

पित्ताशय निकालने की सर्जरी के बाद सावधानी है जरूरी

  • पित्ताशय निकल जाने के बाद शरीर को फैट्स पचाने में मुश्किल आने लगती है. वहीं, बाइल जूस सीधा आंतों में निरंतर बहते दाते हैं. ऐसे में शुरुआती दौर में खानपान को एकदम सादा रखने की कोशिश करनी चाहिए.
  • सब्जी का पानी, सादा चावल, मैश्ड पोटेटो या फिर योगर्ट जैसे फूड्स खाने चाहिए.
  • बहुत ज्यादा तला हुआ, तीखा या ग्रीसी खाना ना खाएं. शरीर इन्हें पता नहीं पाता है.
  • फाइबर से भरपूर डाइट लें. खानपान में फाइबर से भरपू फल और सब्जियों को शामिल करें, गाजर, पालक, सेब और बेरीज खाए जा सकते हैं.
  • गैस बनाने वाले खानपान से दूरी बनाना जरूरी है.
  • अपने लाइफस्टाइल में अच्छी आदतें अपनाएं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.