छाती में दर्द ही नहीं बल्कि ये 6 दिक्कतें भी हो सकती हैं फेफड़ों के कैंसर का लक्षण, WHO ने बताया कैसे करें Lung Cancer की पहचान

Fefdo Ke Cancer Ke Lakshan: विश्व स्वास्थ्य संगठन से जानिए फेफड़ों का कैंसर होने पर शरीर किस-किस तरह से संकेत देने लगता है. अगर इन संकेतों को पहले ही पहचान लिया जाए तो फेफड़े के कैंसर की जल्द जांच और इलाज हो सकता है.

Lung Cancer Symptoms

स्टेज 1 फेफड़ों के कैंसर के क्या लक्षण हैं? Image Credits - AI

मुख्य बातें –

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  • फेफड़ों का कैंसर जानलेवा साबित हो सकता है इसलिए समय पर इलाज जरूरी है.
  • इस कैंसर के लक्षण शुरुआत में समझने मुश्किल होते हैं.
  • फेफड़ों से जुड़ी दिक्कत 2-3 हफ्तों से ज्यादा बनी रहे तो तुरंत जांच करानी चाहिए.

Lung Cancer Symptoms: फेफड़ों का कैंसर सबसे गंभीर कैंसर में से एक है जिससे हर साल लाखों लोगों की जान चली जाती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साल 2022 में दुनियाभर में कैंसर के कारण होने वाली मौतों में फेफड़ों का कैंसर सबसे ऊपर था. ऐसे में इस खतरनाक कैंसर को समय रहते पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है. फेफड़ों का कैंसर होने पर इसके चेतावनी संकेत और शुरुआती लक्षण बेहद हल्के हो सकते हैं. लेकिन, ये लक्षण जैसे ही दिखने लगें और 2 से 3 हफ्तों तक भी ठीक ना हों तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी है. यहां जानिए WHO के अनुसार फेफड़ों के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं.

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फेफड़ों के कैंसर के लक्षण कैसे दिखते हैं

छाती में लगातार दर्द रहना फेफड़ों के कैंसर का एक बड़ा लक्षण होता है. लेकिन, इसके अलावा ये 6 दिक्कतें भी फेफड़ों के कैंसर के चलते हो सकती हैं –

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  • खांसी जो जल्दी जाती नहीं है
  • अक्सर ही सांस फूल जाती है और गहरी सांस लेने में दिक्कत होती
  • शरीर में हर समय थकान रहती है
  • बिना कोशिश किए ही वजन कम होना शुरू हो जाता है
  • खांसते समय मुंह से खून निकलता है
  • बार-बार फेफड़ों के इंफेक्शन होते हैं

ये लक्षण (Fefdo Ke Cancer Ke Lakshan) नजर आने लगें तो इन्हें हल्के में ना लें और आम दिक्कतें समझकर इग्नोर ना करें बल्कि डॉक्टर से जल्द से जल्द परामर्श लें.

किन लोगों को करवानी चाहिए स्क्रीनिंग

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अगर रेगुलर स्क्रीनिंग और फुल बॉडी हेल्थ चेकअप करवाया जाए तो फेफड़ों के कैंसर का जल्द से जल्द पता लगया जा सकता है. खासकर जो लोग धूम्रपान ज्यादा करते हैं उन्हें समय-समय पर कैंसर की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए और फॉलो अप लेना चाहिए.

फेफड़ों के कैंसर की जांच कैसे होती है

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फेफड़ों के कैंसर की जांच के लिए (Lung Cancer Test) फिजिकल इग्जामिनेशन, इमेजिंग टेस्ट जैसे एक्स रे और कम्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन, फेफड़ों की अंदरूनी जांच के लिए ब्रोंकोस्कॉपी की जाती है. इसके अलावा, फेफड़ों के टिशूज लेकर टेस्ट और मोलेक्यूल टेस्टिंग से जांच करवाई जा सकती है.

किन लोगों को फेफड़ों के कैंसर का ज्यादा खतरा रहता है

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सिगरेट, सिगार, बीढ़ी या पाइप पीने वालों में फेफड़ों के कैंसर का रिस्क ज्यादा रहता है. इसके अलावा, सैकंडहैंड स्मोक वालों में, बाहर लगातार प्रदूषण के संपर्क में आने पर, सिलिका, एबेस्टोस और डीजल एग्जॉस्ट के बीच काम करने पर, रेडोन एक्सपोजर, कुछ फेफड़ों की बीमारियां और जेनेटिक भी फेफड़ों के कैंसर की वजह बन सकते हैं.

फेफड़ों के कैंसर का ट्रीटमेंट कैसे होता है

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फेफड़ों के कैंसर के ट्रीटमेंट के लिए कैंसर की स्टेज, टाइप, मोलेक्यूल प्रोफाइल और मरीज की सेहत का ब्योरा लिया जाता है और फिर कैंसर का इलाज चुना जाता है. कैंसर के इलाज में ये ऑप्शंस होते हैं –

  • सर्जरी
  • रेडियोथैरेपी या रेडिएशन
  • कीमोथैरेपी
  • टार्गेटेड थैरेपी
  • इम्यूनोथेरेपी

कैंसर की शुरुआती स्टेज के इलाज में ट्यूमर को हटाया जाता है. कैंसर वाले ट्यूमर को बढ़ने से रोकने के लिए न्यूएडजावेंट थेरैपी की जा सकती है. अगर सर्जरी नहीं हो सकती है तो रेडिएशन थेरैपी को प्राइमेरी ट्रीटमेंट की तरह चुना जा सकता है. टार्गेट थेरैपी और इम्यूनोथेरैपी भी की जा सकती है. इसके बाद मरीज का फॉलो आप होता रहता है और ऑब्जर्वेशन में ट्रीटमेंट चलता है. कैंसर की स्टेज अगर एडवांस हो जाए तो इलाज के तरीके बदल सकते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - WHO

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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