What Is Dyslexia: हर बच्चा अपनी उम्र और स्पीड के हिसाब से लिखना और पढ़ना सीखता है. लेकिन, कुछ बच्चों में देखा जाता है कि वे अपनी उम्र के अन्य बच्चों से बहुत ज्यादा पीछे रह गए हैं. कई बार पैरेंट्स या टीचर बच्चे को कह देते हैं कि वह पढ़ने से जी चुराने लगा है और बिना ध्यान दिए हर बार गलत-सलत कुछ भी लिख रहा है. लेकिन, बच्चा का अन्य बच्चों की स्पीड को मैच करके ना पढ़ पाना, अपनी उम्र के मुताबिक लिखना-पढ़ना ना आना और बार-बार वही एक जैसी मिस्टेक्स करना डिस्लेक्सिया के कारण भी हो सकता है. डिस्लेक्सिया एक लर्निंग डिसोऑर्डर (Learning Disorder) है जिसमें बच्चे के लिखने-पढ़ने की क्षमता प्रभावित होती है. तारे जमीन पर फिल्म में ईशान भी इसी दिक्कत से दोचार हो रहा था. आइए समझते हैं कि डिस्लेक्सिया क्या है, इसके लक्षण (Dyslexia Symptoms) कैसे नजर आते हैं और पैरेंट्स को किस तरह इस डिसऑर्डर में बच्चे की मदद करनी चाहिए.
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क्या है डिस्लेक्सिया
डिस्लेक्सिया को ज्यादातर पढ़ने में आने वाली दिक्कत से जोड़कर देखा जाता है. इसमें बच्चे की अक्षरों को पहचानने की क्षमता पर असर पड़ता है और वे अक्सर ही शब्दों को उल्टा-सीधा या टेढ़ा-मेढ़ा भी लिख सकते हैं. मुसीबत को मुतीबक, असल को लसर या 9 को 6 या 6 को 9 लिखते रहना डिस्लेक्सिया के कारण हो सकता है. पेरेंट्स को यह समझना जरूरी है कि डिस्लेक्सिया बच्चे की समझदारी या बुद्धिमत्ता को नहीं दर्शाता बल्कि यह बच्चे की क्षमता और उपलब्धि के बीच खड़ी दीवार जैसा है. डिस्लेक्सिया में बच्चा पहली या दूसरी कक्षा में तो बाकी बच्चों की ही तरह धीमे-धीमे चीजें सीखता है क्योंकि उसे पूरे संयम के साथ ही पढ़ाया जाता है लेकिन जैसे-जैसे कक्षा और सिखाने की स्पीड बढ़ती है वैसे-वैसे बच्चा पिछड़ने लगता है. डिस्लेक्सिया को मैनेज किया जाए और बच्चे को मदद दी जाए तो डिस्लेक्सिया में बच्चा बाकी बच्चों की ही तरह पढ़ना-लिखना सीख जाता है लेकिन बच्चे के साथ डिस्लेक्सिया रहता है.
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डिस्लेक्सिया के क्या लक्षण होते हैं
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- आसान सी बच्चों वाली कविताएं पढ़ने और समझने में दिक्कत आती है
- बच्चा देरी से बोलना शुरू करता है
- बार-बार बच्चा एक ही शब्द दोहराता है
- डायरेक्शंस फॉलो करने में दिक्कत आती है
- बच्चो को डायरेक्शन समझने में दिक्कत होती है
- लेफ्ट और राइट समझने में दिक्कत आती है.
स्कूल में डिस्लेक्सिक बच्चों को कौन सी दिक्कतें होती है
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- नए शब्द कहने में दिक्कत आती है
- अपनी उम्र के बाकी बच्चों की तरह पढ़ने-लिखने में फ्लुएंट नहीं हो पाते हैं
- बच्चे शब्दों को आगे-पीछे लिखने लगते हैं
- बच्चे गणित के सवालों को अक्सर ही गलक कर देते हैं
- ब्लैकबोर्ड से देखकर अपनी कॉपी में नोट्स नहीं लिख पाते
- स्पेलिंग्स को बोलने में और समझने में दिक्कत आती है
- पढ़ते-पढ़ते बच्चा परेशान हो जाता है और खीझ उठता है.
आम जिंदगी पर भी दिखता है असर
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- बच्चे चीजों के लोगो (Logo) और संकेतों को पहचान नहीं पाते
- खेल के नियम समझने में बच्चे को दिक्कत होती है
- मल्टी स्टेप डायरेक्शन को समझने में दिक्कत आती है
- किसी नई भाषा को समझने में परेशानी होती है
डिस्लेक्सिक बच्चे की कैसे मदद करें
डिस्लेक्सिक बच्चों को मल्टी सेंसरी लर्निंग से सिखाया जा सकता है. आवाज, छूने और चीजें दिखाकर बच्चे को सिखाने पर वह जल्दी सीखता है. बच्चे को स्टेप-बाय-स्टेप करके सिखाया जा सकता है. चीजों को शॉर्ट क्लियर टास्क दें और उन्हें पूरा करने पर उसकी सराहना भी करें. बच्चे को प्रोफेशनल हेल्प मिले इसके लिए विशेषज्ञ से मिलें.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.