Bone Cancer Symptoms: आजकल लाइफस्टाइल इतनी खराब हो गई है कि लोगों को हर रोज नई बीमारियां सामने आती हैं. इसमें से एक हड्डियों का कैंसर है. इसको लेकर ऑन्कोलॉजिस्ट का कहना है कि उनके पास कई ऐसे मरीज आते हैं जो बताते हैं कि उन्हें कई महीनों से हड्डियों में दर्द था, लेकिन उन्होंने इसे सामान्य कमजोरी, बढ़ती उम्र, विटामिन डी की कमी या पुरानी चोट का असर समझकर नजरअंदाज कर दिया. इसको लेकर एक्सपर्ट डॉक्टर मीनू वालिया (चेयरमैन, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल) का कहना है कि कुछ मामलों में यही देरी बीमारी के इलाज को मुश्किल बना सकती है. हालांकि बोन कैंसर अपेक्षाकृत दुर्लभ है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है. यह लक्षण क्या हैं आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.
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पहला संकेत क्या है?
सबसे पहला संकेत है लगातार रहने वाला हड्डियों का दर्द. यह दर्द शुरुआत में हल्का हो सकता है, लेकिन समय के साथ बढ़ता जाता है. कई मरीज बताते हैं कि दर्द रात में अधिक होता है या आराम करने के बावजूद कम नहीं होता. अगर दर्द तीन से चार हफ्ते से ज्यादा बना रहे तो इसकी जांच करानी चाहिए.
गांठ कब महसूस होती है?
हड्डी या जोड़ के आसपास सूजन या गांठ महसूस होना. कई बार यह गांठ दर्द देने का काम करती है और कई बार दर्द नहीं देती. इसलिए लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं, लेकिन अगर गांठ का आकार बढ़ रहा है तो आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
बार-बार फ्रैक्चर होना
बोन कैंसर हड्डी को इतना कमजोर कर देता है कि मामूली चोट या बिना किसी कारण के भी फ्रैक्चर हो सकता है.इसे पैथोलॉजिकल फ्रैक्चर कहा जाता है और यह एक चेतावनी हो सकती है.
ग्रोइंग पेन कहकर ना करें लापरवाही
इसके अलावा, बिना कारण वजन कम होना, लगातार थकान, कमजोरी या बार-बार बुखार जैसे लक्षण भी कुछ मरीजों में दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, यह दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं, लेकिन अगर ये हड्डियों के दर्द के साथ हों तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
बच्चों को हो सकता है खतरा
बच्चों और किशोरों में भी बोन कैंसर हो सकता है. अक्सर पैरों के दर्द को ग्रोइंग पेन कहकर कहकर टाल दिया जाता है, लेकिन अगर दर्द लगातार हो रहा है या बच्चा लंगड़ाकर चलने लगे तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज ना करें.
टेस्ट क्या करवाएं?
आप एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन, पीईटी-सीटी और बायोप्सी जैसे टेस्ट मौजूद है, जिसे आप पता लगाने के लिए करवा सकते हैं. समय पर पहचान होने पर सर्जरी, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और बाकी टेस्ट कर सकते हैं.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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