अमेरिका ने ईरान के ‘पीस प्लान’ को एक झटके में ठुकरा दिया है. ईरान के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए अमेरिका गए हुए हैं. उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट दोबारा से खोलने के लिए अमेरिका के सामने तीन शर्तें रखी थीं. ईरान ने अपनी प्रस्ताव कतर के जरिए भिजवाया था. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप को ईरान का प्रस्ताव नहीं समझ आया और ठुकरा दिया. अमेरिका का कहना है कि ईरान इसलिए डील चाहता है, क्योंकि वो हार रहे हैं. इसके बाद ईरान के विदेश मंत्री ने बयान जारी करके कहा कि हम यहां जंग का सौदा करने नहीं, बल्कि उसे रोकने आए थे. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका चाहता है तो हम कयामत तक लड़ने के लिए तैयार हैं.
ट्रंप ने क्यों ठुकराया पीस प्लान?
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज का कहना है कि तेहरान ने बातचीत की मेज पर लौटने के बदले बहुत ज्यादा रियायतें मांगी थीं. NBC न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान ने फिर बातचीत शुरू करने के लिए ही बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और बैन में ढील जैसी कई मांगें पहले ही रख दीं. साथ ही उन्होंने कहा कि लेकिन ट्रंप को तेहरान पर अपने वादों पर कायम रहने का भरोसा नहीं है.
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही चालाकी भरी कोशिश थी कि ऐसी बात रखी जाए जिसके बारे में उन्हें पता था कि वह मंजूर नहीं होगी. मुझे लगता है कि पहले हमारी बातचीत की कोशिश के बाद इस बार राष्ट्रपति को ईरान पर ज्यादा भरोसा नहीं है. हालांकि, उनका भी मानना है कि इसका अंतर किसी न किसी तरह समझौते से ही होना चाहिए और उसके लिए वह सभी विकल्प खुले रखेंगे.’
ईरान ने क्या कहा?
पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पीस प्लान का ऐलान किया था. इसके लिए ईरान ने तीन शर्तें रखी थीं. उनमें ईरान की जब्त संपत्ति जारी करना, ईरान पर लगे बैन हटाना और होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी की नाकेबंदी खत्म करना शामिल था.
अमेरिका की ओर से प्रस्ताव को ठुकराए जाने के कुछ ही समय बाद एनबीसी पर बोलते हुए ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिकी राजनयिक द्वारा लगाए गए आरोपों को पुराने और बिना सबूत वाले बताकर खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका कुछ कदम उठाए तो हम होर्मुज खोलने के लिए तैयार हैं.
साथ ही उन्होंने ईरान की ओर से प्रस्ताव में रखी गईं शर्तों पर कहा कि ये हमारे अधिकार हैं और हम चाहते हैं कि इनका सम्मान किया जाए.
इसके अलावा उन्होंने कहा, ‘कूटनीति की उम्मीद हमेशा बनी रहती है. लेकिन हमारे पास कूटनीति की ओर लौटने और इस प्रशासन के साथ फिर से जुड़ने की कोई वजह नहीं दिख रही है. पिछले दो सालों में उनका व्यवहार खराब रहा है.’
अब क्या होगा?
ईरान के पीस प्लान को ठुकराने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने Axios को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले हफ्ते में बातचीत फिर से शुरू होगी. उन्होंने कहा, ‘हम समझौता करना चाहते हैं, लेकिन यह वह समझौता नहीं है जो मैं करना चाहता हूं. यह शायद वह समझौता है जिस पर हम एक साल पहले सहमत हो सकते थे. ईरान ने अपनी स्थिति का गलत आकलन किया.’
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अमेरिका के मिड ट्रम इलेक्शन के बाद डोनाल्ड ट्रंप दोबारा से ईरान पर बमबारी करने का प्लान बना रहे हैं.
अब क्या करेगा ईरान?
पिछले करीब सात महीने से जारी जंग की वजह से ना केवल ईरान को नुकसान हुआ है, बल्कि ग्लोबल इकॉनमी पर भी असर हुआ है. इस जंग की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित अहम समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट हुआ है. यह रूट ग्लोबल इकॉनमी के लिए बहुत जरूरी है. लेकिन अभी यहां से आवाजाही बंद है. इस रूट के जरिए ग्लोबल एनर्जी करीब 20 फीसदी हिस्सा सप्लाई होता है, जो कि अभी प्रभावित है. इसकी वजह से भारत समेत कई एशियाई देशों पर इसका असर देखने को मिल रहा है. ईरान भी अपना तेल नहीं बेच पा रहा है. ऐसे में ईरान भी चाहता है कि इस रास्ते को जल्द से जल्द खोला जाए, जिसके लिए ईरान ने अमेरिका के सामने शर्तें रखी थीं.
अमेरिका के प्रस्ताव ठुकराने के बाद बेशक ईरान के तेवर तीखे ही नजर आए. ईरान ने कहा कि अमेरिका चाहे तो वो कयामत तक जंग लड़ने के लिए तैयार है. लेकिन ईरान भी चाहता है कि होर्मुज जल्द से जल्द दोबारा से खुले. इसके लिए ईरान दोबारा से मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को मनाने की कोशिश कर सकता है. वहीं, कतर जैसे मध्यस्थ पहले से ही अमेरिका और ईरान में सुलह कराने की कोशिश में लगे हुई हैं.