Lung Cancer Without Smoking: अक्सर लोग सोचते हैं कि फेफड़ों का कैंसर केवल सिगरेट पीने वालों को होता है. हालांकि, यह पूरी तरह सही नहीं है. धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण जरूर है, लेकिन कई ऐसे लोग भी इस बीमारी का शिकार होते हैं जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी होती. ऐसे मामलों में एक खास प्रकार का फेफड़ों का कैंसर ज्यादा देखा जाता है. वहीं, जो लोग धूम्रपान नहीं करते, उनमें फेफड़ों के कैंसर के पीछे अक्सर एक ही कारण नहीं होता. लंबे समय तक दूसरों के सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहना, प्रदूषित हवा में मौजूद महीन कण, घर के अंदर लकड़ी, कोयला और काम की जगह पर एस्बेस्टस, सिलिका या क्रोमियम जैसी चीजें खतरा बढ़ा सकता है. इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में इमारतों के अंदर जमा होने वाली रेडॉन गैस भी एक कारण मानी जाती है. इसको लेकर डॉक्टर शैलेश नाइक का कहना है कि फेफड़े का ध्यान रखना बहुत जरूरी है वरना कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. 

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कैंसर कोशिकाएं कैसे बनती हैं? 

फेफड़ों का कैंसर केवल बाहरी कारणों से ही नहीं होता. कई बार शरीर की कोशिकाओं में समय के साथ बदलाव होने लगते हैं, जो कैंसर का रूप ले सकते हैं. कुछ मरीजों में कैंसर कोशिकाओं में विशेष प्रकार के जीन बदलाव पाए जाते हैं. इन्हें समझने के लिए टेस्ट किया जाता है, जिससे डॉक्टर यह तय कर पाते हैं कि मरीज के लिए कौन-सा इलाज सही रहेगा. 

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कब बन जाता है कैंसर? 

अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे, खांसी के साथ खून आए, सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो, आवाज बैठ जाए, बार-बार फेफड़ों में संक्रमण हो, बिना वजह थकान महसूस हो या तेजी से वजन कम होने लगे तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई लोग इन्हें एलर्जी, गैस या सामान्य संक्रमण समझकर टाल देते हैं, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है. 

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फेफड़ों के कैंसर की पहचान के लिए टेस्ट कौन सा करें? 

फेफड़ों के कैंसर की जल्दी पहचान के लिए लो-डोज सीटी स्कैन कराना जरूरी है. यह खासकर उन लोगों के लिए इस्तेमाल हो सकती है जिनमें जोखिम अधिक है, जैसे लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले, खतरनाक रसायनों के संपर्क में रहने वाले या जिनके परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा हो. हालांकि, यह टेस्ट हर इंसान के लिए जरूरी नहीं होती और इसे डॉक्टर की सलाह पर ही करवाना चाहिए. 

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फेफड़ों के कैंसर धूम्रपान छोड़ने से नहीं होगा? 

फेफड़ों के कैंसर से बचने के लिए धूम्रपान छोड़ने तक सीमित नहीं है. घर और कार्यस्थल को धुएं से मुक्त रखना, अच्छी वेंटिलेशन बनाए रखना, प्रदूषित हवा और हानिकारक रसायनों के संपर्क को कम करना तथा किसी भी चेतावनी वाले लक्षण पर समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना भी उतना ही जरूरी है. 

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.