अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह महीने से जंग जारी है. जंग को खत्म करने के लेकर दोनों देशों में बातचीत भी हुई थी, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाई. अमेरिका ने हाल ही बुधवार को ईरान पर फिर हमला किया था. इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें बरसाईं. इस जंग में जिस ईरानी हथियार की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है ‘खैबर शिकन’ मिसाइल. फारसी में खैबर शिकन का मतलब होता है, कैसल ब्रेकर यानि किला ध्वस्त करने वाली.
कितनी ताकतवर खैबर शिकन मिसाइल?
खैबर शिकन एक मीडियम रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल है. इसे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एयरोस्पेस विंग ने बनाया है. यह करीब 1500 किलोमीटर दूर जाकर टारगेट को नेस्तनाबूद कर सकती है. यह मिसाइल अपने साथ करीब 500 किलोग्राम विस्फोटक वॉरहेड ले जा सकती है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका सॉलिड-फ्यूल इंजन है. लिक्विड- फ्यूल वाली मिसाइलों को लॉन्च से पहले ईंधन भरने में कई घंटे लगते हैं. लेकिन इसमें पहले से ही फ्यूल लोडेड होता है, जिसकी वजह से कुछ ही मिनटों में इसे दागा जा सकता है. इसके अलावा सैटेलाइट्स और टोही विमान लॉन्च से पहले इसके बारे में आसानी से पता नहीं कर सकते.
कैसे पड़ा नाम
ईरान ने इस मिसाइल को सबसे पहले साल 2022 में दुनिया को दिखाया था. जब अरब में इस्लाम पनपा तो एक खैबर नाम की बस्ती थी, जिसमें मजबूत किले थे. इस बस्ती में काफी संख्या में यहूदी रहते थे. इसी पर इसका नाम खैबर रखा गया. वहीं, शिकन का फारसी में मतलब होता है ध्वस्त करने वाला. ऐसे ही इस मिसाइल का नाम खैबर शिकन रखा गया.
ईरान ने कहां-कहां किया इस्तेमाल?
IRGC ने हाल ही में जॉर्डन के अजरक स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेस और नए कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर पर खैबर शिकन से हमला करने का दावा किया है. इसके अलावा यूएई और आसपास के कई इलाकों में अमेरिकी ठिकानों को इससे निशाना बनाया गया है.
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ईरान का मिसाइल जखीरा कितना ताकतवर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास पश्चिम एशिया में सबसे ज्यादा मिसाइले हैं. ईरान के पास शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग रेंज सभी तरह की मिसाइलें हैं. ईरान के पास 150 से 800 किलोमीटर वाली शॉर्ट-रेंज की फतेह वैरिएंट्स, जोल्फगार, कियाम-1 और शहाब मिसाइलें हैं. इन मिसाइलों को पास के टारगेट्स पर झुंड में दागा जा सकता है.
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1500 से 2000 किलोमीटर तक टारगेट को निशाना बनाने वाली मीडियम-रेंज की शहाब-3, इमाद, कद्र-1, खोर्रमशहर, सेज्जिल और हाज कासिम मिसाइले हैं. इनकी जद में इजरायल और खाड़ी देशों में फैले अमेरिकी मिलिट्री ठिकाने आते हैं. इनके अलावा 2500 किलोमीटर तक मार करने वाली सोमर के अलावा होवेइजेह, पावेह और राद क्रूज मिसाइलें भी ईरान के पास हैं.
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