Acrophobia Treatment: डर लगना या घबराहट होना एक कॉमन प्रॉब्लम है, जो किसी भी इंसान के अंदर हो सकती है। हर किसी में यह अलग-अलग होती है, जैसे किसी को पानी से डर लगता है, किसी को अंधेरे से या अकेले रहने से डर लगता है। ठीक वैसे ही, कुछ लोगों को हाइट से डर लगता है। हालांकि, डर लगना या एंग्जाइटी होना कोई शारीरिक बीमारी नहीं है। यह सब साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम है, जो ब्रेन से जुड़ी होती है। ऊंचाई से डर लगना भी एक मानसिक बीमारी है, जिसमें इंसान को थोड़ा हाइट में जाने पर घबराहट होती है। इसमें भी 2 प्रकार होते हैं, जिसमें एक वह लोग होते हैं, जो काफी ऊपर होते हैं, तो उन्हें यह एंग्जाइटी होती है। दूसरे, वह लोग होते हैं, जिन्हें हल्की हाइट जैसी कुछ सीढ़ियां चढ़ने के बाद डर लगता है।

एक्रोफोबिया क्या है?

एक्रोफोबिया एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसमें ऊंचाई में होने या जाने से भी लोगों को डर महसूस होता है। यह एक प्रकार की चिंता से जुड़ी बीमारी है। एक्रोफोबिया से पीड़ित व्यक्ति को बहुत डर और चिंता होती है, जब वह ऊंची जगहों के बारे में सोचता है या किसी महत्वपूर्ण ऊंचाई पर मौजूद होता है। वे अक्सर ऐसी स्थितियों या स्थानों से बचते हैं जिनमें ऊंचाई शामिल होती है। ये भी पढ़ें- इन तीन सस्ते फल से विटामिन बी-12 की कमी होगी पूरी

किन लोगों को एक्रोफोबिया होता है?

एक्रोफोबिया किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। एक्रोफोबिया जैसे फोबिया बच्चों में होने की संभावना ज्यादा रहती है, जो टीनएज के बाद युवा उम्र तक स्पष्ट हो जाती है। महिलाओं में भी इस फोबिया के होने की संभावना अधिक रहती है।

कैसी चीजों से डरते हैं लोग?

ज्यादा ऊंची सीढ़ियों पर होना। कुछ लोगों को अस्थाई सीढ़ी पर चढ़ने से भी घबराहट होती है। पार्किंग एरिया, जो मल्टीलेवल्स की होती है। रोलरकोस्टर पर। ऊंची बिल्डिंग की छत या बालकनी से देखने में डर लगना। हाइट वाली जगहों पर जाने से डर लगना। [caption id="attachment_952880" align="alignnone" ] फोटो क्रेडिट- Freepik[/caption]

एक्रोफोबिया के संकेत

ऊंचाई के बारे में सोचने से डर लगना। ऐसा ख्याल आना, जिसमें आप ऊंचाई से गिरने वाले हों। हाइट वाली जगहों से दूर भागना। अगर किसी हाइट वाली प्लेस पर हैं, तो वहां दिल की धड़कनें तेज होना। ऊंचाई पर सिर चकराना या सांस लेने में परेशानी महसूस करना।

एक्रोफोबिया का इलाज

इसका इलाज साइकोलॉजी द्वारा किया जाता है। यह एक मानसिक बीमारी है, इसलिए इसका इलाज थेरेपी से संभव होता है। ये भी पढ़ें- प्रेग्नेंसी के पहले वीक में क्या-क्या होता है? Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले विशेषज्ञों से राय अवश्य लें। News24 की ओर से जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।