दिल्ली-NCR में बारिश का सिलसिला जारी है, रोज हल्की से भारी बारिश होती रहती है, जिससे गर्मी से राहत तो मिलती ही है, लेकिन पानी भरने के कारण थोड़ी दिक्कत का भी सामना करना पड़ता है. लेकिन इसी बीच एक स्वास्थ्य समस्या मानसून की आड़ में फैल रही है, जिससे ज्यादातर लोग आम वायरल फीवर समझकर नजरअंदाज कर देते है, लेकिन हकीकत में ये स्वाइन फ्लू होता है. आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या को हल्के में लेने से मरीज की मौत तक हो सकती है, इसलिए जरूरी है कि इस स्टोरी समझें कि स्वाइन फ्लू और आम वायरल फीवर में क्या अंतर होता है? साथ ही, दोनों के लक्षण एक दूसरे से कैसे अलग होते हैं.

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2015 में दिल्ली-NCR को इस फ्लू ने किया था परेशान

कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और दिल्ली-NCR में स्वाइन फ्लू का पहला बड़ा हमला 2009 (वैश्विक महामारी के दौरान) में हुआ था, लेकिन साल 2015 में इस बीमारी का गंभीर प्रकोप देखा गया था. इस दौरान देशभर में 33,000 से ज्यादा लोग इस फ्लू से संक्रमित हुए और लगभग 2,900 से 3,000 लोगों की जान चली गई थी. राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और मध्य प्रदेश इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल थे. इन आंकड़ों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये स्वास्थ्य समस्या कितनी ज्यादा गंभीर है और न काबिल-ए-नजरअंदाज है.

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H1N1 अचानक मानसून में क्यों बढ़ जाता है

H1N1 यानी स्वाइन फ्लू का खतरा अक्सर मानसून के दौरान ज्यादा देखा जाता है, जिसको लेकर सवाल उठता है कि आखिर इस मौसम में ऐसा क्या है? बता दें कि बारिश के मौसम में तापमान और नमी में बदलाव, बंद कमरों में ज्यादा समय बिताना और लोगों के बीच नजदीकी संपर्क इस फ्लू वायरस को फैलने की संभावना बढ़ा सकता है. आपको शायद जानकारी न हो, लेकिन ये खांसी या छींक के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों और दूषित सतहों के संपर्क से भी संक्रमण फैल सकता है.

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कैसे दिखते हैं H1N1 के लक्षण कैसे दिखते हैं?

इस बात का ध्यान दें कि सिर्फ लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि वायरल फीवर H1N1 ही है, क्योंकि सामान्य फ्लू और कई दूसरे वायरल संक्रमण में भी लगभग ऐसे ही लक्षण दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण इस प्रकार है;

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  • तेज बुखार और ठंड लगना
  • लगातार खांसी और गले में खराश
  • नाक बंद होना या पानी बहना
  • सिरदर्द और शरीर में दर्द
  • बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी
  • बच्चों में कभी-कभी उल्टी या दस्त जैसी परेशानी

इसके अलावा अगर आपको सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी आदि के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच कराएं, क्योंकि कई बार इसके लक्षण खतरनाक रूप भी ले सकते हैं.

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कैसे H1N1 से करें अपना बचाव

H1N1 समेत अन्य फ्लू संक्रमण से बचाव के लिए कुछ सही आदतों को अपनाना जरूरी हो जाता है, जिसमें हाथों को साबुन या सैनिटाइजर से साफ रखना, खांसते वक्त मुंह और नाक को ढकना, बीमार व्यक्ति के ज्यादा नजदीक न  रहना और मास्क पहने रखना. इसके साथ ही, साफ-हल्दी भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना और पूरी नींद लेना आदि शामिल है. ये भी जान लीजिए कि इस गंभीर फ्लू का खतरा 5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों खासतौर से डायबिटीज, दिल की बीमारी से परेशान लोग, अस्थमा, COPD या किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों के बीच ज्यादा रहता है. अगर आपको कोई लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाए.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.