कहीं आप भी तो नहीं खरीदते नकली ORS? यहां जानिए क्या है फेक और असली ORS पहचानने का तरीका

Fake ORS: लाइफ सेविंग सोल्यूशन कहे जाने वाला ORS अगर असली ना हो तो इससे मरीज की हालत सुधरने के बजाय जान भी जा सकती है. ऐसे में यहां जानिए कैसे करते हैं असली और नकली ORS की पहचान.

Fake ORS

असली ORS कौन-कौन से हैं जानिए यहां. Image Credit- AI

Fake ORS News: बाजार में ORS आसानी से मिल जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं ऐसे कई ब्रांड्स हैं जो अपने प्रोडक्ट्स पर ORS तो लिख देते हैं लेकिन वह असल में इसे प्रोडक्ट के नाम के तौर पर इस्तेमाल करते हैं और इन पाउडर या ड्रिंक्स में ORS होता ही नहीं है. यह ना सिर्फ खतरनाक है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ जानबूझकर किया गया खिलवाड़ है. इसी के खिलाफ हैदराबाद की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवरंजनी संतोष (Dr. Sivranjani Santosh) पिछले 8 सालों से बाजार में एनर्जी ड्रिंक्स पर लिखे जाने वाले ओआरएस नाम को हटवाने की कोशिश में लगी थीं. आखिर में डॉ. शिवरंजनी का आठ साल लंबा संघर्ष खत्म हुआ और ओआरएस नाम को लेबल के तौर पर इस्तेमाल करने पर रोग लगा दी हई है. इस ऐतिहासिक फैसले में 14 अक्टूबर 2025 को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण FSSAI ने नॉन स्टैंडर्ड फूड प्रोडक्ट्स के ब्रांड नामों में ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट्स यानी ORS लिखे जाने पर रोक लगा दी है. अब बाजार में सिर्फ WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन से अप्रूव किए गए फॉर्मूले पर ही ORS लिखा जा सकेगा.

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क्या है नकली ORS का मामला

बाजार में धड़ल्ले से नकली ORS बेचा जा रहा था. मीठी ड्रिंक्स और पाउडर पर ओआरएस लिखा जा रहा था जिनमें नमक और चीनी या ग्लूकोज की सही मात्रा नहीं थी. ORS बच्चों और वयस्कों में पानी की कमी को पूरा करने के लिए पिलाया जाने वाला फॉर्मुला है. यह ज्यादातर डायरिया और डिहाइड्रेशन के लिए पिया जाता है. इसे लाइफ सेविंग सोल्यूशन (Life Saving Solution) भी कहते हैं. ORS में सोडियम, पौटेशियम, क्लोराइड और ग्लूकोज की एक निर्धारित मात्रा होनी चाहिए जो इलेक्ट्रोलाइट्स को ध्यान में रखकर बनाई जाती है. ऐसे में एनर्जी ड्रिंक्स (Energy Drinks) पर ORS लिख देने पर इन्हें अगर मरीज को पिलाया जाए तो हालत सुधरने के बजाए बिगड़ भी सकती है. इन निकली ओआरएस में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है और खतरनाक रूप से कम सोडियम होता है.

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कैसे पहचानें असली ORS

नकली और असली ORS में अतंर करना बेहद जरूरी है. इसके लिए जो ओआरएस खरीदा जा रहा है उसके लेबल को सही तरह से देखें. नकली ओआरएस पर नीचे छोटे अक्षरों में ‘Not an ORS’ लिखा होता है.

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  • असली ORS के पैकेट पर ‘Based On WHO Formula’ लिखा होगा.
  • असली ORS एक ड्रग है जबकि नकली ओआरएस बस एनर्जी ड्रिंक हो सकती है जिसपर रेग्यूलेट बाय FSSAI लिखा होगा.
  • अगर ORS के पैकेट पर FSSAI का निशान है तो वह नकली है और अगर यह साइन नहीं है तो वो असली है.
  • असली ORS के नाम हैं Oral Rehydration Salts IP, Oral Rehydration Salts I.P. WALYTE और Oral Rehydration Salts I.P. ELECTRAL.

कैसे बनाएं ORS का घोल

ज्यादातर लोग ORS बनाने में एक आम गलती करते हैं. यह गलती है ORS का घोल बनाते हुए उसमें जरूरत से ज्यादा पानी मिला देना. आप यह गलती कभी ना करें. हमेशा 4 ग्राम के ORS पैकेट को 200 ml पानी में मिलाकर घोल बनाना चाहिए और 21 ग्राम के पैकेट को 1 लीटर पानी में मिलाना चाहिए.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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