Bachedani Ka Cancer: गर्भाशय या आम भाषा में कहें तो बच्चेदानी में होने वाले कैंसर को यूट्रस कैंसर या यूट्राइन कैंसर (Uterine Cancer) कहा जाता है. इस कैंसर में गर्भाशय में ट्यूमर होता है. इसमें कैंसर के एब्नॉर्मल सेल्स गर्भाशय के अंदर या उसकी अंदरूनी परत पर पनपते हैं और तेजी से बढ़ने लगते हैं. महिलाओं को हाने वाले इस कैंसर के लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए तो इलाज हो सकता है. इस कैंसर का इलाज ट्यूमर हुए हिस्से और कैंसर की स्टेज पर निर्भर करता है. ऐसे में यहां जानिए किस तरह गर्भाशय के कैंसर के शुरुआती लक्षणों (Uterus Cancer Symptoms) को पहचाना जा सकता है. इन लक्षणों को आम दिक्कतें समझकर इग्नोर करने की गलती नहीं करनी चाहिए.
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गर्भाशय के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं | Uterus Cancer Symptoms | Bachedani Ke Cancer Ke Lakshan
- बच्चेदानी में कैंसर होने पर हैवी ब्लीडिंग (Heavy Bleeding) होने लगती है. पीरियड्स खत्म होने के बाद या 2 पीरियड्स के समय के बीच में ही ब्लीडिंग हो सकती है.
- कई बार एक पीरियड साइकल खत्म होती है दूसरा पीरियड शुरू हो जाता है.
- गर्भाशय का कैंसर होने पर वाइट डिस्चार्ज पानी जैसा हो सकता है या फिर इसमें से बदबू आ सकती है.
- बिना किसी वजह के ही वजन कम होने लगता है. बिना किसी कोशिश के ही वजन कम होना कैंसर का लक्षण हो सकता है.
- पेट में दर्द रहने लगता है. यह दर्द कभी कम तो कभी बहुत ज्यादा हो सकता है.
- पेशाब और मल में बदलाव नजर आ सकता है. पेशाब बहुत कम या ज्यादा आ सकता है या पेशाब का रंग बदला हुआ दिखता है.
गर्भाशय का कैंसर होने के क्या कारण होते हैं
मेनोपोज के बाद गर्भाशय के कैंसर (Uterus Cancer) का खतरा बढ़ जाता है. जिन महिलाओं ने बच्चे को जन्म नहीं दिया है वे इस कैंसर की चपेट में आ सकती हैं. जिन महिलाओं के परिवार में किसी को ओवेरियन, यूट्राइन या बाउल कैंसर हुआ हो उन्हें कैंसर होने की संभावना रहती है. हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज भी बच्चेदानी के कैंसर की वजह बन सकते हैं. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, कभी रेडिएशन थेरैपी ली हो अगर किसी और तरह का कैंसर हुआ हो तो बच्चेदानी का कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है.
बच्चेदानी के कैंसर का कैसे पता चलता है
फिजकल जांच से, पेल्विक अल्ट्रासाउंड से, पेट के अल्ट्रासाउंड या ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड से बच्चेदानी के कैंसर का पता लगया जा सकता है. इस कैंसर का पता लगाने के लिए एंडोमेट्रियल बायोप्सी, हीस्टेरोस्कोपी बायोप्सी, ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट करवाए जा सकते हैं.
अगर बच्चेदानी का कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों तक भी फैल गया है तो ऐसे में एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन और पीईटी स्कैन करवाया जाता है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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