Jharkhand Floor Test Latest Update : झारखंड में राजनीतिक संकट जारी है। चंपई सोरेन ने विधानसभा में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया। विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए चंपई सोरेन को 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। इसके लिए हैदराबाद से लौटे इंडिया गठबंधन के विधायक फ्लोर टेस्ट के लिए पहुंच गए हैं। वहीं, पूर्व सीएम हेमंत सोरेन भी विधानसभा पहुंचे। विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे पहले जेएमएम और कांग्रेस ने व्हिप जारी किया था।
झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने अपनी सरकार के शक्ति परीक्षण से पहले राज्य विधानसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हेमंत हैं तो हिम्मत है। हेमंत के कुशल नेतृत्व में झारखंड आगे बढ़ा। हेमंत सरकार ने एक-एक योजना से गरीबों को जोड़ा।
झारखंड में विधानसभा सदस्यों की संख्या 81 है। किसी भी पार्टी के पास बहुमत के लिए 41 विधायक चाहिए। झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने राज्य विधानसभा को संबोधित किया। झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि हमें निष्पक्ष तरीके से अपना कर्तव्य पूरा करना है और ऐसा किया गया है। हर लोकतांत्रिक मानदंड का सख्ती से पालन किया गया। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विधायकों के विरोध पर उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि उन्हें और परिपक्व होने की जरूरत है।
अब विधानसभा में चंपई सोरेन सरकार का फ्लोर टेस्ट हो रहा है। शपथ लेने से पहले चंपई सोरेन ने राज्यपाल को 42 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा था। अदालत ने फ्लोर टेस्ट में शामिल होने के लिए हेमंत सोरेन को भी अनुमति दे दी थी।
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जेएमएम और कांग्रेस के सभी 36 विधायक रविवार को ही रांची लौट आए थे। अब वे विधानसभा भी पहुंच गए हैं। जेएमएम के विधायक लोबिन हेम्ब्रोम पार्टी से नाराज चल रहे हैं। वे हैदराबाद भी नहीं गए थे, लेकिन उन्होंने चंपई सोरेन सरकार के सपोर्ट में वोट करने की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की वजह से कांग्रेस के कुछ विधायक झारखंड में रुके थे। आज पता चला जाएगा कि चंपई सोरेन की सरकार बहुमत साबित कर पाएगी या अल्पमत में गिर जाएगी।
बीजेपी का आरोप- चंपई सोरेन के पास नहीं है बहुमत
झारखंड बीजेपी ने कहा कि चंपई सोरेन के पास बहुमत नहीं है। जेएमम और कांग्रेस के कई विधायक नाराज चल रहे हैं। हालांकि, अबतक के आंकड़ों पर गौर करने से पता चलता है कि चंपई सोरेन सरकार फ्लोर टेस्ट में पास हो सकती है। इसके पीछे की वजह यह है कि हेमंत सोरेन की सरकार को 48 विधायकों को समर्थन प्राप्त था। अगर कुछ विधायक नाराज भी होते हैं तो भी उनके पास 41 MLAs हैं।