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फोटो असली है या AI? ChatGPT और Gemini से अब मिनटों में लगेगा पता

अब AI से बनी नकली तस्वीरों की तुरंत पहचान होगी. OpenAI और Google ने नए टूल्स लॉन्च किए हैं, जानिए कैसे पकड़ी जाएगी फर्जी फोटो.

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अब नहीं चलेगी AI फोटो की चालाकी! ऐसे मिनटों में पकड़ें नकली तस्वीर. (AI Generated Image)

How To Identify AI Photo: सोशल मीडिया पर आजकल ऐसी तस्वीरें तेजी से वायरल होती हैं जिन्हें देखकर असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है. कभी किसी सेलिब्रिटी की फर्जी फोटो लोगों को चौंका देती है तो कभी किसी हादसे या राजनीतिक घटना की AI से बनाई गई तस्वीर इंटरनेट पर भ्रम फैला देती है. कई लोग बिना जांच किए इन्हें शेयर भी कर देते हैं. यही वजह है कि अब Google और OpenAI जैसी बड़ी टेक कंपनियां ऐसे टूल्स ला रही हैं जिनकी मदद से AI से बनी तस्वीरों की पहचान करना आसान हो सकेगा. हालांकि AI इमेज पहले से काफी एडवांस हो चुकी हैं, लेकिन उनमें अब भी कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां रह जाती हैं जो उनकी सच्चाई उजागर कर देती हैं.

AI फोटो में कहां दिखती हैं गड़बड़ियां?

अगर किसी तस्वीर को ध्यान से देखा जाए या जूम किया जाए, तो कई बार उसमें अजीब चीजें नजर आती हैं. जैसे हाथों की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी दिखना, दांतों का असामान्य आकार, कान की बालियों का गलत डिजाइन या चश्मे का अजीब दिखना. कई तस्वीरों में बैकग्राउंड पर लिखा टेक्स्ट समझ नहीं आता या लोगों के चेहरे एक जैसे लगते हैं. इसके अलावा लाइट और शैडो भी कई बार सही दिशा में नहीं होते, जिससे शक पैदा होता है कि तस्वीर AI से बनाई गई है.

OpenAI और Gemini कैसे करते हैं पहचान?

OpenAI ने एक नया इमेज वेरिफिकेशन सिस्टम पेश किया है. इसकी मदद से यूजर यह जांच सकते हैं कि कोई तस्वीर AI से बनाई गई है या एडिट की गई है. इसके लिए यूजर को अपने फोन या कंप्यूटर में OpenAI का इमेज वेरिफिकेशन टूल खोलना होगा और वहां तस्वीर अपलोड करनी होगी. इसके बाद सिस्टम फोटो को स्कैन करके उसमें मौजूद AI मार्कर और डिजिटल संकेतों की जांच करता है. जांच पूरी होने के बाद यह बताया जाता है कि तस्वीर AI टूल से बनाई गई है या नहीं.

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इसी तरह Google Gemini भी अब SynthID तकनीक की मदद से AI इमेज की पहचान करने में सहायता कर रहा है. यूजर Gemini ऐप में तस्वीर अपलोड करके पूछ सकते हैं कि फोटो असली है या AI से तैयार की गई है.

Photo-AI Generated

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नया वेरिफिकेशन टूल कैसे काम करता है?

OpenAI का नया टूल मुख्य रूप से दो तकनीकों के आधार पर काम करता है. पहला है SynthID वॉटरमार्क और दूसरा C2PA नाम का ओपन स्टैंडर्ड. C2PA किसी AI तस्वीर की मेटाडेटा जानकारी में खास संकेत जोड़ता है, जिससे यह समझना आसान हो जाता है कि तस्वीर AI से बनी है. फिलहाल यह सिस्टम ChatGPT, OpenAI API और Codex से तैयार की गई तस्वीरों की पहचान करने में सक्षम है. कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में इसे दूसरे AI प्लेटफॉर्म्स तक भी बढ़ाया जाएगा.

डीपफेक के बढ़ते खतरे पर बड़ा कदम

AI टूल्स अब इतने एडवांस हो चुके हैं कि इंटरनेट पर नकली और असली तस्वीरों में फर्क करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है. डीपफेक तस्वीरें और वीडियो लोगों को गुमराह करने का बड़ा जरिया बनते जा रहे हैं. ऐसे में OpenAI और Google का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है. इससे फर्जी तस्वीरों और गलत जानकारी के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है.

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कंपनी के मुताबिक, SynthID वॉटरमार्क स्क्रीनशॉट लेने, फोटो रिसाइज करने या एडिट करने के बाद भी बना रह सकता है. वहीं मेटाडेटा अतिरिक्त जानकारी देता है. इन दोनों तकनीकों का एक साथ इस्तेमाल सुरक्षा को और मजबूत बनाता है.

C2PA और SynthID में क्या फर्क है?

C2PA एक गैर-लाभकारी संगठन है जिसकी शुरुआत 2021 में की गई थी. इसका मकसद AI से बनने वाली भ्रामक तस्वीरों के असर को कम करना है. यह सिस्टम फोटो की मेटाडेटा जानकारी में संकेत जोड़ता है, हालांकि इसे बदला भी जा सकता है.

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वहीं SynthID को Google DeepMind ने तैयार किया है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि तस्वीर को एडिट करने, रिसाइज करने या स्क्रीनशॉट लेने के बाद भी इसका वॉटरमार्क बना रहे.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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