अमिताभ बच्चन और दिवंगत धर्मेंद्र की फिल्म शोले (Sholay) को हर कोई काफी ज्यादा पसंद करता है. यही कारण ही की ये फिल्म बॉलीवुड की कल्ट फिल्मों में शुमार है. इस फिल्म को साल 1975 में रिलीज किया गया था. इस मूवी को रमेश सिप्पी (Ramesh Sippy) ने इंडियन सिनेमा को दी है. फिल्म रिलीज होने के वक्त किसी को यह पता नहीं था कि यह मूवी दशकों के बाद भी एक क्लासिक और बेहतरीन फिल्म गिना जाएगा.
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'शोले' फिल्म कब हुई थी रिलीज
आपको बता दें कि इस फिल्म का डायरेक्शन से लेकर फिल्म का सेट सब कुछ आज भी लोगों को याद है. इस मूवी का डायलॉग आज भी आइकॉनिक माना जाता है. इस फिल्म के डायलॉग आज भी कई वजहों से चर्चा में बने रहते हैं. दरअसल, इस मूवी के डायलॉग इतने पॉपुलर हैं कि सामने वाले के बोलते ही आप समझ जाते हैं कि कौन सी फिल्म की बात हो रही है. इस मूवी का हर सीन लोगों की दिलों और दिमाग में कब्जा कर लिया है.
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कार की बोनट पर लिखा 'शोले' फिल्म का डायलॉग
दरअसल, फिल्म शोले का पानी की टंकी वाला सीन देखते ही उसका डायलॉग याद आ जाता है. ‘मौसी जी सुसाइड’ और ‘चक्की पीसिंग एंड पीसिंग’ जैसे डायलॉग मौजूद है. इस डायलॉग में हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं को बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया गया था, जिससे दर्शकों ने काफी ज्यादा पसंद किया है. लेकिन आज हम आपको शोले फिल्म का एक ऐसा डायलॉग बताएंगे, जिसे जावेद अख्तर ने जल्दबाजी में लिखा था और आज वो सबसे ज्यादा यादगार माना जाता है.जावेद अख्तर ने ‘एंटरटेनमेंट पाकिस्तान’ को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वो अपनी फ्लाइट पकड़ने एयरपोर्ट की ओर जा रहे थे, तो उन्होंने फिल्म शोले का डायलॉग कार की बोनट पर लिखा था. उनके पास टाइम नहीं था, तो उन्होंने बिना दोबारा पढ़े ही वे कागज अपने असिस्टेंट को दे दिया था. बता दें कि जावेद अख्तर ने पानी की टंकी वाला डायलॉग कार की बोनट पर लिखा था.
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