Why Does Tobacco Cause Oral Cancer: लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि ओरल कैंसर मुख्य रूप से तंबाकू और गुटखा सेवन करने वाले लोगों में ही होता है. हालांकि, इसको लेकर एक्सपर्ट डॉक्टर मनदीप सिंह (ऑन्कोलॉजिस्ट और आर्ट ऑफ हीलिंग कैंसर के संस्थापक) का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है, जिनमें मरीजों ने कभी तंबाकू का सेवन नहीं किया, फिर भी उन्हें ओरल या ऑरोफेरिंजियल कैंसर का निदान हुआ. इस बदलते रुझान ने विशेषज्ञों का ध्यान उन नए जोखिम कारकों की ओर आकर्षित किया है, जो इस बीमारी के पीछे भूमिका निभा सकते हैं.
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ओरल कैंसर होने का मुख्य कारण क्या है?
आज ओरल कैंसर के बढ़ते मामलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV), विशेष रूप से HPV-16, एक महत्वपूर्ण कारण के रूप में उभरकर सामने आया है. यह वायरस मुंह और गले की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है और कई साल बाद कैंसर का कारण बन सकता है. विशेष रूप से युवा और गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों में HPV से जुड़े कैंसर के मामलों में तेजी देखी जा रही है.
सेकेंड हैंड स्मोकिंग है जिम्मेदार
कई एक्सपर्ट का यह भी मानना है कि सेकेंड हैंड स्मोकिंग यानी दूसरों के तंबाकू या सिगरेट के धुएं के लगातार संपर्क में रहना भी जोखिम को बढ़ा सकता है. भले ही व्यक्ति स्वयं धूम्रपान न करता हो, लेकिन लंबे समय तक धुएं में मौजूद हानिकारक रसायनों के संपर्क में रहने से मुंह और गले की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे लोगों में भी ओरल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.
सिर और गर्दन के कैंसर क्यों बढ़ रहा है?
वायु प्रदूषण भी एक उभरता हुआ जोखिम कारक माना जा रहा है. हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5 और PM10) शरीर में लगातार सूजन और कोशिकीय क्षति को बढ़ावा दे सकते हैं.कुछ अध्ययनों में लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क को सिर और गर्दन के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है. हालांकि, इस विषय पर अभी और शोध की जरूरत है, लेकिन इसे नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं.
मुंह की खराब होना
मुंह की खराब स्वच्छता और लंबे समय तक रहने वाली सूजन भी जोखिम को बढ़ा सकती है. टूटे हुए दांतों से बार-बार होने वाली चोट, खराब फिटिंग वाले डेंचर, मसूड़ों की बीमारी और लगातार संक्रमण मुंह की कोशिकाओं में बदलाव पैदा कर सकते हैं. कुछ शोधों में खराब ओरल हेल्थ को ओरल कैंसर के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है.
खानपान संबंधी आदतें भी ओरल कैंसर के लिए जिम्मेदार
आहार और जीवनशैली से जुड़े कारक भी चर्चा में हैं. फलों और हरी सब्जियों की कमी वाला आहार, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन तथा अधिक मात्रा में शर्करा युक्त पेय पदार्थों का सेवन शरीर में सूजन और कोशिकीय क्षमता को बढ़ा सकता है. हाल के अध्ययनों ने संकेत दिया है कि कुछ खानपान संबंधी आदतें भी ओरल कैंसर के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं.
ओरल कैंसर का वक्त पर पता ना लग पाना
ओरल कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य समस्याओं जैसे मुंह के छाले, सफेद या लाल धब्बे, जीभ में दर्द, आवाज में बदलाव या निगलने में परेशानी के रूप में दिखाई देते हैं. कई लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते, जिसके कारण बीमारी का पता देर से चलता है. इसलिए अगर मुंह में कोई घाव, गांठ या बदलाव दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए.
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