आपने कई ऐसे केस सुने होंगे कि कई बच्चों व लोगों के दिल में छेद हो जाता है, जिसके बाद उन्हें अपनी जिंदगी काफी संभल की जीनी होती है. ऐसे स्थिति में वह न ज्यादा खेल कूद कर पाते हैं और न ही अपनी इच्छा के अनुसार कुछ कर पाते हैं. यूं तो हार्ट से जुड़ी समस्या लोगों के बीच काफी आम होती जा रही है, लेकिन दिल में छेद होना आमतौर पर जन्मजात दोष होता है. मेडिकल भाषा में इस स्थिति को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट कहा जाता है. आइए जानते हैं इस समस्या के बारे में.
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कैसे हो जाता है दिल में छेद?
दिल में छेद (हार्ट होल) आमतौर पर जन्मजात बीमारी होती है, जिसे मेडिकल भाषा में सेप्टल डिफेक्ट कहा जाता है. यह तब होता है जब गर्भ में बच्चे का दिल पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता. इसके अलावा कुछ मामलों में संक्रमण, जेनेटिक कारण या गर्भावस्था के दौरान मां की खराब सेहत भी इस स्थिति की जिम्मेदार हो सकती है. कई बार इस बीमारी का पता इन्फेंट स्टेज में ही चल जाता है. वहीं कई बार इसके लक्षण समय रहते पहचान में नहीं आ पाते हैं.
दिल में छेद होने पर दिखाई देते हैं ये लक्षण
- इस स्थिति में मरीज को आम लेकिन खतरनाक संकेत दिखाई देते हैं. इसमें
- तेज सांस लेना.
- सांस के साथ आवाज आना.
- बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना.
- त्वचा का रंग नीला पड़ना.
- शरीर का विकास सामान्य से धीरे होना.
- साथ ही भूख कम लगना.
- इसके अलावा पैरों और टखनों में सूजनदिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण भी शामिल हैं.
क्या इसका दिल में छेद ठीक नहीं हो सकता है?
आपको जानकर खुशी होगी कि, दिल में छेद (Heart Hole) ज्यादातर मामलों में ठीक किया जा सकता है. यह छेद कितना बड़ा है और कहां है, इस पर इलाज निर्भर करता है. छोटे छेद कई बार बिना ऑपरेशन के अपने-आप बंद हो जाते हैं, खासकर बच्चों में. लेकिन बड़े छेद के लिए दवाइयों, कैथेटर प्रक्रिया या सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है. आजकल मेडिकल तकनीक इतनी उन्नत है कि सही समय पर इलाज कराने से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है, लेकिन इन सबके लिए जरूरी है कि आप ऊपर बताए गए लक्षणों का कभी नजरअंदाज न करें, क्योंकि संकेत दिखने में मामूली होते हैं, लेकिन पीछे का कारण खतरनाक हो सकता है.
- इसके अलावा इस समस्या से बचाव के लिए आपको चाहिए कि आप कुछ बातों का ख्याल रखें, इसमें;
- गर्भवती होने से पहले और गर्भावस्था के दौरान अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव लाएं और डॉक्टर के अनुसार अपनी डाइट रखें.
- इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान, सिगरेट या शराब का सेवन करने से परहेज करें और वक्त-वक्त पर डॉक्टर के अनुसार टीकाकरण कराते रहें.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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