Bipasha Basu Osteoarthritis: बिपाशा बासु कई इंटव्यूज में इस बात का जिक्र कर चुकी हैं कि उन्हें ऑस्टियोआर्थराइटिस है जिसका पता उन्हें साल 2005 में चला था. बिपाशा शेप में आने के लिए क्रैश डाइट कर रही थीं और बिना किसी प्रोफेशनल ट्रेनर के रनिंग किया करती थीं जिस कारण अचानक उन्हें घुटनों में दर्द होना शुरू हो गया. दर्द कई बार इतना ज्यादा होता था कि बिपाशा के लिए खड़े होना भी मुश्किल हो गया था. दोस्तों के कहने पर बिपाशा ने MRI टेस्ट करवाया तो पता चला उन्हें ऑस्टियोआर्थराइटिस है. गठिया (Gathiya) की यह कंडीशन युवाओं में कम ही दिखती है जिस कारण बिपाशा के लिए यह समझना मुश्किल था कि वे इसकी चपेट में कैसे आ गईं.

यह भी पढ़ें - रोज 200 पुश-अप्स और शाकाहारी खाना… Ravi Kishan ने बताया 57 साल की उम्र में फिट रहने का राज

---विज्ञापन---

बिपाशा ने कैसे किया ऑस्टियोआर्थराइटिस मैनेज

बिपाशा बासु को गठिया का पता चला तो उन्होंने खुद को संभालते हुए इस कंडीशन से लड़ने की ठानी. बिपाशा को उनकी फिजियोथेरेपिस्ट से यह सलाह मिली थी कि उन्हें अपना वजन कम करने की कोशिश करनी चाहिए, खासकर घुटनों के पास इकट्ठा एक्सेस फैट को कम करना होगा. बिपाशा ने वेट ट्रेनिंग शुरू की उन्हें अपनी जांघों और नितंब की मसल्स को स्ट्रोन्ग करने की सलाह दी गई थी और बैलेंस को करेक्ट करने के लिए कहा गया जिससे कमजोर घुटनों पर ज्यादा दबाव ना पड़े.

---विज्ञापन---

बिपाशा को कई तरह की हिदायतें मिलीं, जैसे हील्स पहनकर सीढ़ियां ना चढ़ना, डांस ना करना, एक्शन सीक्वेंस शूट ना करना वगैरह. बिपाशा ने धीरे-धीरे अपने घुटनों का ख्याल रखना सीख लिया और दर्द पहले से कम भी हुआ. हालांकि, बिपाशा डेढ़ दशक पहले ही यह मान चुकी थीं कि वे ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए थेरेपी ले रही हैं जोकि उन्हें उम्रभर करना होगा. अब वे खुद से अपनी थेरेपी कर लेती हैं.

---विज्ञापन---

अर्थराइटिस क्या होता है और क्यों होता है?

---विज्ञापन---

ऑस्टियोआर्थराइटिस गठिया का एक सामान्य प्रकार है. इसमें जोड़ों की प्रोटेक्टिव कार्टिलेज डैमेज होने लगती है. यही कार्टिलेज हड्डियों के किनारों पर कुशन का काम करती है. ऑस्टियोआर्थराइटिस शरीर के किसी भी जोड़ को प्रभावित कर सकता है लेकिन यह ज्यादातर घुटनों में, हाथों पर, हिप्स और रीढ़ में होता है.

---विज्ञापन---

ऑस्टियोआर्थराइटिस ज्यादातर बढ़ती उम्र में होने वाला रोग है जो लोगों को 50 साल की उम्र के बाद हो सकता है. महिलाओं में मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis In Women) हो सकता है. युवाओं में यह कंडीशन रेयर है लेकिन जॉइंट इंजरी, एब्नॉर्मल जॉइंट स्ट्रक्चर और जॉइंट कार्टिलेज में जेनेटिक डिफेक्ट के कारण यह हो सकता है.

मोटापे के कारण, जॉइंट सर्जरी के बाद, जॉइंट्स पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ने वाली एक्टिविटीज करने पर या गठिया की फैमिली हिस्ट्री होने पर ऑस्टियोआर्थराइटिस हो सकता है.

घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस के क्या लक्षण हैं (Osteoarthritis Symptoms)

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस में हल्की सी भी मूवमेंट से घुटनों में दर्द होने लगता है
  • घुटनों में अकड़न महसूस होती है, खासकर सुबह उठने या देर तक आराम करने के बाद
  • घुटनों की फ्लेक्सिबिलिटी कम होने लगती है
  • जोड़ों के आस-पास हल्के प्रेशर से भी दर्द महसूस होने लगता है
  • चलते या उठते-बैठते समय कट-कट की आवाज आती है
  • घुटनों पर सूजन नजर आ सकती है.

यह भी पढ़ें - Rashmika Mandanna ने बताया कैसे हुई हिप इंजरी, डांस शूट के दौरान डिटैच हुए जॉइंट्स अब पैर उठाना भी मुश्किल

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.