अमेरिका अगर ईरान में उतार दे सैनिक, तो तेहरान के पास क्या है जवाब? जमीनी जंग हुई तो बदल जाएगा पूरा समीकरण

ईरान में अमेरिकी सैनिकों की एंट्री सिर्फ दो देशों के बीच सैन्य टकराव नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है. जिसके चलते अन्य देश भी अमेरिका पर पीछे हटने का दबाव बना सकते हैं.

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ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी है जंग (Photo: AI/NEWS24)

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष में अब जमीनी स्तर पर सैन्य टकराई की संभावना बढ़ने लगी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका हवाई हमलों के बाद अपने सैनिकों को ईरानी जमीन पर उतारने का फैसला करेगा? डोनाल्ड ट्रंप सरकार के संभावित सैन्य हमले के खिलाफ ईरान ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है और कई स्थानों पर 4,20,000 सैनिक तैनात कर भी दिए हैं. हालांकि अमेरिका की तरफ से अभी ईरान पर जमीनी हमले का ऐलान नहीं किया गया है. लेकिन अमेरिकी रक्षा विभाग सीमित ग्राउंड ऑपरेशन के विकल्पों पर तैयारी कर चुका है.

खार्ग आइलैंड पर क्यों है अमेरिका की नजर?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के प्लान में खार्ग द्वीप पर कब्जा, होर्मुज के आसपास सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई और परमाणु संयंत्रों पर कंट्रोल शामिल है. खार्ग द्वीप अमेरिका के लिए इस वजह से महत्वपूर्ण है क्योंकि फारस की खाड़ी में स्थित ये आईलैंड ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम है. अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार ईरान के करीब 90 प्रतिशत तेल निर्यात की आवाजाही इसी इलाके से होती है. अमेरिका पहले ही खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को निशाना बना चुका है, हालांकि तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान से बचाने की बात कही गई थी.

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अगर अमेरिकी सैनिक यहां उतरते हैं तो उन्हें ईरानी ड्रोन, मिसाइल, बारूदी सुरंगों और तटीय हमलों का सामना करना पड़ सकता है. सबसे बड़ी चुनौती द्वीप पर कब्जा करने के बाद वहां मौजूद सैनिकों तक लगातार हथियार, ईंधन और अन्य जरूरी सामान पहुंचाना होगी.

ईरान के पास क्या है जवाब?

ईरान के लिए अमेरिकी सैनिकों का जमीन पर उतरना युद्ध में एक अहम मोड़ होगा. ईरानी सेना के पास बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन, तटीय मिसाइल और सुपरफास्ट बोट का बड़ा नेटवर्क है. होर्मुज में ईरान काफी मजबूत स्थिति में है क्योंकि यहां मौजूद सैन्य ठिकानों से वह समुद्री यातायात को प्रभावित करने की ताकत रखता है. बताया जा रहा है कि अमेरिका ने खार्ग द्वीप के अलावा केश्म और लारक जैसे द्वीपों के आसपास कार्रवाई का भी ऑप्शन रखा है. इन इलाकों में मिसाइल, रडार और समुद्री हमले से जुड़े सैन्य ढांचे मौजूद हैं. ऐसे में किसी द्वीप पर कब्जा करना बड़ी बात होगी, लेकिन उसे लंबे समय तक अपने कंट्रोल में बनाए रखना कहीं ज्यादा मुश्किल हो सकता है.

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जमीनी युद्ध हुआ तो बढ़ेगा खतरा

अमेरिका के लिए ईरान को इराक या अफगानिस्तान समझना बड़ी गलती होगी, क्योंकि तेहरान सैन्य ताकत के मामले में ट्रंप की सेना को कड़ी टक्कर दे सकता है. ईरान का बड़ा भूगोल, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय सहयोगी नेटवर्क अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा होर्मुज में तनाव बढ़ने का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है. इसलिए ईरान में अमेरिकी सैनिकों की एंट्री सिर्फ दो देशों के बीच सैन्य टकराव नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है. जिसके चलते अन्य देश भी अमेरिका पर पीछे हटने का दबाव बना सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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