आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में उस वक्त हलचल मच गई, जब भारतीय मूल के तीन साइबर रिसर्चर्स ने प्रतिद्वंद्वी कंपनी एंथ्रोपिक के चैटबॉट ‘क्लॉड’ की मदद से दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनी OpenAI के सिस्टम में सुरक्षा खामी ढूंढ निकाली. यह पूरा मामला किसी अवैध हैकिंग का नहीं, बल्कि OpenAI के आधिकारिक ‘बग-बाउंटी’ कार्यक्रम का हिस्सा था. इस कारनामे को अंजाम देने वाले तीन शोधकर्ता हर्ष जायसवाल, मोहन पेधापति और राहुल मैनी हैं, जो साइबर सिक्योरिटी स्टार्टअप ‘हैक्ट्रॉन एआई’से जुड़े हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पहली खामी खोजने से लेकर प्राइवेट रिपॉजिटरी तक पहुंचने में टीम को 72 घंटे से भी कम समय लगा. इस पूरे प्रयोग में उन्होंने AI टोकन्स पर करीब 3,000 डॉलर (लगभग 2.5 लाख रुपये) खर्च किए.
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कौन हैं ये 3 भारतीय शोधकर्ता?
मोहन पेधापति (CTO और को-फाउंडर, Hacktron AI)
- मोहन पेधापति हैक्ट्रॉन एआई के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) और सह-संस्थापक हैं. वह वेब एक्सप्लॉइटेशन, सोर्स-कोड रिव्यू और मोबाइल ऐप्लिकेशन सिक्योरिटी के विशेषज्ञ हैं. हैक्ट्रॉन एआई से पहले उन्होंने इलेक्ट्रोवोल्ट इन्फोसेक की नींव रखी थी और क्योर53 में बतौर सिक्योरिटी कंसल्टेंट काम किया. इसके अलावा, उन्होंने आइगेन वेक्टर्स में डेटा साइंस इंटर्न के तौर पर स्पीच रिकग्निशन के लिए रिकरेंट न्यूरल नेटवर्क पर भी काम किया है. मोहन ने साल 2013 से 2015 के बीच आंध्र प्रदेश के ZPPHS संपतनगर हाई स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने RGUKT नुजविद (RGUKT Nuzvid) से 2015 से 2021 के दौरान कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की.
हर्ष जायसवाल (को-फाउंडर, Hacktron AI)
- हर्ष जायसवाल हैक्ट्रॉन एआई के को-फाउंडर और सीनियर वल्नेरेबिलिटी रिसर्चर हैं. उनके पास सिस्टम में तकनीकी खामियां और सुरक्षा लूपहोल्स खोजने का 10 साल से अधिक का लंबा अनुभव है. हर्ष जायसवाल प्रोजेक्ट डिस्कवरी, जोमैटो और क्योर53 जैसी जानी-मानी कंपनियों में सिक्योरिटी इंजीनियर और रिसर्चर रह चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने हैकरवन के साथ बग-बाउंटी रिसर्चर के तौर पर काम करते हुए ऐपल, पेपाल और गिटहब जैसी वैश्विक कंपनियों के उत्पादों और प्लेटफॉर्म्स में खामियां उजागर की हैं. वह पूर्व में राहुल मैनी के साथ भी सुरक्षा रिसर्च पर काम कर चुके हैं.
राहुल मैनी (वल्नेरेबिलिटी रिसर्चर, Hacktron AI)
- राहुल मैनी हैक्ट्रॉन एआई में वल्नेरेबिलिटी रिसर्चर के पद पर कार्यरत हैं और बग-बाउंटी कम्युनिटी में एक भरोसेमंद नाम हैं. राहुल कोबाल्ट, सिनैक रेड टीम, हैकरवन और बगक्राउड जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर कोर पेनटेस्टर्स और बग हंटर के रूप में सक्रिय रहे हैं. उन्हें एटीएंडटी हॉल ऑफ फेम में जगह मिल चुकी है. इसके अलावा उन्हें बगक्राउड कम्युनिटी अवॉर्ड और टीसीएस हैकक्वेस्ट 3.0 में फर्स्ट रनर-अप का खिताब भी मिल चुका है.राहुल ने 2015 से 2019 के बीच दिल्ली स्थित भारती विद्यापीठ से कंप्यूटर साइंस में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है.
कैसे हुआ यह टेस्ट?
रिसर्चर्स की टीम ने सबसे पहले OpenAI के पब्लिक कम्युनिटी फोरम में एक तकनीकी खामी खोजी. यह खामी इमेज फाइल्स को प्रोसेस करने के तरीके से जुड़ी थी, जिससे सर्वर पर कोड रन कराया जा सकता था. इसके बाद टीम ने एंथ्रोपिक के AI टूल क्लॉड की मदद ली. क्लॉड ने कोड लिखने, डिबग करने और इस खामी को टेस्ट करने वाले एक्सप्लॉइट को तेजी से तैयार करने में मदद की. इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए टीम ने कर्मचारियों के अकाउंट्स और फिर एक कर्मचारी के कोडेक्स अकाउंट के जरिए OpenAI के प्राइवेट गिटहब रिपॉजिटरी तक अपनी पहुंच बना ली. हालांकि, रिसर्चर्स ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग खामियों को जोड़ने और रणनीति बनाने का काम इंसानी दिमाग ने ही किया, जबकि क्लॉड ने एक सहायक की तरह काम की गति को कई गुना बढ़ा दिया.
कंपनी ने दिया इनाम
जैसे ही इस खतरे की जानकारी सामने आई, OpenAI ने तुरंत सिस्टम को सुरक्षित किया और सभी खामियों को फिक्स कर दिया. कंपनी ने शोधकर्ताओं की इस खोज की सराहना करते हुए उन्हें 6,500 डॉलर (करीब 5.5 लाख रुपये) का बग बाउंटी रिवॉर्ड दिया.
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