Blood Group: क्या आपके ब्लड ग्रुप का संबंध आपकी सेहत और बीमारियों के जोखिम से हो सकता है? यह सवाल लंबे समय से मेडिकल रिसर्च और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है. हाल के वर्षों में कई अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि कुछ खास ब्लड ग्रुप वाले लोगों में कुछ बीमारियों का जोखिम थोड़ा ज्यादा या कम हो सकता है, हालांकि विशेषज्ञ इसे केवल एक जोखिम संकेतक मानते हैं, न कि किसी बीमारी की निश्चित भविष्यवाणी. एशियन हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर और हेड, डॉ. सुनील राणा ने इस विषय पर अपनी राय दी है. आइए डॉक्टर से ही जानते हैं कि ब्लड ग्रूप और बीमारियों के बीच क्या संबंध है.

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क्या ब्लड ग्रुप और बीमारियों का कोई संबंध है?

डॉ. सुनील राणा का कहना है, “ब्लड ग्रुप और बीमारियों के बीच कुछ सांख्यिकीय संबंध जरूर देखे गए हैं, लेकिन यह किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य का अकेला निर्धारक नहीं है. जीवनशैली, खान-पान, जेनेटिक्स और पर्यावरणीय कारक कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं."

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अलग-अलग ब्लड ग्रुप्स में क्या देखे गए हैं जोखिम?

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रिसर्च के अनुसार, कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि ब्लड ग्रुप A वाले लोगों में कुछ हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम थोड़ा अधिक हो सकता है, जबकि ब्लड ग्रुप O वाले लोगों में कुछ प्रकार के ब्लड क्लॉटिंग यानी खून के थक्के बनने का जोखिम अपेक्षाकृत कम देखा गया है। इसी तरह ब्लड ग्रुप AB और B पर भी अलग-अलग प्रकार के संभावित स्वास्थ्य संबंधी पैटर्न रिपोर्ट किए गए हैं. हालांकि ये निष्कर्ष “कॉरिलेशन” पर आधारित हैं, न कि “कजेशन” पर. यानी ब्लड ग्रुप किसी बीमारी का कारण नहीं बनता, बल्कि कुछ स्थितियों में जोखिम थोड़ा प्रभावित हो सकता है.

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डॉ. सुनील राणा बताते हैं, “कई लोग यह मान लेते हैं कि यदि उनका ब्लड ग्रुप किसी जोखिम से जुड़ा है तो उन्हें वह बीमारी जरूर होगी, जो पूरी तरह गलत है. सही जीवनशैली अपनाकर अधिकतर जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.”

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कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि ब्लड ग्रुप O वाले लोगों में मलेरिया के प्रति थोड़ी अधिक प्रतिरोधक क्षमता हो सकती है, जबकि अन्य ब्लड ग्रुप्स में कुछ संक्रमणों के प्रति अलग-अलग संवेदनशीलता देखी गई है. इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान भी ब्लड ग्रुप और संक्रमण की गंभीरता को लेकर कई शोध सामने आए थे, हालांकि उनमें भी निष्कर्ष पूरी तरह निर्णायक नहीं थे.

ब्लड ग्रुप बीमारी का कारण नहीं, केवल जोखिम संकेतक

डॉ. सुनील राणा कहते हैं, “हमारे पास अभी ऐसी कोई वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं है जो केवल ब्लड ग्रुप के आधार पर किसी व्यक्ति की भविष्य की बीमारियों की सटीक भविष्यवाणी कर सके.” डॉक्टर का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग अपनी जीवनशैली पर ध्यान दें. संतुलित आहार, एक्सरसाइज, स्ट्रेस मैनेजमेंट और समय-समय पर हेल्थ टेस्ट किसी भी बीमारी के जोखिम को कम करने में अधिक प्रभावी भूमिका निभाते हैं.

डॉ. सुनील राणा के अनुसार भविष्य में हो सकता है कि ब्लड ग्रुप और जेनेटिक डेटा के आधार पर अधिक व्यक्तिगत उपचार योजनाएं बनाई जाएं, लेकिन वर्तमान में यह केवल रिसर्च का एक हिस्सा है, न कि क्लिनिकल निर्णय का आधार.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय में, लोगों को ब्लड ग्रुप से जुड़े मिथकों और अधूरी जानकारी पर भरोसा करने के बजाय डॉक्टर की सलाह और वैज्ञानिक तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए. आपका ब्लड ग्रुप आपके शरीर की एक महत्वपूर्ण जैविक पहचान जरूर है, लेकिन यह आपकी सेहत का अंतिम फैसला नहीं करता है. सही देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली के साथ हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रख सकता है.

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