Pcos Mein Kya Dikkat Hoti Hai: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) को अब दुनिया भर के कई मेडिकल एक्सपर्ट्स पॉली एंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) भी कहने लगे हैं, ताकि यह साफ हो सके कि यह सिर्फ हार्मोन से जुड़ी हुई नहीं, बल्कि मेटाबॉलिज्म से भी जुड़ी बीमारी है. आमतौर पर पीसीओसी की चर्चा सिर्फ इसके दिखने वाले लक्षणों, जैसे मुंहासे या वजन बढ़ने-घटने से की जाती है. लेकिन मेडिकल रिसर्च बताती है कि यह जिंदगीभर रहने वाली मेटाबॉलिक समस्या है. आंकड़ों के अनुसार, 15 से 49 साल की महिलाओं में लगभग 10% से 13% महिलाएं इस बीमारी से पीड़ित हैं, लेकिन इसमें से 70% मामलों की पहचान हो ही नहीं पाती. इसको लेकर डॉक्टर दिनेश कंसल (ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल) का कहना है कि महिलाओं को इस बीमारी की पहचान वक्त पर कर लेनी चाहिए.
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मेटाबॉलिज्म पर क्या होता है असर?
PCOS की सबसे बड़ी वजह इंसुलिन रेजिस्टेंस होती है. इसका मतलब है कि बॉडी के सेल्स इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. इसी वजह से शरीर को ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है. लंबे समय तक रहने वाला यह असंतुलन कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है. क्लीनिकल आंकड़ों के अनुसार, PCOS से पीड़ित 50% से अधिक महिलाओं को 40 साल की उम्र तक टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा रहता है.
फर्टिलिटी पर क्या होता है असर?
PCOS दुनिया भर में ओव्यूलेटरी इन्फर्टिलिटी का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. इस दौरान हार्मोनल असंतुलन होते हैं, जिसकी वजह से ओवरी में मौजूद फॉलिकल्स पूरी तरह पैदा नहीं हो पाते और अंडा रिलीज नहीं हो पाता. आंकड़ों के अनुसार, PCOS से पीड़ित 70% से 80% महिलाओं को प्रेग्नेंसी में दिक्कत होने लगती है. हालांकि, सही इलाज और ओव्यूलेशन बढ़ाने वाली दवाओं से ऐसा करना अब काफी आसान हो गया है.
कैसे करें PCOS में ख्याल रखें?
PCOS का असर सिर्फ फर्टिलिटी तक नहीं रहता, बल्कि यह लंबे समय तक मेटाबॉलिज्म और दिल की हेल्थ को भी इफेक्ट करता है. इसलिए इसका इलाज और देखभाल लाइफटाइम करना जरूरी है.
नियमित योग से मिल सकता है आराम
रोजाना एक्सरसाइज करना और लो-ग्लाइसेमिक डाइट अपनाना इंसुलिन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है. इससे बॉडी सही तरह से काम करती है और महिलाओं का मेटाबॉलिज्म कंट्रोल में रहता है. इसलिए आप डॉक्टर की सलाह पर अपने रूटीन में योग को शामिल करें.
टेस्ट से पता करें
आपको हर दूसरे या तीसरे महीने अपना टेस्ट कराते रहना है. हर साल HbA1c करा सकते हैं. वहीं, आप लिपिड प्रोफाइल और ब्लड प्रेशर का टेस्ट कराते रहें, ताकि किसी भी मेटाबॉलिक समस्या का समय रहते इलाज किया जा सके. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर इंसुलिन को बेहतर तरीके से काम करने वाली दवाएं दे सकते हैं.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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