Graduate and Teacher Constituencies: भारत में, कुछ राज्यों में विधान परिषद होती है, जिसके चुने गए सदस्यों को एमएलसी कहा जाता है. लोकसभा या विधानसभा चुनावों के उलट, जहां सभी एलिजिबल बालिग वोटर्स वोट डाल सकते हैं, विधान परिषद चुनावों में मतदाताओं की अलग-अलग कैटेगरी होती हैं, जिनमें स्नातक (ग्रेजुएट) और शिक्षक (टीचर) शामिल हैं.
स्नातक सीट का क्या मतलब है?
ग्रेजुएट कॉन्सट्यूएंसी एक खास चुनावी क्षेत्र होता है, जहां एलिजिबल और रजिस्टर्ड ग्रेजुएट ही एमएलसी को चुनने के लिए वोट डाल सकते हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता बनने के लिए, किसी भी शख्स को आमतौर पर कुछ अहम शर्तों को पूरा करना होता है, जैसे- वो भारत का नागरिक हो और आम तौर पर उसी निर्वाचन क्षेत्र में रहता हो. उसके पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी की डिग्री (या इसके समकक्ष कोई योग्यता) हो, जो निर्धारित तारीख से कम से कम 3 साल पहले हासिल की गई हो. उसे ग्रेजुएट कॉन्सट्यूएंसी की वोटर लिस्ट में अलग से रजिस्टर कराना होता है.
शिक्षक सीट का क्या मतलब है?
टीचर कॉन्सट्यूएंसी एक ऐसा चुनावी क्षेत्र होता है, जहां एलिजिबल शिक्षक एमएलसी को चुनने के लिए वोट डालते हैं.इसके लिए आमतौर पर कुछ अहम शर्तें होती हैं, जैसे- वो शख्स आम तौर पर उसी निर्वाचन क्षेत्र का निवासी हो. उसने निर्धारित तारीख से ठीक पहले के 6 साल के दौरान, कम से कम 3 साल तक टीचर के तौर पर काम किया हो. वो किसी ऐसे मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान में पढ़ा रहा हो, जो सेकेंडरी स्कूल या उससे ऊपर का हो.
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ग्रेजुएट और टीचर सीट क्यों बनाई गई थी?
ग्रेजुएट हायर एजुकेशन और पेशेवर जिंदगी से जुड़े नजरिए लाते हैं, जबकि टीचर एजुकेशन से जुड़े मुद्दों, स्कूलों और शिक्षक समुदाय का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत MLC की तकरीबन 1/12 सीटें स्नातकों की तरफ से चुनी जाती हैं, वहीं लगभग 1/12 सीटें शिक्षक चुनते हैं. आसान शब्दों में कहें तो, ‘स्नातक’ और ‘शिक्षक’ निर्वाचन क्षेत्रों का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि राज्य विधान परिषद में शिक्षित नागरिकों और शिक्षक समुदाय को प्रतिनिधित्व का एक स्पेशल जरिया मिल सके.
MLC चुनाव 2026 के नतीजे क्या रहे?
यूपी, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में 28 विधान परिषद सीटों के लिए अक्टूबर 2026 के चुनावों ने एनडीए को बड़ी जीत दिलाई. बीजेपी और उसके सहयोगियों ने 16 सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 5 सीटें हासिल कीं. कांग्रेस सिर्फ एक जीत हासिल कर पाई, महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में, जहां अभिजीत वंजारी ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले को हराया. कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने सभी 4 सीटों पर कब्जा कर लिया. बिहार में बड़े उलटफेर हुए, जन सुराज ने अपना खाता खोला और आरजेडी ने एक अनुभवी भाजपा एमएलसी को हरा दिया.
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