Kaan Me Dard: अक्सर लोगों को कान में हल्का दर्द होता है, जिसे वे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसे में कई लोग खुद ही ईयरबड से कान साफ करने लगते हैं या घरेलू नुस्खे के तौर पर गर्म तेल डाल लेते हैं. शुरुआत में दर्द मामूली लगता है, लेकिन गलत आदतों की वजह से यह धीरे-धीरे बढ़ सकता है और इंफेक्शन का रूप भी ले सकता है. सामान्य जानकारी के अनुसार, बिना सही जानकारी के किए गए ऐसे प्रयोग कान को नुकसान पहुंचा सकते हैं. जिससे सुनने की क्षमता भी प्रभावति हो सकती है. इसलिए अगर कान में बार-बार दर्द हो या असहजता महसूस हो, तो यह समझना जरूरी है कि आखिर इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं. इस स्टोरी में हम आपको बताएंगे कि आखिर किन कारणों से कान में बार-बार दर्द होता है. आइए जानते हैं.
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किन कारणों से होता है कान में दर्द What Causes Ear Pain?
कान दर्द के पीछे कई कारण हो सकते हैं. सबसे आम कारण बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन होता है. मिडिल ईयर में इंफेक्शन होने पर तेज दर्द और भारीपन महसूस होता है और बाहरी कान में सूजन या फुंसी भी दर्द की वजह बन सकती है. कई बार दांत, गले या टॉन्सिल (Tonsils) की समस्या का दर्द भी कान तक पहुंच जाता है, जिसे रेफर्ड पेन कहा जाता है. कुछ मामलों में चोट, वायरल संक्रमण या कान के पर्दे में समस्या होने से भी दर्द हो सकता है, इसलिए कारण समझना जरूरी है. बिना सही जानकारी के खुद से इलाज कराना या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन करना आपके कान पर बुरा असर डाल सकता है और गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.
ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
- अगर कान दर्द के साथ कुछ खास लक्षण दिखाई दें, तो देरी नहीं करनी चाहिए. जैसे;
- कान से पस या पानी आना.
- सुनाई कम देना या आवाज गूंजना.
- दर्द के साथ चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना.
- कान में दर्द के साथ चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना.
- मुंह या गले में लंबे समय से घाव या गांठ होना.
कैंसर का भी हो सकता है खतरा
कई डॉक्टरों के अनुसार, कुछ मामलों में मुंह या गले के कैंसर की वजह से भी कान में दर्द महसूस हो सकता है. इसलिए सही जांच कराना जरूरी होता है, ताकि स्थिति को पहले की काबू किया जा सके. कैंसर की स्थिति में शुरुआती लक्षण जल्दी दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन जब हालात गंभीर हो जाते हैं, तो यह बीमारी मरीज की जान ले सकती है. आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि मुंह के कैंसर और गले के कैंसर का कान से क्या लेना देना? लेना देना बिल्कुल है, असल में गला, मुंह और कान की नसें आपस में जुड़ी होती हैं. खासकर Glossopharyngeal nerve (ग्लोसोफैरिंजियल नर्व) और Vagus nerve (वैगस नर्व) गले, जीभ और कान को एक-दूसरे से जोड़ती हैं. जब गले या मुंह में कैंसर की वजह से सूजन, घाव या गांठ बनती है, तो इन नसों पर दबाव पड़ता है और दर्द का सिग्नल कान तक पहुंचता है.
कान दर्द में क्या करें और क्या न करें
कान में दर्द होने पर बिना सलाह के घरेलू नुस्खे अपनाने से बचना चाहिए. कान में तेल, केमिकल या कोई भी लिक्विड डालना नुकसान कर सकता है, खासकर अगर पर्दे में छेद हो. साथ ही, ईयरबड या नुकीली चीजों से कान साफ करना भी खतरनाक हो सकता है. बेहतर रहेगा कि दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह से ही दवा लें. हल्की गर्म सिकाई से कभी-कभी राहत मिल सकती है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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