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2025 में 7717 वोट, 2026 में 63 हजार पार… बांकीपुर में कैसे चला PK का मास्टरस्ट्रोक; जानिए- क्यों BJP गढ़ बचाने में रही नाकाम

बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में करीब 35 फीसदी मतदान हुआ था. वहीं, साल 2025 के विधानसभा चुनाव में यहां 41.35 फीसदी वोटिंग हुई थी.

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तीन दशक के बाद भाजपा को उसके गढ़ में करारी हार मिली है. बदलाव की ऐसी हवा चली, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नितिन नवीन की सीट बांकीपुर ही उड़ गई. भाजपा को उसके गढ़ में शिकस्त दी है प्रशांत किशोर ने. भाजपा के नीरज कुमार इस सीट पर दूसरे नंबर पर रहे. बांकीपुर सीट से 25 उम्मीदवार मैदान में थे. प्रशांत किशोर को कुल 63203 वोट मिले हैं. दूसरे नबंर पर रहे भाजपा के नीरज कुमार को 44250 वोट मिले. वहीं, राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा कुमारी को उम्मीदवार बनाया था, जो तीसरे नंबर पर रहीं. रेखा कुमारी को कुल 14085 वोट मिले हैं.

पटना के शहरी इलाके में मौजूद बांकीपुर सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है. इस सीट से भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन विधायक थे. भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन ने ये सीट छोड़ दी थी, जिसके बाद यहां उपचुनाव कराए गए हैं. नितिन नवीन अब राज्यसभा सांसद हैं.

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बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में करीब 35 फीसदी मतदान हुआ था. वहीं, साल 2025 के विधानसभा चुनाव में यहां 41.35 फीसदी वोटिंग हुई थी. 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन 98299 वोट मिले थे, तो दूसरे नंबर पर रहीं राष्ट्रीय जनता दल की रेखा कुमारी को 46363 वोट मिले थे. 2025 के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने वंदना कुमारी को बांकीपुर से उम्मीदवार बनाया था. वंदना कुमारी को उस वक्त मात्र 7717 वोट मिले थे.

अब सवाल यह है कि आखिर केंद्र और बिहार दोनों जगह भाजपा की सरकार है. फिर भी भाजपा अध्यक्ष अपनी ही सीट जितवाने में नाकाम कैसे रहे. इसके अलावा 2025 के विधानसभा चुनाव में जिस पार्टी को मात्र 7717 वोट मिले थे, आखिर उसने इस बार कैसे भाजपा को पटखनी दे दी.

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नीट छात्र आंदोलन का असर – इस चुनाव में छात्र आंदोलन का भी असर देखने को मिला. नीट यूजी पेपर लीक को लेकर छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया था. धीरे-धीरे ये प्रदर्शन दूसरे राज्यों समेत बिहार पहुंच गया था. दिल्ली समेत बिहार में भी पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया था. हालांकि, आखिर में सरकार को छात्रों की मांगें मानी पड़ी. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.

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भरत तिवारी एनकाउंटर – इस चुनाव में बिहार में हाल ही में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर की भी खूब चर्चा सुनने को मिली. भरत भूषण का 17 जून 2026 में बिहार के भोजपुर जिले में कथित एनकाउंटर कर दिया गया था. इस एनकाउंटर को लेकर बिहार में काफी विरोध प्रदर्शन हुए थे. जिसके बाद कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच भी शुरू की गई हैं. वहीं, चुनाव में लोगों के बीच इस एनकाउंटर को लेकर गुस्सा भी देखने को मिला.

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भाजपा का ओवर कॉन्फिडेंस – भाजपा को इस सीट को लेकर ओवर कॉन्फिडेंस था. इसी वजह से भाजपा के हाथ से उसका गढ़ बांकीपुर भी चला गया. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ पूरा बिहार कैबिनेट बांकीपुर के कैंप किया हुआ था. लेकिन भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन अपनी विरासत नहीं बचा पाए.

विपक्ष लगभग गायब रहा- कांग्रेस दौड़ में शामिल नहीं थी, वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने भी गंभीरता से इस चुनाव को नहीं लड़ा था. चुनाव प्रचार के आखिरी के दो दिन प्रचार करने आए थे. ऐसे में नतीजा ये हुआ था विपक्ष पूरा वोट प्रशांत किशोर को ट्रांसफर हो गया.

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जाति का नहीं दिखा असर – पहली बार बिहार के किसी चुनाव में जाति का कोई जोर नहीं रहा. जाति-पाती को दरकिनार कर लोगों ने प्रशांत किशोर को वोट किया. वहीं, नितिन नवीन और भाजपा ओवर कॉन्फिडेंस में रहे.

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उम्मीदवार पर कंफ्यूजन – भाजपा शुरू से अपने उम्मीदवार को लेकर कंफ्यूज रही. पहले अभिषेक बंटी को टिकट दिया गया. इसके बाद उम्मीदवार बदलकर नीरज को मैदान में उतारा गया. प्रशांत किशोर लोगों को यह बताने में सफल रहे कि भाजपा किसी को भी टिकट देकर नहीं जीता सकती है.

प्रशांत किशोर की अपील – प्रशांत किशोर काफी समय से बिहार में घूम-घूम कर आमजन के मुद्दे उठा रहे हैं. प्रशांत किशोर जिस तरह के मुद्दे उठा रहे हैं, उन्होंने जनता को अपील किया. प्रशांत किशोर को खुद इस चुनाव में खूब मेहनत करते देखा गया.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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