अक्सर हम ये समझ नहीं पाते हैं कि हमारी सभी समस्याओं और बीमारियों की एक अहम वजह हमारे दिमाग पर हावी तनाव है. दिमाग पर जब ज्यादा तनाव बढ़ता है या हम किसी सोच के कारण अपने दिमाग पर तरह-तरह का डर लेकर घूमते हैं, जिससे बेचैनी, गंभीर बीमारी, हार्ट की समस्या आदि का खतरा बढ़ जाता है. इस तरह की स्थिति न सिर्फ हमारे शरीर बल्कि जीवन को भी प्रभावित करती है. ऐसे में लोग डॉक्टरों के पास जाते हैं, जहां डॉक्टर भी उन्हें तनाव दूर करने की सलाह देते हैं. लेकिन जब स्थिति बातों से नहीं ठीक होती है, तो लोगों को केमिकल वाली दवाइयों का सहारा लेना पड़ता है. हालांकि, आयुर्वेद में बहुत पहले ही इस समस्या का सीधा और सबसे बेहतर इलाज बता दिया है, जिसे अपनाकर आप अपने मेंटल हेल्थ मजबूत बनाए रखने में मदद करता है.
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दिमागी सेहत बनाए रखने के लिए आयुर्वेद कैसे कर रहा लोगों की मदद?
आयुर्वेद में इस समस्या से जल्दी राहत दिलाने के लिए एक योग बताया है, जिसका नाम प्राणायाम है. इस योग को सही तरीके से करने पर आपके दिमाग को न सिर्फ सुकून मिलेगा बल्कि उसके कार्यक्षमता भी बेहतर होगी, लेकिन जरूरी है कि यह समझना कि आप इसे कैसे कर सकते हैं और कैसे यह आपकी मदद कर सकता है. आपको यह भी बता दें कि प्राणायाम को लेकर वैज्ञानिक मानता है कि यह सिर्फ सांस लेने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि वेगस तंत्रिका (Vagus Nerve) को उत्तेजित कर ‘पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम’ (आराम और पाचन तंत्र) को सक्रिय करने का एक प्रभावी तरीका है. यह तनाव हार्मोन (कॉर्टिसोल) को कम करता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, रक्तचाप को नियंत्रित करता है, और दिमाग में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाकर मानसिक शांति और संज्ञानात्मक क्षमता में सुधार करता. लोगों के इस योग के बारे में बताने और उनके यह सिखाने के लिए योग गुरु बाबा रामदेव और उनका पतंजलि वेलनेस सेंटर लंबे वक्त से लोगों के बीच बहुत एक्टिव होकर काम कर रहे हैं. इन्हें फॉलो करने वाले आज सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशी लोग भी है, जो अपने देश से भारत आते हैं और पतंजलि के इन सेंटरों में जाकर प्राणायाम योग जैसे कई योग सिखते हैं और अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं.
कैसे करें प्राणायाम योग सभी प्रकार को का तरीका समझें
प्राणायाम श्वास-प्रश्वास को नियंत्रित करने की योगिक क्रिया है, जो शरीर और मन को स्वस्थ, शांत और ऊर्जावान बनाने में मदद करती है। प्रमुख प्राणायामों में अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, भस्त्रिका और शीतली शामिल हैं, जिन्हें सुबह खाली पेट, सुखद आसन में बैठकर किया जाना चाहिए
प्राणायाम के मुख्य प्रकार और करने की विधि:
अनुलोम-विलोम (Nadi Shodhan):
विधि: सुखासन में बैठें और दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नाक बंद करें, बाईं ओर से सांस लें. फिर बाईं नाक को अनामिका उंगली से बंद कर दाईं ओर से छोड़ें. यही प्रक्रिया दाईं ओर से दोहराएं.
फायदा: मानसिक तनाव कम करता है, नाड़ियों को शुद्ध करता है, और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है.
कपालभाति (Kapalbhati):
विधि: रीढ़ की हड्डी सीधी करके बैठें फिर गहरी सांस लें और फिर पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ते हुए तेजी से सांस बाहर निकालें. सांस लेते समय कोई जोर न लगाएं, यह प्राकृतिक होना चाहिए.
फायदा: पेट की चर्बी कम करता है, पाचन तंत्र मजबूत करता है, और खून साफ करता है.
भ्रामरी (Bhramari):
विधि: सीधे बैठें, कानों को अंगूठों से बंद करें, आंखें बंद करें, लंबी सांस लें और छोड़ते समय मुंह बंद रखें और गले से मधुमक्खी की तरह भिनभिनाहट (हम्म… की आवाज) निकालें.
फायदा: मन को शांत करता है, गुस्सा, अनिद्रा और तनाव दूर करता है.
भस्त्रिका (Bhastrika):
विधि: पद्मासन में बैठें, तेजी से गहरी सांस लें और तेजी से ही बाहर छोड़ें. यह प्रक्रिया फेफड़ों को फैलाती है.
फायदा: शरीर में ऊर्जा बढ़ाता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है.
शीतली (Sheetali):
विधि: जीभ को पाइप की तरह मोड़कर (ट्यूब आकार में) बाहर निकालें, इससे गहरी सांस अंदर लें, जीभ को अंदर करके मुंह बंद करें और नाक से सांस छोड़ें. यह प्रक्रिया 5-10 बार दोहराएं.
फायदा: शरीर को ठंडक पहुंचाता है, पेट की जलन और हाई ब्लड प्रेशर में राहत देता है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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