ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही अजीब सा डर लगता है. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर ट्यूमर दिमाग के जरिए निकाले जाते हैं और सर्जरी की जाती है. इसका दिमाग पर काफी असर पड़ता है, लेकिन अब मेडिकल साइंस में कई ऐसी तकनीक भी मौजूद हैं, जिनके जरिए ट्यूमर को नाक के जरिए से भी निकाला जा सकता है. WHO के मुताबिक, नाक के रास्ते पहुंचकर एंडोस्कोपिक सर्जरी की जा सकती है. इस प्रोसेस को आमतौर पर एंडोस्कोपिक एंडोनैसल या ट्रांसस्फेनॉइडल सर्जरी कहा जाता है. हालांकि, इससे पहले डॉक्टर कई तरीके के टेस्ट करते हैं और फिर इस तरह का फैसला लेते हैं. 

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ब्रेन ट्यूमर का संकेत 

अगर सिरदर्द लगातार बढ़ रहा है, उसका पैटर्न बदल गया है और उसके साथ उल्टी, नजर में बदलाव, बोलने में परेशानी, हाथ-पैर में कमजोरी या झुनझुनी और चलने में परेशानी जैसे लक्षण भी हैं तो इस गंभीर बीमारी होने के चांसेस हैं. 

  • अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना
  • चलने या संतुलन बनाने में दिक्कत होना
  • हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन होना
  • बोलने में परेशानी होना
  • पहले से अलग या लगातार सिरदर्द होना
  • बेहोशी या दौरा पड़ना 
  • बुखार और गर्दन में अकड़न होना
  • बार-बार या तेज उल्टी होना
  • नजर धुंधली या डबल दिखना

नाक के रास्ते ब्रेन तक कैसे पहुंचते हैं?

एंडोस्कोपिक एंडोनासल सर्जरी में डॉक्टर नाक के अंदर से एक पतला कैमरा यानी एंडोस्कोप डालकर आगे बढ़ते हैं. नाक के पीछे मौजूद स्फेनोइड साइनस के रास्ते से खोपड़ी के आधार के कुछ हिस्सों तक पहुंच बनाई जाती है. इसके बाद, सर्जिकल चीजों की मदद से उस हिस्से में मौजूद ट्यूमर को हटाया जाता है. इस तकनीक का फायदा यह है कि कुछ मामलों में सिर की हड्डी के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. 

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सबसे ज्यादा किस ट्यूमर में अपनाई जाती है यह तकनीक? 

पिट्यूटरी एडेनोमा में इस तकनीक को अपनाया जाता है. नाक के रास्ते की एंडोस्कोपिक सर्जरी की जाती है और स्कल-बेस सर्जरी के हिस्से में इसे पूरा किया जाता है. पिट्यूटरी ट्यूमर दिमाग के नीचे की तरफ होता है और नाक के पीछे से इसके आसपास के हिस्से तक पहुंच जाता है. इसलिए यह सर्जरी की जाती है. 

क्या कुछ दूसरे स्कल-बेस ट्यूमर में भी हो सकती है सर्जरी?

कुछ स्कल-बेस यानी खोपड़ी के आधार के ट्यूमर में भी एंडोस्कोपिक एंडोनासल तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, हर स्कल-बेस ट्यूमर नाक के रास्ते से निकालना आसान नहीं होता. इसलिए ट्यूमर के बारे में सारी चीजें पहले चेक करना बेस्ट हो सकती हैं. 

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कैसे तय होता है कि ट्यूमर नाक से निकलेगा या नहीं?

सर्जरी का तरीका क्या होगा, इसके लिए डॉक्टर आमतौर पर एमआरआई और सीटी स्कैन करवाते हैं. ट्यूमर की सही लोकेशन देखते हैं और ट्यूमर का पता लगाते हैं. यानी सिर्फ यह देखकर फैसला नहीं किया जाता कि ट्यूमर ब्रेन में है तो इसे नाक से निकाला जा सकता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source- WHO