Autism Spectrum Disorder Symptoms Children: आज के दौर में बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल और टीवी सबसे आसान तरीका बन गया है. कई माता-पिता रोते या परेशान बच्चे को शांत कराने के लिए तुरंत फोन थमा देते हैं, जो शुरुआत में एक सामान्य आदत लगती है. लेकिन यही आदत धीरे-धीरे बच्चों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन जाती है और वे स्क्रीन के बिना रह ही नहीं पाते. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चे बाहर खेलने, बातचीत करने और नई चीजें सीखने से दूर हो जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर सकता है, जिससे आगे चलकर गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
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कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन टाइम बढ़ाता है इस बीमारी का खतरा
नई रिसर्च के अनुसार, छोटे बच्चों में स्क्रीन टाइम का ज्यादा होना उनके व्यवहार और दिमागी विकास पर बुरा असर डाल सकता है. सामान्य जानकारी के अनुसार, विशेषज्ञों ने पाया कि जिन बच्चों को बहुत कम उम्र से ही मोबाइल या टीवी की आदत लग जाती है, उनमें आगे चलकर ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के लक्षण ज्यादा देखने को मिल सकते हैं.
इस स्थिति बच्चों के बोलने, समझने और दूसरों से जुड़ने की क्षमता को प्रभावित करती है. खासकर लड़कों में इसका जोखिम थोड़ा ज्यादा देखा गया है. इसलिए जरूरी है कि बच्चों के स्क्रीन टाइम को शुरू से ही सीमित रखा जाए और उन्हें ज्यादा से ज्यादा एक्टिव और इंटरैक्टिव एक्टिविटी में शामिल किया जाए.
बच्चों के लिए कितना स्क्रीन टाइम है सुरक्षित?
- 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए.
- 18 महीने से 6 साल के बच्चों को बहुत सीमित और माता-पिता की निगरानी में ही स्क्रीन दिखाएं.
- 7 साल से ऊपर के बच्चों को दिनभर में ज्यादा से ज्यादा 1-2 घंटे का स्क्रीन टाइम ही सही माना जाता है.
- बच्चों को क्या दिखाया जा रहा है, इस पर ध्यान देना बेहद जरूरी है और साध ही, स्क्रीन की जगह बच्चों से बातचीत, खेलकूद और किताबों की आदत विकसित करें, ताकि उनकी सेहत बनी रहे.
क्या है ऑटिज्म और क्यों है खतरनाक?
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चे का व्यवहार, सीखने की क्षमता और दूसरों से जुड़ने का तरीका सामान्य से अलग हो सकता है. इसके लक्षण कभी-कभी जल्दी दिखने लगते हैं, जैसे कि आंखों में संपर्क कम होना, देर से बोलना या अकेले रहना पसंद करना. अगर समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो सही देखभाल और गाइडेंस से बच्चे का विकास बेहतर किया जा सकता है. इसलिए माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल रखें और उन्हें लोगों से जुड़ने के ज्यादा मौके दें, ताकि उनका मानसिक और सामाजिक विकास सही तरीके से हो सके.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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