Extreme Heat Effects: क्या आपने कभी सोचा है कि आपका शरीर कितना गर्मी झेल सकता है? उत्तर भारत में हर दिन पारा तेजी से चढ़ता जा रहा है. मौसम विभाग का कहना है कि जल्द ही पारा 45 डिग्री के पार पहुंच जाएगा. 45 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाएगी यह तो साफ है, लेकिन क्या आप जानते हैं 45 डिग्री सेल्सियस तापमान (45 Degree Celcius Temprature) का शरीर पर क्या असर होता है? यह गर्मी इंसानों के पेट, दिमाग और त्वचा को झुलसा सकती है. आइए जानते हैं 45 डिग्री गर्मी शरीर को किस-किस तरह से प्रभावित करती है.

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शरीर पर 45 डिग्री सेल्सियस का क्या असर होता है

शरीर के लिए विनाशकारी

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40 डिग्री या 45 डिग्री सेल्सियस से पार तापमान चला जाए तो यह शरीर के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है. दिमाग, पेट और त्वचा सबके लिए यह स्थिति खराब होती है. इससे भयंकर लू लग सकती है और व्यक्ति जरूरत से ज्यादा बीमार पड़ सकता है.

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गिर सकता है ब्लड प्रेशर

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बहुत ज्यादा गर्माहट से रक्त धमनियां खुलने लगती हैं और फैल जाती हैं. इससे ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) गिर सकता है और दिल को ब्लड पुश करने में ज्यादा जोर लगाना पड़ता है.

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पड़ सकता है दौरा

45 डिग्री सेल्सियस में शरीर एग्जॉस्ट होने लगता है. इससे कमजोरी आने लगती है, चक्कर आता है, जी मितलाने लगता है, सिर में दर्द होता है और नर्वस सिस्टम डिस्फंक्शन हो सकता है जिससे दौरे पड़ने या डिल्यूजन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है.

किडनी फेल हो सकती है

बहुत ज्यादा गर्मी से रीनल सिस्टम पर असर पड़ता है. लू के कारण पेशाब कम आने लगता है और अक्यूट ट्यूबुलर नेक्रोसिस की दिक्कत होने लगती है जिससे किडनी ऑक्सीजनेटेड ब्लड प्राप्त नहीं कर पाती. इससे किडनी फेल होने की संभावना बढ़ जाती है.

त्वचा की दिक्कतें बढ़ जाती हैं

तापमान बढ़ने से त्वचा की दिक्कतें भी बढ़ जाती हैं. सूरज की यूवी किरणों की चपेट में आने से किडनी सामान्य से ज्यादा तेजी से बूढ़ी होने लगती है. इसके अलावा, घमौरियां, स्किन बर्न या एक्ने हो सकता है.

बिगड़ सकता है पाचन

बहुत ज्यादा गर्मी होने पर पाचन खराब हो सकता है. खाना पचाना और शरीर के लिए पोषक तत्वों को सोखना मुश्किल होने लगता है. ऐसे में आयदिन जी मिचलाने लगता है और पेट खराब रहना शुरू हो जाता है.

रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर असर

जरूरत से ज्यादा गर्मी व्यक्ति की रिप्रोडक्टिव हेल्थ और फर्टिलिटी को भी प्रभावित करती है. पुरुषों ही नहीं बल्कि महिलाओं में भी ये दिक्कतें देखी जाती हैं. महिलाओं में हार्मोनल इंबालेंस बढ़ जाता है, पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं और एग क्वालिटी बिगड़ जाती है. ऐसे में जो लोग माता-पिता बनने की कोशिश कर रहे हैं उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं.

प्रेग्नेंट महिलाओं को खतरा

40 डिग्री से ऊपर तापमान चला जाए तो प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए मुसीबत बन सकता है. स्टडी के अनुसार, प्रेग्नेंट महिला ज्यादा गर्मी में रहे तो प्रीटर्म बर्थ की संभावना बढ़ाती है. इसके अलावा, बच्चे की सेहत को भी खतरा रहता है.

दिमाग पर पड़ता है असर

बहुत ज्यादा गर्मी से दिमाग की सेहत प्रभावित होती है. इससे व्यक्ति इरिटेटेड रहने लगता है, तनाव बढ़ जाता है, एंजाइटी हो सकती है और नींद पूरी ना होने जैसी दिक्कतें भी नजर आने लगती हैं.

इन लोगों को खासतौर से रहना चाहिए बचकर

बच्चों, बूढ़ों और दिल की दिक्कतों या ब्लड प्रेशर की दिक्कतों से दोचार हो रहे लोगों को खासतौर से गर्मी से बचकर रहने की जरूरत होती है.

खुद को ऐसे रखें सुरक्षित

  • बढ़ते तापमान से बचे रहने के लिए कोशिश करें कि आप सुबह 10 से दोपहर 4 बजे के बीच बाहर ना निकलें. इस समय गर्मी अपने चरम पर होती है.
  • खुद को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी है. ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें. इसके अलावा, ORS की बोतल अपने साथ रखें जिससे शरीर रिहाइड्रेट होता रहे. हर 2 घंटें में पानी या कुछ ना कुछ तरल पीते रहें.
  • जब भी आप बाहर निकलें सनस्क्रीन लगाना ना भूलें. सनस्क्रीन सूरज की हानिकारक किरणों से आपको बचाए रखेगी.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.