21वीं सदी में महिलाएं लगभग हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं, चाहे वो बिजनेस करना हो या चांद पर जाना हो. भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं जॉब करती हैं और अपने परिवार का खर्च भी उठा रही हैं. हालांकि हाल ही में पहली बार सामने आए जिलावार रोजगार आंकड़ों ने जो तस्वीर दिखाई, उसने सभी को हैरान कर दिया. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से शुक्रवार को जारी जिला स्तरीय श्रम बाजार अनुमानों में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी में राज्यों और जिलों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया है.
देश में महिलाओं का श्रम बल भागीदारी दर कितना?
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के करीब 57.8 प्रतिशत जिलों में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 40 प्रतिशत या उससे अधिक रही. आपको बता दें कि रोजगार के यह आंकड़े पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के तहत जारी किए गए हैं. पहली बार इस स्तर पर जिलावार श्रम बल भागीदारी दर, वर्कर पॉपुलेशन रेशो (WPR), बेरोजगारी दर और NEET से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं. NEET में 15 से 29 वर्ष की उम्र के वे युवा शामिल हैं, जो न रोजगार में हैं, न शिक्षा ले रहे हैं और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं.
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कहां है महिलाओं की श्रम भागीदारी सबसे ज्यादा और सबसे कम?
सर्वे के मुताबिक प्रमुख जिलों में गुजरात का सूरत कुल श्रम बल भागीदारी दर के मामले में सबसे आगे रहा. यहां LFPR 68.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि श्रमिक जनसंख्या अनुपात 67.8 प्रतिशत रहा. इसके बाद बिहार के अररिया और तमिलनाडु के सलेम का स्थान रहा. वहीं, बिहार के दरभंगा में इन दोनों मानकों पर सबसे निचले स्तर के आंकड़े दर्ज किए गए. देश के करीब 98 प्रतिशत जिलों में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी के लिए LFPR और WPR 40 से 80 प्रतिशत के दायरे में रहे.
महिलाओं की भागीदारी में बड़ा अंतर
महिला श्रम भागीदारी के आंकड़े जिलों के बीच काफी अलग तस्वीर दिखाते हैं. हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में महिला LFPR सबसे अधिक 80.9 प्रतिशत दर्ज की गई. इसके बाद ओडिशा के मयूरभंज में 71.8 प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर के बडगाम में 71.4 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ के सरगुजा में 69 प्रतिशत महिला LFPR रही. इसके उलट पूर्वी दिल्ली में महिला LFPR 18.9 प्रतिशत दर्ज की गई. बिहार के सीवान में यह 24.7 प्रतिशत और पंजाब के पटियाला में 39.3 प्रतिशत रही. इससे साफ होता है कि महिलाओं की रोजगार और श्रम बाजार में भागीदारी जिलों के स्तर पर काफी असमान है.
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