भारत-नेपाल की खुली सीमा, जिसे वर्षों से ‘रोटी-बेटी के रिश्ते’ की मिसाल माना जाता रहा है, अब सख्ती और निगरानी के घेरे में आ गई है. नेपाल में बालेन शाह सरकार के नए निर्देशों के बाद सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है. नेपाल के बाजारों में महंगाई तेजी से बढ़ी है. स्थानीय लोगों के मुताबिक केला 350 रुपये प्रति दर्जन, चीनी 100 रुपये प्रति किलो और प्याज़ 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. सीमावर्ती क्षेत्रों में इसे “अघोषित आर्थिक संकट” जैसी स्थिति बताया जा रहा है.
सीमा पर बढ़ी निगरानी
नेपाल सरकार के सख्त निर्देशों के बाद भारत से सटी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और आवाजाही पर सख्त निगरानी रखी जा रही है. कई इलाकों में हालात लगभग सैन्य क्षेत्र जैसे हो गए हैं. रक्सौल-वीरगंज सबसे ज्यादा प्रभावित भारत के रक्सौल और नेपाल के वीरगंज के बीच रोजमर्रा की खरीदारी और आवागमन लंबे समय से सामान्य जीवन का हिस्सा रहा है. लेकिन सख्ती के बाद यहां के बाजारों में सन्नाटा पसरा है.
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स्थानीय व्यवसायी अशोक अग्रवाल का कहना है कि इस फैसले से वर्षों पुराने सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों पर असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग सस्ते सामान के लिए एक-दूसरे के बाजारों पर निर्भर थे. व्यापारियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी वीरगंज चैंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़े कारोबारी हरी गौतम के अनुसार, सख्ती से गरीब तबके पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा और तस्करी बढ़ने की आशंका भी है. वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजारों में ग्राहक कम हो गए हैं और कारोबार ठप पड़ता जा रहा है.
सरकार का पक्ष
वीरगंज महानगर के मेयर विजय सरावगी का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच वस्तुओं की कीमतों में अंतर के कारण नेपाल सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था. इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है.
सीमावर्ती गांवों की स्थिति
मुशहरवा जैसे गांवों में स्थिति और जटिल है, जहां एक ही घर का हिस्सा भारत में और दूसरा नेपाल में पड़ता है. ऐसे गांवों के लोगों के सामने रोजमर्रा की जिंदगी चलाना चुनौती बन गया है.
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पुराने रिश्तों पर असर
मधेस आंदोलन 2015 के बाद से सीमा पर सख्ती की प्रवृत्ति बढ़ी है. अब नए निर्देशों ने इस सख्ती को और बढ़ा दिया है, जिससे वर्षों पुराने भरोसे और साझेदारी के रिश्तों पर असर पड़ रहा है.
निष्कर्ष
भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती सख्ती ने जहां सुरक्षा और राजस्व के सवाल को आगे रखा है, वहीं आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, व्यापार और सामाजिक रिश्तों को मुश्किल में डाल दिया है. अब देखना होगा कि यह सख्ती दोनों देशों के बीच भरोसे को मजबूत करती है या दूरी और बढ़ाती है.
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