Heart Health Warning Signs: IIT मद्रास के युवा साइंटिस्ट्स की एक छोटी टीम ने 5 मिनट में आर्टरीज यानी धमनियों की उम्र बताने वाला डिवाइस बना लिया है. आमतौर पर लोगों को लगता है कि उनकी उम्र के बराबर ही उनकी धमनियों की उम्र होती है, लेकिन ऐसा नहीं है. IIT मद्रास के VESPA मिशन में रिसर्चर्स ने धमनियों की उम्र बताने वाला तरीका खोज निकाला है. वेस्पा यानी वेस्कुलर हेल्थ बेस्ड अर्ली स्क्रीनिंग फॉर पब्लिक हेल्थ अडोप्शन को लोगों की वेस्कुलर हेल्थ मैप करने वाली भारत की पहली और सबसे बड़ी कोशिश बताया जा रहा है. इस मिशन का नेतृत्व IIT मद्रास के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जयराज जोसफ कर रहे हैं और उनका साथ दे रहे हैं हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर के कार्डियोवेस्कुलर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रिंसिपल सांइटिस्ट डॉ. राज किरण. जानिए क्या है यह डिवाइस जिससे हार्ट अटैक का वर्षों पहले चल सकता है पता.
रिसर्चर्स ने बनाया डिवाइस ARTSENS
IIT मद्रास की टीम ने एक ऐसा डिवाइस बनाया है जो इससे पहले तक नहीं बनाया गया था. ARTSENS यानी आर्टीरियल स्टिफनेस इवेलुएशन फॉर नॉन-इनवासिव स्क्रीनिंग. यह डिवाइस 5 मिनट में परफॉर्म करता है और इसे फील्ड टेन्ट में ही इस्तेमाल किया जाता है. इसके नॉन-इनवासिव होने का मतलब है कि यह स्किन को चीरता नहीं है. इसमें किसी तरह का इंजेक्शन नहीं लगाया जाता और ना ही खून निकालने की जरूरत पड़ती है. गर्दन के पास एक छोटा सा टूल रखा जाता है जो केरोटिड आर्टरी को सुनने में मदद करता है, एक बड़ा वेसल होता है जो दिमाग के लिए होता है और सॉफ्ट प्रेशर कफ्स होते हैं जो दोनों हाथों और जांघों पर लगाए जाते हैं.
इस डिवाइस के इस्तेमाल से यह उन 2 रीडिंग्स को दिखाता है जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, पहली है गर्दन की आर्टरी कि वह कितना बड़ी है और उसमें कितना कड़कपन है और दूसरी एरोटिक पल्स वेव वेलोसिटी, यह दिल से दिमाग तक जाने वाली आर्टरी का हाल बताती है. ARTSENS से किसी तरह का अंदाजा नहीं लगाया जाता है बल्कि सटीक नंबर मिलते हैं.
आर्टरीज की सेहत और दिल का हाल
आर्टरीज शरीर की पाइपलाइन होती हैं जो खून को पूरे शरीर तक पहुंचाती हैं. हेल्दी आर्टरीज (Healthy Arteries) वह होती हैं जो लचकदार होती हैं या स्प्रिंगी होती हैं, सख्त पाइप की तरह नहीं होती हैं. दिल की हर धड़कन के साथ आर्टरीज भी सांस लेती हैं. आर्टरीज का इलास्टिक की तरह होना ही उसकी सेहत का हाल बताता है. मुश्किल तब होती है जब धमनियों की यह लचकता कम होने लगती है. आर्टरीज की दीवारों के अंदर फाइबर्स होते हैं जो इसे खिंचने में मदद करते हैं, जब यह फाइबर्स कड़क होने लगते हैं तो दिक्कतें बढ़ जाती हैं. इन्हीं इलास्टिक फाइबर्स के कम होने से दिल में आगे चलकर होने वाली दिक्कतों का अंदाजा लगाया जा सकता है.
रिसर्चर्स के अनुसार, 20 से 30 साल की उम्र में भी आर्टरीज के ये फाइबर्स नष्ट हो सकते हैं. कॉलेस्ट्रोल की दिक्कत होने से पहले, ब्लड प्रेशर की दिक्कत से पहले और हार्ट अटैक (Heart Attack) आने से भी पहले ये फाइबर्स कम होने लगते हैं. इस तरह एक व्यक्ति दो उम्र के साथ जीता है. आप 60 वर्ष के हो सकते हैं लेकिन आपकी सेहत का ख्याल ना रखने पर आपकी आर्टरीज 80 साल की हो जाती हैं. एक जवान शरीर में कड़क आर्टरीज का मतलब है कि यह आने वाली बीमारी का संकेत है.
आर्टरीज की उम्र जानकर क्या होगा
आर्टरीज की उम्र का सालों पहले पता लगाना आगे आने वाली दिक्कतों की चेतावनी भर नहीं है बल्कि यह एक इलाज भी है. इससे कार्डियोवेस्कुलर दिक्कतों को लाइफस्टाइल से ही ठीक किया जा सकता है. इससे दिल की बीमारियों को पनपने से पहले और सर्जन के चक्कर लगाने से पहले या फिर उम्रभर की दवा शुरू होने से पहले ही मैनेज किया जा सकता है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.