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कान पर भी नजर आ सकते हैं स्किन कैंसर के लक्षण, ज्यादातर लोग कर देते हैं इग्नोर

Skin cancer behind ear symptoms: कान के अंदर होने वाले कैंसर और कान पर स्किन कैंसर के क्या लक्षण होते हैं और इन्हें किस तरह पहचाना जा सकता है, जानिए यहां.

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कान के कैंसर में कैसे दिखते हैं लक्षण, जानिए यहां.

Skin Cancer Behind Ear: स्किन कैंसर में लोग शरीर के बाकी हिस्सों पर तो ध्यान देते हैं लेकिन कानों को भूल जाते हैं. कानों के अंदर होने वाले कैंसर से अलग यह कैंसर कानों की बाहरी त्वचा या अंदरूनी त्वचा पर पनप सकता है लेकिन कान के एकदम अंदर के स्ट्रक्चर से शुरू नहीं होता है. इस कैंसर को स्किन कैंसर के साथ ही कान का कैंसर भी कह दिया जाता है. वहीं, कान के अंदरूनी हिस्सों में होने वाला कैंसर सही मायनों में कान का कैंसर होता है. ऐसे में यहां जानिए स्किन कैंसर के कान के ऊपर होने और कान के अंदर होने वाले असल इयर कैंसर के क्या लक्षण (Ear Cancer Symptoms) होते हैं और इन लक्षणों को किस तरह पहचाना जा सकता है.

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कान का कैंसर क्या है

कान का कैंसर एक खतरनाक कैंसर है जो कान के किसी भी हिस्से पर हो सकता है. इस कैंसर में सेल्स कान के अंदर या बाहर बढ़ने लगती हैं और कान के हेल्दी हिस्सों को नुकसान पहुंचाती हैं. कान का कैंसर बढ़ने पर यह कैंसर कान की हड्डियों और फेशियल नर्व्स को डैमेज करने लगता है.

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कान के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं

कान पर स्किन कैंसर होने पर या कान में कैंसर होने पर कान के बाहरी हिस्से में लंप या दाना निकल सकता है, अचानक बैलेंस बनाने में दिक्कत आ सकती है, सुनने की क्षमता जा सकती है, कान से खून निकल सकता है, कान की त्वचा का रंग बदलने लगता है. कान में या कान के आस-पास दर्द रहने लगता है, कान से रिंगिंग आवाज आ सकती है और चेहरे पर कमजोरी नजर आने लगती है.

कान का कैंसर कितनी तरह का होता है

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मुख्यरूप से कान का कैंसर 3 तरह का होता है, बेजल सेल कार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और मेलानोमा.

बेजल सेल कार्सिनोमा – इसमें स्किन कैंसर कान की बेजल सेल लेयर में पनपता है और यहां से शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकता है.

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स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा – यह कान के कैंसर का दूसरा प्रकार है जिसमें स्किन कैंसर कान की स्क्वैमस सेल लेयर यानी कान की सतह पर पनपने लगता है. यह कान से लिम्फ नॉड्स में फैल जाता है.

मेलेनोमा – यह कैंसर कान की उन सेल्स में होता है जो कान की त्वचा को उसकी रंगत देती हैं. यह कैंसर तेजी से फैलता है और इसमें कान की स्किन का रंग बदलने लगता है और कान के तिल की शेप बदल सकती है.

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कान के अंदर यानी मिडल इयर, इनर इयर और टेम्पोरल बोन में कैंसर हो सकता है, लेकिन ये दुर्लभ किस्म के कैंसर हैं.

कौन से लोग इस कैंसर की चपेट में आ सकते हैं

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कान के कैंसर के रिस्क फैक्टर्स में रेडिएशन की चपेट में आना, परिवार में स्किन कैंसर किसी को रहा हो अगर, बार-बार कान के इंफेक्शंस होना और सूरज की धूप की चपेट में आना शामिल है. इन स्थितियों में लोगों को कान का कैंसर हो सकता है.

कान की जांच कब कराएं

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  • अगर कान की त्वचा पर किसी तरह का एब्नॉर्मल निशान दिखने लगे तो कान की जांच करवानी चाहिए
  • एब्नॉर्मल दाने या तिल दिखने लगे
  • कान की त्वचा की रंगत बिगड़ने लगे
  • अगर आप धूप में ज्यादा रहते हों तो स्क्रीनिंग करवाएं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.  

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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