मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान युद्ध आखिर कब खत्म होगा? ईरान ने कूटनीति का रास्ता अपनाते हुए जंग खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने की पहल की, जिसके लिए ईरान ने अमेरिका के सामने 7 शर्तों के साथ शांति प्रस्ताव रखा. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रस्ताव ठुकरा दिया और यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली में अपने भाषण में ईरान को बर्बाद कर देने की धमकी दी. इसका दोटूक जवाब देते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने इरादे स्पष्ट किए और बताया कि ईरान कूटनीति के लिए तैयार हैं और वे राष्ट्रपति पेजेश्कियान के साथ शांति का रास्ता बनाने के लिए अमेरिका आए थे.
युद्ध और शांति को लेकर साफ किए इरादे
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को जवाब देते हुए अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान युद्ध को बेचने के लिए ईरान नहीं आया था, बल्कि शांति का रास्ता बनाने के लिए आया था और वह कूटनीति से युद्ध खत्म करने के लिए तैयार है. राष्ट्रपति ट्रंप एक ओर होर्मुज स्ट्रेट खोलने वाले प्रस्ताव को ठुकरा रहे हैं, दूसरी ओर आगे शांति वार्ता होने की उम्मीद जता रहे हैं. ईरान जंग नहीं शांति चाहता है और कूटनीति का रास्ता तलाश रहा है. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया तो पूरी दुनिया को समझ लेना चाहिए कि आखिर राष्ट्रपति ट्रंप क्या चाहते हैं और दुनिया पर उनके रवैये का क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका के रवैये पर भी स्पष्ट किया रुख
अब्बास अराघची ने साफ-साफ शब्दों में यह भी कहा कि ईरान अब अमेरिका की हर आक्रामकता का जवाब आक्रामक तरीके से ही देगा, बेशक मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात ‘एपोकैलिप्टिक वॉर’ तक ही क्यों न पहुंच जाएं. कूटनीति के लिए भी तैयार हैं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप चाहें तो होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और लड़ाई रोकने के लिए 7 दिन का काउंटडाउन शुरू कर सकते हैं. अगर अमेरिका समझौता करने के लिए राजी हैं और इसे लागू करने का वादा करते हैं तो दोनों देशों के बीच आपसी सहमति वाले मुद्दों पर बातचीत शुरू हो सकती है, लेकिन अगर अमेरिका नहीं चाहता तो ईरान भी मजबूर है.
अमेरिका के औपचारिक जवाब का इंतजार
अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को तभी खोला जाएगा, जब ईरान की शर्तें अमेरिका पूरी करेगा. हालांकि मध्यस्थों ने अभी तक अमेरिका के शांति प्रस्ताव को खारिज करने की औपचारिक जानकारी नहीं दी है. इसलिए ईरान अंतिम जवाब का इंतजार कर रहा है और औपचारिक जवाब मिलने के बाद ही आगे का फैसला लेगा. परमाणु कार्यक्रम समेत दूसरे मुद्दों पर बातचीत कर सकते हैं, लेकिन दबाव या धमकी बर्दाश्त नहीं करेंगे. ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन दबाव, धमकियों और हमलों से बचाव करेगा. अब सबसे अहम मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट है, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध गहरा गया है.