स्क्रीनशॉट लेने की आदत घटा रही है आपकी याद्दाश्त, बिंगहैमटन यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा

Taking Screenshots Effects: अमेरिका की बिंगहैमटन यूनिवर्सिटी की शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में पाया कि स्क्रीनशॉट लेने की आदत का याद्दाश्त पर क्या असर पड़ता है. इस स्थिति को फोटो-टेकिंग इम्पेयरमेंट इफेक्ट नाम दिया गया है. जानिए क्या कहती है स्टडी.

Taking Screenshots Effects

स्क्रीनशॉट लेने पर दिमाग पर कैसा असर पड़ता है, जानिए यहां. AI Generated Image

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Weak Memory: आजकल लोग फोन में किसी जानकारी को पढ़ते बाद में हैं और स्क्रीनशॉट पहले लेते हैं. कभी फेसबुक पर कोई पोस्ट दिख जाए या किसी जानकारी को बाद में फिर देखना हो तो लोग स्क्रीनशॉट लेकर रख लेते हैं. स्क्रीनशॉट यानी फोन की स्क्रीन की फोन के अंदर ही फोटो ले लेना. लोग किसी की फोटो, कोई जानकारी, रिजल्ट्स या कोट्स वगैरह के स्क्रीनशॉट्स अक्सर ही लेते रहते हैं. लेकिन, बिंगहैमटन यूनिवर्सिटी (Binghamton University) के रिसर्चर्स ने अपने शोध में पाया है कि स्क्रीनशॉट (Screenshot) लेने की यह आदत याद्दाश्त को बेहतर नहीं बना रही बल्कि कमजोर कर रही है. इस स्थिति को रिसर्चर्स ने फोटो टेकिंग इम्पेयरमेंट इफेक्ट नाम दिया है. जानिए स्क्रीनशॉट लेना क्यों और किस तरह याद्दाश्त को कम करता है.

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स्क्रीनशॉट लेने पर कमजोर होती है याद्दाश्त

स्टडी में पाया गया कि स्क्रीनशॉट लेने वाले व्यक्ति को जानकारी उस व्यक्ति की तुलना में कम याद रहती है जो उस जानकारी को ध्यान से देखकर आगे बढ़ गया हो. तस्वीर लेने का फायदा बस तब होता है जब आप उसे बाद में बार-बार देखें.

कैसे की गई रिसर्च

रिसर्च के लिए छात्रों को कलाकृतियों जैसे पेंटिंग, तस्वीरें या स्केच वगैरह चित्र दिखाए गए. कुछ को तस्वीरों के स्क्रीनशॉट लेने के लिए कहा गया और कुछ को कहा गया कि वे इन तस्वीरों को ध्यान से देखें. कुछ देर बाद छात्रों से दिखाए गए चित्रों के बारे में बारीकी से सवाल पूछे गए. रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों ने स्क्रीनशॉट लिया था उन्हें तस्वीरों के बारे में कम याद था लेकिन जिन लोगों ने तस्वीरों को ध्यान से देखा था उनके जवाब ज्यादा सटीक थे और उन्हें तस्वीर के बारे में ज्यादा बेहतर तरह से पता था.

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स्क्रीनशॉट्स लेने से बढ़ सकती है भूलने की आदत

  • स्क्रीनशॉट लेने पर एक नुकसान यह बताया जाता है कि इससे व्यक्ति का ध्यान बंट जाता है. जिस एनर्जी का इस्तेमाल चीजें याद रखने में होना चाहिए था उसका इस्तेमाल स्क्रीनशॉट लेने में हो जाता है.
  • स्क्रीनशॉट लेने का काम व्यक्ति को उस पल से अलग कर देते हैं. वह उस अनुभव से दूर हो जाता है जिससे दिमाग पर उस चीज की छाप नहीं बन पाती है.
  • दिमाग में कॉग्निटिव ऑफलोडिंग होने लगती है. दिमाग को दब पता होता है कि जानकारी फोन में सुरक्षित है तो दिमाग याद रखने की कोशिश ही नहीं करता है.

पुराना तरीका बेहतर करेगा याद्दाश्त

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याद्दाश्त को बेहतर करने के लिए वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि जानकारी को याद रखने के लिए फोन निकालने के बजाय कागज पर लिख लें. कागज पर लिखना या दिमाग में उस जानकारी को बैठा लेना याद्दाश्त को बेहतर बनाने में मदद करता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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