हिंदी न्यूज़/एंटरटेनमेंट/'मुझे अब अटैचमेंट नहीं रहा…', सोनू निगम ने इंटरव्यू में बताया अपनी जिंदगी का अनछुआ हिस्सा, परिवार को लेकर कही गंभीर बातें
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‘मुझे अब अटैचमेंट नहीं रहा…’, सोनू निगम ने इंटरव्यू में बताया अपनी जिंदगी का अनछुआ हिस्सा, परिवार को लेकर कही गंभीर बातें
Sonu Nigam on Detachment: सिंगर सोनू निगम ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने परिवार से जुड़ा अजीबो-गरीब बयान दिया है. इसमें उन्होंने अपने परिवारजनों से अटैचमेंट कम होने की बात कही है. आइए जानते हैं पूरा मामला.
Sonu Nigam Spiritual Journey: सिंगर सोनू निगम के गाने आज भी लोगों की फेवरेट लिस्ट में शामिल रहते हैं. इसी बीच अपने परिवार से जुड़े इस बयान के चलते सोनू फिर से सुर्खियां बटोर रहे हैं. एक पॉडकॉस्ट के दौरान सोनू ने अपने परिवार से डिटैचमेंट की बात करते हुए वैराग्य की तरफ अपने आकर्षण के बारे में खुलकर बात की है.
सोनू निगम ने बताया कि पिछले कई सालों से वे ओशो और परमहंस योगानंद जैसे महान गुरुओं की शिक्षाओं से बहुत प्रभावित हैं. 2009 के आसपास उनके अंदर कुछ ऐसा बदला कि वे खुद को "अपनी जिंदगी के दर्शक" की तरह देखने लगे.
https://youtu.be/RVxjp8TsmNk?si=wvQxnMIUG62s1UTr
उन्होंने कहा कि अब न किसी से ज्यादा लगाव है और न ही किसी पर निर्भरता. "अब न पत्नी पर, न बच्चे पर, न पिता पर, न बहन पर, न दोस्त पर… किसी पर भी नहीं. उन्होंने आगे कहा कि 'कोई भी चीज उन्हें 1 या 2 दिन से ज्यादा परेशान नहीं कर सकती. सबके लिए अच्छी भावनाएं हैं, लेकिन अटैचमेंट खत्म हो गया है.' यह detachment (वैराग्य) उनकी आध्यात्मिक प्रगति का संकेत है, जहां इंसान रिश्तों से ऊपर उठकर शांति पाता है.
सोनू निगम बताते हैं कि अब वे परिवार से भावनात्मक रूप से दूर हो चुके हैं. इसका ये मतलब नहीं कि वे प्यार नहीं करते. उनका प्यार उतना ही है. लेकिन अब वैसा लगाव और जरूरत की भावना सोनू के दिल में नहीं रही. इसका श्रेय ज्यादादर उनके वैरागी मन और आध्यात्म की ओर जाते ध्यान को मिलना चाहिए. सोनू का मानना है कि यह उनकी शांति और मुक्ति का रास्ता है. उन्होंने यह भी जिक्र किया कि उनका कमरा और उनकी दिनचर्या अब भी वही है, लेकिन अंदर से सब कुछ बदल गया है.
जिंदगी का नजरिया बदला
इस इंटरव्यू से पता चला कि सोनू निगम अब सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि एक गहरे विचारक भी बन चुके हैं. संगीत अभी भी उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा है, लेकिन अब वे उससे भी ऊपर की चीजों की तलाश में हैं. उन्होंने कहा कि यह बदलाव उनके अंदर शांति लाया है और वे अब जिंदगी को एक खेल की तरह देखते हैं. उन्होंने बताया कि 'जीवन में जो कुछ भी होता है, उसको मैं जी तो रहा हूं, लेकिन उसी समय दर्शक बनकर देख भी रहा हूं. यह काफी अनोखा अनुभव है.'
Sonu Nigam Spiritual Journey: सिंगर सोनू निगम के गाने आज भी लोगों की फेवरेट लिस्ट में शामिल रहते हैं. इसी बीच अपने परिवार से जुड़े इस बयान के चलते सोनू फिर से सुर्खियां बटोर रहे हैं. एक पॉडकॉस्ट के दौरान सोनू ने अपने परिवार से डिटैचमेंट की बात करते हुए वैराग्य की तरफ अपने आकर्षण के बारे में खुलकर बात की है.
सोनू निगम ने बताया कि पिछले कई सालों से वे ओशो और परमहंस योगानंद जैसे महान गुरुओं की शिक्षाओं से बहुत प्रभावित हैं. 2009 के आसपास उनके अंदर कुछ ऐसा बदला कि वे खुद को “अपनी जिंदगी के दर्शक” की तरह देखने लगे.
उन्होंने कहा कि अब न किसी से ज्यादा लगाव है और न ही किसी पर निर्भरता. “अब न पत्नी पर, न बच्चे पर, न पिता पर, न बहन पर, न दोस्त पर… किसी पर भी नहीं. उन्होंने आगे कहा कि ‘कोई भी चीज उन्हें 1 या 2 दिन से ज्यादा परेशान नहीं कर सकती. सबके लिए अच्छी भावनाएं हैं, लेकिन अटैचमेंट खत्म हो गया है.’ यह detachment (वैराग्य) उनकी आध्यात्मिक प्रगति का संकेत है, जहां इंसान रिश्तों से ऊपर उठकर शांति पाता है.
सोनू निगम बताते हैं कि अब वे परिवार से भावनात्मक रूप से दूर हो चुके हैं. इसका ये मतलब नहीं कि वे प्यार नहीं करते. उनका प्यार उतना ही है. लेकिन अब वैसा लगाव और जरूरत की भावना सोनू के दिल में नहीं रही. इसका श्रेय ज्यादादर उनके वैरागी मन और आध्यात्म की ओर जाते ध्यान को मिलना चाहिए. सोनू का मानना है कि यह उनकी शांति और मुक्ति का रास्ता है. उन्होंने यह भी जिक्र किया कि उनका कमरा और उनकी दिनचर्या अब भी वही है, लेकिन अंदर से सब कुछ बदल गया है.
जिंदगी का नजरिया बदला
इस इंटरव्यू से पता चला कि सोनू निगम अब सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि एक गहरे विचारक भी बन चुके हैं. संगीत अभी भी उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा है, लेकिन अब वे उससे भी ऊपर की चीजों की तलाश में हैं. उन्होंने कहा कि यह बदलाव उनके अंदर शांति लाया है और वे अब जिंदगी को एक खेल की तरह देखते हैं. उन्होंने बताया कि ‘जीवन में जो कुछ भी होता है, उसको मैं जी तो रहा हूं, लेकिन उसी समय दर्शक बनकर देख भी रहा हूं. यह काफी अनोखा अनुभव है.’