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Sharad Pawar Health: सीने में सुई चुभने जैसा दर्द क्यों होता है? शरद पवार की बीमारी से समझें प्लूरिटिक पेन के कारण और लक्षण

मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में NCP (SP) प्रमुख शरद पवार को प्लूरिटिक पेन की वजह भर्ती किया गया है. हालांकि,  शरद पवार अब डिस्चार्ज हो गए हैं, लेकिन क्या आपको इसके शुरुआती लक्षण के बारे में पता है.  

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प्लूरिटिक पेन के कारण और लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. Image Credit- AI

महाराष्ट्र के नेता और NCP (SP) प्रमुख शरद पवार की सेहत को लेकर हाल ही में खबरें सामने आईं. 2 दिन पहले उन्हें सीने में चुभन की शिकायत हुई और उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस दौरान डॉक्टरों ने चेकअप किया और उनके दर्द को प्लूरिटिक पेन (Pleuritic Pain) बताया. अस्पताल में टेस्ट वगैरह किए गए और निगरानी के बाद 4 नवंबर को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया. इसके बाद से ही प्लूरिटिक पेन को लेकर चर्चा होने लगी और लोगों के मन में कई तरह के सवाल आने लगे कि प्लूरिटिक पेन आखिर होता क्या है. इस दौरान सीने में सुई चुभने जैसा दर्द क्यों होता है? क्या यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है? अगर आपको इन सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं तो नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन की रिसर्च से जानते हैं कि आखिर इसके शुरुआती लक्षण क्या होते हैं और कैसे इनसे बचा जा सकता है.

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क्या होता है प्लूरिटिक पेन?

प्लूरिटिक पेन सीने में होने वाला एक खास तरह का दर्द है, जो आमतौर पर सांस लेने, खांसने या छींकने के दौरान बढ़ जाता है. इसमें इंसान को ऐसा महसूस हो सकता है जैसे सीने के अंदर कोई सुई चुभ रही हो. हमारे फेफड़ों के आसपास एक पतली झिल्ली होती है, जिसे प्लूरा (Pleura) कहा जाता है. इसकी दो लेयर होती हैं, जिनके बीच थोड़ी मात्रा में पानी मौजूद होता है, जो सांस लेते समय दोनों को आपस में चिपकने से बचाता है. वहीं, जब इस झिल्ली में सूजन या जलन होती है तो सांस लेने के दौरान दोनों लेयर आपस में मिलने लगती है. इसी वजह से सीने में तेज और चुभने वाला दर्द महसूस होता है. हालांकि, प्लूरिटिक पेन खुद कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में किसी दूसरी समस्या का संकेत हो सकता है. 

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प्लूरिटिक पेन होने के क्या कारण हैं?

सीने में सुई चुभने जैसा दर्द कई वजहों से हो सकता है. इसके कुछ नॉर्मल और कुछ गंभीर कारण भी हो सकते हैं. 

  • प्लूरिसी- प्लूरिसी में फेफड़ों को ढकने वाली झिल्ली में सूजन आ जाती है. इसकी वजह से सांस लेते समय सीने में तेज दर्द हो सकता है और कई बार यह दर्द कंधे और पीठ तक भी पहुंच जाता है.
  • निमोनिया- निमोनिया फेफड़ों में होने वाला इंफेक्शन है, जिसमें फेफड़ों में सूजन आ सकती है. कुछ मरीजों में इंफेक्शन के कारण प्लूरा भी इफेक्ट होता है, जिससे सांस लेने या खांसने पर सीने में दर्द महसूस होता है. 
  • फेफड़ों में खून का थक्का- यह प्लूरिटिक पेन का एक गंभीर कारण हो सकता है, जिसमें शरीर के किसी हिस्से में बना खून का थक्का फेफड़ों की नस तक पहुंचकर ब्लड फ्लो को रोक सकता है. इससे अचानक सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी और कभी-कभी खांसी में खून आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
  • न्यूमोथोरैक्स- इस बीमारी में फेफड़े और छाती की दीवार के बीच हवा जमा हो जाती है. इससे फेफड़ा पूरी तरह सिकुड़ सकता है और अचानक सीने में तेज दर्द और सांस लेने में परेशानी हो सकती है. 
  • कॉस्टोकॉन्ड्राइटिस- इसमें पसलियों और छाती की हड्डी को जोड़ने वाले कार्टिलेज में सूजन आ जाती है. इससे सीने में दर्द या चुभन महसूस हो सकती है. कई बार खांसने, गहरी सांस लेने या छाती पर इफेक्ट डालने से दर्द बढ़ जाता है. 

प्लूरिटिक पेन के लक्षण 

  • गहरी सांस लेने पर सीने में सुई चुभने जैसा दर्द होना 
  • खांसने या छींकने पर दर्द बढ़ना 
  • सीने के एक तरफ तेज दर्द महसूस होना
  • दर्द का कंधे या पीठ तक फैलना
  • सांस लेने में परेशानी होना
  • खांसी और बुखार की शिकायत 
  • ठंड लगना 
  • कमजोरी महसूस होना 

किन लोगों को हो सकता है प्लूरिटिक पेन का खतरा?

यह दर्द हर किसी को नहीं होता, क्योंकि यह इंसान की लाइफस्टाइल, हेल्थ और उम्र पर निर्भर करता है. 

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  • फेफड़ों में इंफेक्शन या निमोनिया 
  • इम्युनिटी कमजोर होना
  • खून के थक्के बनने की समस्या
  • टीबी होना 
  • फेफड़ों की बीमारी होना

प्लूरिटिक पेन की पहचान कैसे होती है?

सीने में दर्द होने पर प्लूरिटिक पेन का पता लगाना मुश्किल हो सकता है. इसके लिए डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री जानने के साथ कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं और ये टेस्ट नीचे बताए गए हैं.

  • फिजिकल एग्जामिनेशन 
  • चेस्ट एक्स-रे
  • ब्लड टेस्ट
  • ईसीजी 
  • सीटी स्कैन 

प्लूरिटिक पेन का इलाज कैसे किया जाता है?

प्लूरिटिक पेन का इलाज इंसान की कंडीशन पर निर्भर करता है. अगर यह दिक्कत ऐसे इंसान को हुई है जिसे पहले से इंफेक्शन की बीमारी है तो इलाज दूसरे तरीके से किया जा सकता है. बैक्टीरियल इंफेक्शन को दूर करने के लिए एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ सकती है. अगर दर्द का कारण फेफड़ों में खून का थक्का है तो तुरंत इलाज की जरूरत होती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source- NCBI

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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