बिहार, मध्यप्रदेश और गुजरात की तीन सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा केवल एक सीट पर जीत हासिल कर पाई. इन चुनावों में 30 साल से गढ़ रही बिहार की बांकीपुर सीट को भी भाजपा नहीं बचा पाई. वहीं, मध्य प्रदेश की दतिया सीट को भी भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा का गढ़ माना जाता है. वहां भी कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत हासिल की है. बिहार और गुजरात दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार है. आमतौर पर देखा जाता है कि उपचुनाव में ज्यादातर वही पार्टी जीतती है, जिसकी सरकार होती है. लेकिन इन चुनाव में नतीजे विपरीत देखने को मिले. हालांकि, गुजरात की मंजालपुर विधानसभा सीट पर कब्जा करने में भाजपा कामयाब हुई है. लेकिन दतिया और बांकीपुर की हार भाजपा के लिए बड़ी है.

बांकीपुर में क्या रहा BJP का हाल?

9 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बांकीपुर सीट करीब 50,000 से ज्यादा वोटों से जीती थी. इस बार भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार 19324 वोटों से उस पार्टी से पीछे रह गए, जिस पार्टी को 2025 के विधानसभा चुनाव में करीब मात्र 7700 वोट मिले थे.

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RJD की वजह से हुआ खेला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरजेडी ने अपने वोट प्रशांत किशोर की तरफ ट्रांसफर कर दिए. तेजस्वी यादव ने सिर्फ एक घंटे के लिए प्रचार किया था. 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता को 46,000 से ज्यादा वोट मिले थे, इस बार उन्हें 15,000 वोट भी नहीं मिल पाए. वहीं, कांग्रेस तो इस पूरे खेल से नदारद ही दिखी. भाजपा का मुख्य वोट बैंक भी पार्टी से छिटकते हुए दिखाई दिया.

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कहां हुई BJP से चूक?

भाजपा ने इस सीट पर आखिरी वक्त में अपना उम्मीदवार बदल दिया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के इस कदम से वोटरों के बीच मैसेज गया कि भाजपा उन्हें हल्के में लेती हैं. वहीं, भाजपा ने इस सीट पर प्रचार की जिम्मेदारी स्थानीय नेताओं को सौंपी थी. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस निर्वाचन क्षेत्र का चार बार दौरा किया था, क्योंकि यह उनकी पारंपरिक सीट है. इसकी सीधा मैसेज जाता है कि पार्टी ओवर कॉन्फिडेंस में थी. इसके अलावा इस सीट के नतीजों पर NEET पेपर लीक प्रदर्शन और भरत तिवारी एनकाउंटर जैसे मुद्दों का भी असर देखने को मिला.

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दतिया सीट के क्या रहे नतीजे

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक नरोत्तम मिश्रा का गढ़ माने जाने वाली दतिया सीट भी भाजपा हार गईं. यहां कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने 66757 वोटों के साथ जीत हासिल की है. वहीं, दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के आशुतोष तिवारी को 60741 वोट मिले.

दतिया में हार की क्या वजह?

इस हार का ठीकरा नरोत्तम मिश्रा पर फूटता नजर आ रहा है. नरोत्तम मिश्रा इस सीट से तीन बार चुनाव जीत चुके हैं. उपचुनाव में उन्हें भाजपा ने उम्मीदवार नहीं बनाया था, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी. उनके समर्थकों ने पार्टी के इस फैसले का विरोध किया था. बाद में उन्होंने पार्टी नेतृत्व के कहने पर आशुतोष तिवारी के लिए प्रचार भी किया था. लेकिन उसका कोई फायदा नहीं दिखा, नरोत्तम मिश्रा के स्थानीय पोलिंग बूथ पर भी भाजपा हार गईं.

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भाजपा को क्या मिली सीख

इन चुनाव के नतीजों में नीट-पेपर लीक को लेकर हुए छात्र प्रदर्शन का भी असर देखने को मिलता है. एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में भाजपा के अंदरुनी नेताओं के हवाले से लिखा है कि भाजपा को बुनियादी मुद्दों को हल करने के लिए तैयार होना होगा. साथ ही उन्होंने यह भी माना कि कहीं ना कहीं पार्टी से बांकीपुर और दतिया में उम्मीदवार चुनने में भी चूक हुई है. आने वाले समय में सरकार और पार्टी संगठन दोनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. इसके साथ ही पार्टी नेताओं ने कहा कि पार्टी इस हार का आत्म-मंथन करेगी.