सिरहाने फोन चार्ज लगाकर सोने की आदत? सिर्फ फटने का खतरा नहीं, नींद पर भी डालता है बुरा असर
फोन का हर कोई इस्तेमाल करता है, लेकिन कई बार इस्तेमाल इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि लोग देर रात तक फोन चलाते हैं और सिरहाने रखकर ही सो जाते हैं. आइए NHBI से जानें ये आदत जान और सेहत के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है आइए जानते हैं इस स्टोरी में.
रात में देर तक फोन देखना और सिरहाने चार्ज लगाने की आदत कितनी खतरनाक है? (Image: AI/PEXELS)
खबर की मुख्य बातें:
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नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, सोते समय फोन का अत्यधिक उपयोग नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है.
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को कम करती है, जिससे नींद आने में देरी होती है.
बच्चों में सोने से पहले स्क्रीन का उपयोग ‘स्लीप लेटेंसी’ को बढ़ाता है और नींद की गुणवत्ता को खराब करता है.
नींद की कमी से हार्मोनल असंतुलन, इंसुलिन प्रतिक्रिया पर असर, और हृदय रोग, उच्च रक्तचाप व मोटापे का खतरा बढ़ सकता है.
मोबाइल फोन अब लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, जिसके बिना कई काम अधूरे रह जाते हैं. शॉपिंग करने से लेकर किसी से बात करने तक, आपात स्थिति में मदद बुलाने से लेकर जरूरी जानकारी दूसरों को भेजने तक हर काम अब मोबाइल फोन की मदद से पूरा हो पाता है. आप गौर करेंगे कि अगर किसी व्यक्ति के पास से 10 मिनट के लिए भी फोन गायब हो जाता है, तो वह परेशान हो जाता है और हर तरफ अपना फोन ढूंढता रहता है. इतना ही नहीं, फोन का इस्तेमाल सुबह आंख खुलने से लेकर आधी रात तक कई लोग करते हैं. इस स्टोरी में हम इसी लत के बारे में बात करेंगे, जो लोगों की नींद को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है और साथ ही, ये भी बताएंगे कि आप कैसे इस आदत से बच सकते हैं और अपनी कीमती नींद को बचा सकते हैं, ताकि उनकी सेहत बनी रहे.
National Sleep Foundation के अनुसार, फोन का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार, किया जाए तो वह अच्छा है, लेकिन हर वक्त फोन चलाना, खासतौर से सोते वक्त, तो यह नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है. एक अच्छी और बीमारियों से दूरी वाले जीवन के लिए नियमित रूप से नींद पूरी लेना जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी शरीर को कमजोर बना देती है और व्यक्ति कई समस्याओं का शिकार हो सकता है. कई लोगों की आदत रहती है कि वह देर रात तक फोन चलाते हैं और जब उनका बन उस वक्त के लिए भर जाता है, या फिर चार्ज खत्म हो जाता है फोन का, तो अपनी सिरहाने ही फोन को चार्ज लगाकर, सो जाते हैं ताकि को नोटिफिकेशन आए, तो तुरंत देख सकें. लेकिन ये आदत न सिर्फ नींद बल्कि जान के लिए भी खतरनाक हो सकती है.
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क्यों सिरहाने फोन रखना खतरनाक हो सकता है
सिरहाने फोन रखना एक आम आदत है, लेकिन ये आदत खतरनाक भी हो सकती है. सामान्य जानकारी के अनुसार, रात में फोन का भारी इस्तेमाल करने के बाद उसे चार्ज लगाकर उसी के पास सोने (सिरहाने रखकर सोना) से फोन के फटने का खतरा बना रहता है. अगर फोन चार्जिंग के दौरान ज्यादा गर्म हो जाए, तो हो सकता है कि वह फट जाए, ऐसे में आपका सिर उसके काफी पास होगा, जिस कारण गंभीर चोट या फिर मौत तक हो सकती है. इसलिए एक्सपर्ट्स अक्सर कहते हैं कि फोन को चार्ज लगाकर देखना या फिर उसके पास सोना नहीं चाहिए.
फोन कैसे खराब करता है आपकी कीमती नींद?
NHBI के अनुसार, स्वस्थ एडल्ट में बायोलॉजिकल क्लॉक 24 घंटे के सोने-जागने के चक्र (स्लीप-वेक साइकिल) का पालन करती है. जब सुबह सूरज उगता है, तो आपका शरीर कोर्टिसोल नाम का हार्मोन बनाता है, जिससे आप जागते हैं और सतर्क महसूस करते हैं. जैसे-जैसे दिन की रोशनी कम होती है, शरीर मेलाटोनिन नाम का एक और हार्मोन छोड़ता है, जिससे नींद आने का एहसास होता है. ऐसे में सेल फोन, टैबलेट, रीडर और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक बैक-लिट डिवाइस कम वेवलेंथ वाली रोशनी छोड़ते हैं, जिसे ब्लू लाइट (Blue Light) भी कहा जाता है. शाम के समय जहां मेलाटोनिन हार्मोन बनना चाहिए ताकि नींद आए, वहां ब्लू लाइट के कारण वो प्रक्रिया कम या देर से होने लगती है, जिस कारण नींद का एहसास कम होता है और व्यक्ति जागता रहता है, भले आधी रात क्यों न हो जाए.
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बच्चों की सेहत पर पड़ता है बुरा असर
आज कल माता-पिता की आदत बन गई है कि वह बच्चे को देर तक फोन का इस्तेमाल करने देते हैं, लेकिन इसकी जानकारी होना भी जरूरी है कि आपकी यह गलती उनकी नींद पर क्या असर डाल सकती है. स्टडीज से पता चला है कि सोने से पहले स्क्रीन वाले डिवाइस इस्तेमाल करने और ‘स्लीप लेटेंसी’ (यानी सो जाने में लगने वाला समय) बढ़ने के बीच संबंध है. इसके अलावा, जो बच्चे रात में इन डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अक्सर अच्छी क्वालिटी की पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती और अगले दिन उनके थका हुआ महसूस करने की संभावना ज्यादा होती है. इतना ही नहीं, नींद की कमी से जूझ रहे बच्चों और किशोरों को दूसरों के साथ घुलने-मिलने में समस्या हो सकती है. वे जल्दी गुस्सा हो सकते हैं, उनके मूड में उतार-चढ़ाव आ सकता है, वे उदास या निराश महसूस कर सकते हैं या उनमें प्रेरणा की कमी हो सकती है और साथ ही ध्यान लगाने में भी मुश्किल हो सकती है.
नींद की कमी सेहत पर कैसा असर डालती है?
जागते समय आप कैसा महसूस करते हैं, यह कुछ हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि सोते समय आपके साथ क्या होता है. सोते समय, आपका शरीर दिमाग के सही कामकाज और आपकी शारीरिक सेहत को बनाए रखने के लिए काम करता है. ऐसे में नींद की कमी से होने दिनभर बार-बार नींद आना, सुस्ती, कार चलाते वक्त दुर्घटना. उदाहरण के लिए, लगातार नींद की कमी से कुछ पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. यह आपके सोचने, प्रतिक्रिया देने, काम करने, सीखने और दूसरों के साथ घुलने-मिलने के तरीके पर भी असर डाल सकता है.
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क्यों जरूरी है अच्छी नींद?
NHBI के अनुसार, पूरी नींद उन हार्मोन के स्वस्थ संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है जो आपको भूख (घ्रेलिन) या पेट भरा (लेप्टिन) होने का एहसास कराते हैं: जब आपको पर्याप्त नींद नहीं मिलती है, तो आपके शरीर में घ्रेलिन का स्तर बढ़ जाता है और लेप्टिन का स्तर कम हो जाता है.
यह आपके शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है, बता दें कि इंसुलिन वह हार्मोन है जो आपके खून में ग्लूकोज (चीनी) के स्तर को कंट्रोल करता है.
नींद शरीर की विकास में मदद करता है.
अच्छी और पूरी नींद लेने से दिल से जुड़ी बीमारियों, ब्लड प्रेशर, मोटापे और स्ट्रोक का खतरा कम होता है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.