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जंगल में लगी आग बन सकती है जानलेवा, UNICEF के ये टिप्स बच्चे और आपकी जान बचाने में आएंगे बहुत काम

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में जंगल की भीषण आग से हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है. इसलिए यूनिसेफ ने वाइल्डफायर के धुएं से बचने के कुछ टिप्स साझा किए हैं, जो बच्चे और आपके परिवार की जान बचाने में बहुत काम आ सकते हैं. 

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बच्चों के लिए क्यों ज्यादा खतरनाक है वाइल्डफायर का धुआं? Image Credit- News24

दुनिया के कई हिस्सों में जंगल की आग लगने का खतरा बढ़ काफी बढ़ गया है. हाल ही में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में जंगल की भीषण आग लग गई, जिससे हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है. आजकल जरूरत से ज्यादा गर्मी पड़ने, सूखा पड़ने, तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने जैसी चीजों की वजह से जंगल की आग भड़क रही है. इससे आग का सीधा खतरा तो होता ही है, लेकिन आग का धुआं भी सेहत के लिए परेशानी पैदा कर सकता है. खासकर यह धुआं बच्चों की जिंदगी को इफेक्ट कर रहा है. अगर वक्त पर ध्यान नहीं दिया जाए तो परेशानी पैदा हो सकती है. UNICEF के मुताबिक, वाइल्डफायर का धुआं बच्चों के फेफड़ों पर असर डाल सकता है. 

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बच्चों के लिए क्यों ज्यादा खतरनाक है वाइल्डफायर का धुआं?

बच्चों के फेफड़े और इम्यून सिस्टम काफी कमजोर हो रहा है. वाइल्डफायर के धुएं में मौजूद बारीक कण यानी PM2.5 फेफड़ों के अंदर तक पहुंच जाता है. इससे छोटे बच्चों में सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. 

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सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ना 

UNICEF की एक रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे बच्चों में अस्थमा और दूसरी सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, जबकि लड़कों में सांस संबंधी समस्याओं के साथ हाई ब्लड प्रेशर और दिमाग पर भी असर डाल रहा है. 

धुएं के इफेक्ट में आने पर दिख सकते हैं ये लक्षण

अगर बच्चा वाइल्डफायर के धुएं के इफेक्ट में आया है तो इन लक्षणों पर ध्यान दें और अपनी हेल्थ का ख्याल रखें. अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो रही है, वह सो नहीं पा रहा है या उसकी तबीयत में बदलाव नजर आ रहा है. 

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  • खांसी आना
  • सांस लेने में परेशानी होना 
  • सीने में दर्द या जकड़न होना 
  • सांस लेते समय घरघराहट होना 
  • आंख, नाक या गले में जलन होना 
  • चक्कर आना

Wildfire से पहले ऐसे करें तैयारी

अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां जंगल की आग का खतरा रहता है तो पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है. 

  • परिवार के साथ बनाएं इमरजेंसी प्लान- बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से समझाएं कि जंगल की आग क्या होती है और उन्हें क्या करना है. परिवार के किसी सदस्य से अलग होने का प्लान करें. 
  • इमरजेंसी किट तैयार रखें- इसमें पानी, लंबे समय तक खराब न होने वाला खाना, जरूरी दवाइयां, फर्स्ट एड किट, टॉर्च, रेडियो, बैटरी, कैश और जरूरी दस्तावेजों की कॉपी रखें. UNICEF N95/KN95 मास्क और फायर एक्सटिंग्विशर को भी इमरजेंसी किट में रखने की सलाह देता है. 
  • घर के आसपास ज्वलनशील चीजें हटाएं- अगर घर जंगल या वनस्पति वाले इलाके के पास है तो कोशिश हो तो घर के आसपास कम से कम 10 मीटर का ऐसा जगह रखें जहां सूखे पत्ते, कचरा और आसानी से आग पकड़ने वाली चीजें न हों. 

Wildfire के दौरान क्या करें?

इस दौरान, सरकार घर खाली करने के लिए कहती है. बच्चों को धुएं से बचाने के लिए उन्हें घर के अंदर रखें और दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें. एयर कंडीशनर इस्तेमाल करते समय, अगर हो सके तो बाहर की हवा का इनटेक बंद रखें. 

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आग बुझने के बाद भी बच्चों का रखें खास ध्यान

Wildfire खत्म होने के बाद बच्चों को तुरंत सफाई के काम में शामिल न करें. राख और मलबा हटाने के बाद ही उन्हें घर लौटने दें. इसके बाद भी अगर बच्चे में सांस संबंधी कोई लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से बात करें. 

Wildfire के दौरान इन कामों से बचें

धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण को और बढ़ाने वाले कामों से बचना चाहिए. इस दौरान घर में सिगरेट पीने, लकड़ी या गैस का चूल्हा या फायरप्लेस जलाने, मोमबत्ती जलाने, स्प्रे कैन इस्तेमाल करने, खाना फ्राई या ब्रॉयल करने और वैक्यूम क्लीनर चलाने से बचना चाहिए. घर के अंदर गैस या पेट्रोल से चलने वाले जनरेटर का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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